दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ सरकारी अनुबंध वकील

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GNK Law Associates
दिल्ली, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
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दिल्ली के सर्वश्रेष्ठ वकीलजीएनके एडवोकेट एंड सॉलिसिटर, अपने विशिष्ट कानून क्षेत्रों के अभ्यासरत वकीलों और...
Vidhiśāstras-Advocates & Solicitors
दिल्ली, भारत

2011 में स्थापित
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विधिशास्त्र - अधिवक्ता एवं सलिसिटर, 2011 में श्री आशीष दीप वर्मा द्वारा स्थापित, भारत में एक प्रतिष्ठित विधिक फर्म है...
LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
दिल्ली, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. Delhi, India में सरकारी अनुबंध कानून का संक्षिप्त अवलोकन

दिल्ली में सरकारी अनुबंध कानून भारतीय संविधान और केंद्र-राज्य दोनों के स्तर पर संचालित नियमों के अंतर्गत आता है। प्रमुख कानून जैसे भारतीय अनुबंध अधिनियम 1872 तथा सार्वजनिक खरीद से जुड़े नियम Delhi के सरकारी प्रोजेक्ट्स पर लागू होते हैं।

अनुबंधों की पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए ई-प्रोक्योरमेंट (e-procurement) को प्राथमिक माना गया है। पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और खुली बोली सरकारी अनुबंधों के आधारभूत सिद्धांत हैं।

“GeM एक सरकार-निर्मित प्लेटफॉर्म है जो सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाता है।”
“Public procurement in India is conducted through open, competitive bidding and aims to be transparent.”
Source: https://gem.gov.in और https://eprocure.gov.in/eprocure/app

दिल्ली के विभागों में टेंडरिंग प्रक्रियाओं में DPWD, DJB, DDA जैसे विभाग प्रमुख भूमिका निभाते हैं और इन विभागों के माध्यम से GeM/ई-टेंडरिंग से बोली-प्रक्रिया संचालित होती है।

दिल्ली निवासियों के लिए व्यावहारिक सलाह: सरकार के साथ कोई अनुबंध नियुक्त करने से पहले, आवश्यकताएं स्पष्ट करें, बोली-प्रक्रिया के समय-सीमाओं को घर-आंगन में समझ लें और फाइनल अनुबंध में प्रदर्शन-गारंटी, पेमेंट-शर्तें और दंड-विधियाँ स्पष्ट हों।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे दिल्ली-सम्बन्धित वास्तविक परिदृश्यों में कानूनी सहायता क्यों जरूरी है, यह दिखता है।

  • टेंडर मूल्यांकन विवाद - दिल्ली के DPWD या DJB द्वारा जारी टेंडर में मूल्यांकन मापदंडों के सही अनुप्रयोग या अंकित मानदंडों के अनुचित पक्षपात के संदेह बनते हैं।
  • চুক্তि-निर्वाचित कॉन्ट्रैक्ट-डिफॉल्ट - ठेका पूरा नहीं करने, समय-सीमा में देरी या प्रदर्शन संहिता उल्लंघन पर अनुबंध निरस्तीकरण या दंड-व्यवस्था पर वकील की जरूरत होती है।
  • भ्रष्टाचार या अनियमितता के संदेह - बोली-प्रक्रिया में अनियमितता, कैश-ट्रांजैक्शन, दखल-योग्य प्रक्रियाओं के मामलों में उच्च-स्तरीय मार्गदर्शन आवश्यक होता है।
  • भुगतान विवाद/पेमेंट के मामले - ठेकेदार को समय पर भुगतान नहीं मिलने पर ब्याज, बेरियम या फ्रीज्ड पेमेंट से जुड़े कानूनी कदम उठाने पड़ सकते हैं।
  • जटिलता वाले मूल्य-निर्धारण - पेड-आउट, लीडिंग-कॉस्ट, बदलाव-आर्डर आदि मामलों में कॉन्ट्रैक्ट संशोधन के नियम स्पष्ट कर लिए जाएँ।
  • आर्बिट्रेशन या अनुबन्ध-विवाद - दिल्ली-आधारित विवादों के लिए मध्यस्थता अथवा न्यायालयीन विकल्पों में मार्गदर्शन जरूरी हो सकता है।

इन स्थितियों में एक स्थानीय वकील या कानूनी सलाहकार की भूमिका सुनिश्चित करती है कि ваш अनुबंध वैधानिक रूप से मजबूत हो, और पक्ष-विपक्ष के अधिकार सुरक्षित रहें।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

Delhi-विशिष्ट कानूनी ढांचे की पहचान के लिए नीचे उल्लेखित प्रमुख कानून/नियम सामान्य प्रावधानों को Delhi के सार्वजनिक अनुबंधों पर लागू करते हैं।

  • भारतीय अनुबंध अधिनियम 1872 - अनुबंध निर्माण, प्रस्ताव, स्वीकार, विचार-विमर्श और बाध्यता से जुड़े मूल सिद्धांत यहाँ से संचालित होते हैं।
  • General Financial Rules 2017 (GFR 2017) - केंद्रीय स्तर पर सार्वजनिक खरीद के सामान्य मानक, प्रक्रियाएँ और अनुशासनात्मक निर्देश देता है; Delhi में उन विभागों के लिए अनुरूप अनुप्रयोग होते हैं जो केंद्रीय तर्ज पर मानते हैं।
  • Public Procurement Policy for Micro and Small Enterprises (MSME) 2012/2019 संशोधन - MSEs के लिए सरकारी खरीद में आरक्षण और सशक्तिकरण के प्रावधान, जो Delhi-स्तरीय प्रोजेक्ट्स पर भी प्रभावी होते हैं।

Delhi-विशिष्ट अनुशासन के लिए सरकारी टेंडरिंग पद्धतियाँ सामान्यतः e-procurement प्लेटफॉर्म के माध्यम से चलती हैं और GNCTD के निर्देशों के अनुसार लागू होती हैं।

व्यावहारिक सलाह: दिल्ली-आधारित ठेकेदारों को अपने प्रोजेक्ट-डायनेमिक्स के अनुसार इन नियमों की स्पष्ट समझ बनानी चाहिए और टेंडर दस्तावेजों में दिए गए नियमों के अनुरूप ही बोली लगानी चाहिए।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरकारी अनुबंध क्या होता है?

सरकारी अनुबंध सरकारी विभाग द्वारा वस्तु, सेवा या निर्माण कार्य के लिए दी गई बाध्यकारी डील-शर्तों का एक प्रासंगिक लेखा-जोखा है।

बोली कैसे निर्धारित की जाती है?

बोली आमतौर पर तीन चरणों में होती है: सूचना पत्र, डाक्यूमेंट्स की प्रश्नावली, और मूल्य-आकलन। Delhi में यह e-procurement पोर्टल पर प्रकाशित रहता है।

EMD/रिटेंशन राशि क्या है?

Earnest Money Deposit (EMD) एक सुरक्षा राशि है जो बोलीदार द्वारा बोली के समर्थ होने की पुष्टि के लिए दी जाती है। समापन पर जीतने वाले को वापस कर दी जाती है, अन्यथा रोक दी जाती है।

टेंडर निविदा में किस प्रकार के वैधानिक मानदंड होते हैं?

कुशलता, अनुभव, फिनान्सियल तटस्थता, प्रदर्शन-गारण्टी, पोस्ट-कॉन्ट्रैक्ट सपोर्ट आदि मानदंड आवश्यक हो सकते हैं।

कौन सी प्रमुख भुगतान शर्तें सामान्य हैं?

आमतौर पर बिल-पेमेंट 30-90 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए; जमा-राशि, reten­tion money और penalties भी स्पष्ट होती हैं।

अगर बोली-विरोधी निर्णय हो जाए तो क्या करें?

वकील के माध्यम से appeal/representation-समेत محکमा-या केंद्रीय निगरानी संस्थाओं (जैसे CVC) के मार्ग से remedy ढूंढना संभव है।

कॉन्ट्रैक्ट-डिस्प्यूट कौन से मंच संभालते हैं?

डिस्प्यूट के लिए arbitration, mediation या civil courts के विकल्प उपलब्ध रहते हैं; Delhi-स्थित मामलों में कानून-परामर्श जरूरी है।

कौन से दस्तावेज अनिवार्य हैं?

टेंडर दस्तावेज, निविदा प्रस्ताव, EMD प्रमाणपत्र, प्रदर्शन-उद्धृतियाँ, बैंक गारंटी आदि आवश्यक होते हैं।

क्या GeM पर खरीदी अनिवार्य है?

कुछ प्रकरणों में GeM द्वारा समर्थित खरीद-प्रक्रिया प्राथमिक माना जाती है, खासकर उपकरण, सेवाओं और छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स के लिए।

क्यों मेरी संस्था को कानूनी सहायता चाहिए?

कानूनी सहायता से आप बोली-डिसीप्लिन, शर्तों की सुरक्षा, जोखिम-आकलन और विवाद-निपटान के उचित उपाय तय कर सकते हैं।

कानूनी सहायता कैसे शुरू करें?

पहले अपने प्रोजेक्ट की प्रकृति, बजट और समयरेखा स्पष्ट करें, फिर Delhi-आधिकारिक वकील/कानूनी सलाहकार से प्रारम्भिक मूल्य-आकलन करवाएं।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • GeM (Government e-Marketplace) - https://gem.gov.in
  • Central Public Procurement Portal (CPPP) - https://eprocure.gov.in/eprocure/app
  • MSME - Micro, Small and Medium Enterprises - https://msme.gov.in

6. अगले कदम

  1. आपकी खरीद-ज़रूरत को स्पष्ट रूप से लिखें और बजट निर्धारित करें।
  2. दिल्ली-आधारित सक्षम वकील/कानूनी सलाहकार की खोज करें।
  3. GeM और e-procurement portals पर वर्तमान टेंडर-सूचनाओं को देखें।
  4. टेंडर दस्तावेजों की समय-सीमा और शर्तों को अच्छी तरह समझें।
  5. कानूनी_solver से प्रारम्भिक परामर्श लें और डाक्यूमेंट्स तयार रखें।
  6. यदि आवश्यक हो तो बोली-प्रक्रिया के भीतर अपील/चैलेंज-फॉर्म भरें।
  7. समझौते पर हस्ताक्षर से पहले सभी पन्नों पर स्पष्ट क्लॉज़-समझौते करें।

उद्धृत आधिकारिक स्रोत:

“GeM is a not-for-profit, Government of India initiative to create a transparent and efficient public procurement system.”
“Public procurement in India is conducted through open, competitive bidding and aims to be transparent.”

Source: GeM, Central Public Procurement Portal

संभावित स्रोत-लिंक:

  • GeM: https://gem.gov.in
  • CPPP: https://eprocure.gov.in/eprocure/app
  • MSME: https://msme.gov.in
  • भारतीय अनुबंध अधिनियम 1872 (Bare Act): https://legislative.gov.in
  • General Financial Rules 2017 (GFR 2017): https://doe.gov.in/sites/default/files/GFR2017_0.pdf

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