लखनऊ में सर्वश्रेष्ठ सरकारी अनुबंध वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH
लखनऊ, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. लखनऊ, भारत में सरकारी अनुबंध कानून का संक्षिप्त अवलोकन

लखनऊ में सरकारी अनुबंध कानून सार्वजनिक खरीदी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। यह कानून सरकारी संस्थाओं के लिए अनुबंध नियम बनाता है। प्रमुख सिद्धांत हैं पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और समय पर पूरा होना।

सरकारी अनुबंधों का क्षेत्र केंद्रीय और प्रादेशिक स्तर पर विभाजित है। Lucknow में UP सरकार के टेंडर और केंद्र सरकार के प्रकल्प दोनों आते हैं। परिणामस्वरूप, कई कानूनी उपाय और विभागीय दिशानिर्देश प्रवर्तित रहते हैं।

उद्धरण: “Public procurement shall be conducted in a transparent and fair manner.” - Central Vigilance Commission (CVC)

उद्धरण स्रोत: https://cvc.nic.in और https://eprocure.gov.in पर सरकारी प्रविधियाँ पारदर्शिता से जुड़ी दिशाओं में स्पष्ट है।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • बोली-प्रक्रिया के बाद विवाद- निविदा मूल्यांकन, चयनCriteria, या बाधा-याचिका से जुड़ने पर सलाह चाहिए। सुरक्षा शर्तों तथा गारंटी अनुबंधों के अनुरूप हल निकाला जाता है।
  • समाप्ति और दायित्वों में असमंजस- अनुबंध-समाप्ति, दायित्व-निर्वाह, दंड-उपाय जैसे मुद्दों पर कानूनी मार्गदर्शन आवश्यक होता है।
  • भुगतान देरी या भुगतान-क्रेडिट- ठेकेदार को बकाया मिलने में देरी या ब्याज-चुकौती के दायरे में वकील की जरूरत पड़ती है।
  • बोली-प्रतिस्पर्धा और भ्रष्टाचार के दावे- टेंडर प्रक्रियाओं में अनियत बोली, पक्षपात, या प्रणालीगत व्यवस्थाओं के विरोध में कानूनी 도움 चाहिए।
  • नया अनुबंध-नियमन या परिवर्तन- संशोधनों, विस्तार, अथवा अनुदैर्घ्य की स्थितियों में सही-लगाने योग्य मार्गदर्शन जरूरी होता है।
  • लोकल-प्रावधान और UP-स्तर के नियम- Lucknow से संबंधित राज्य-स्तरीय नियमों और केंद्र-स्तरीय दिशा-निर्देशों के अनुसार सलाह चाहिए।

उदाहरण के तौर पर Lucknow में Lucknow Metro Rail Corporation (LMRC) के टेंडर प्रकरणों में मूल्यांकन और भुगतान से जुड़ी कानूनी राय आवश्यक हो सकती है। यह दर्शाता है कि किन स्थितियों में एक कानून-निपुण advocate आवश्यक रहता है।

संदर्भित अध्ययन और मार्गदर्शन के लिए अनुभवी advokats का चयन करें ताकि आप चयन-आख्यान, कॉन्ट्रैक्ट-रेखाएं और लीगल-चाल चल सकें।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • General Financial Rules, 2017 (GFR 2017) - केंद्र सरकार के सार्वजनिक-खरीदी नियम हैं जो Lucknow सहित सभी क्षेत्रों पर लागू होते हैं। वे बोली-प्रक्रिया, अनुबंध-स्वीकृति, और भुगतान-नियम तय करते हैं।
  • Indian Contract Act, 1872 - अनुबंध की स्थिरता, बाध्यता, ओर उपबंधों के अधिकारों-कर्तव्यों को निर्धारित करता है। सरकार- contract में यह आधार-स्तंभ है।
  • Arbitration and Conciliation Act, 1996 - सरकारी विवादों में विकल्प के रूप में समाधान के लिए arbitration का मार्ग देता है। Lucknow में उच्च न्यायालय भी arbitration के निर्णयों को स्वीकार करता है।

स्थानीय स्तर पर UP सरकार के विशिष्ट प्रावधान भी लागू होते हैं। UPS के प्राइवेट-सरकारी अनुबंधों में UPP PROCUREMENT तकनिकी नियमों का पालन आवश्यक रहता है।

उद्धरण: “All procurements shall be carried out through fair competition and objective criteria.” - CPP Portal

स्रोत: https://eprocure.gov.in और https://www.cvc.nic.in पर सार्वजनिक-खरीदी के दिशानिर्देश स्पष्ट मिलते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरकारी अनुबंध क्या है?

सरकारी अनुबंध वह कानूनी समझौता है जिसमें सरकार किसी संस्था, कंपनी या एजेंसी के साथ सेवाएं, वस्तु या निर्माण के लिए अनुबन्धित होती है। यह अनुबंध निश्चित दायित्व और समय-रेखा देता है।

लखनऊ में बोली कैसे दायर की जाती है?

सरकारी टेंडर e-procurement पोर्टल के माध्यम से जारी होते हैं। पंजीकरण, दस्तावेज़ अपलोड और bid-कॉम्पिटिशन नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।

अगर बोली-प्रक्रिया में धांधली की आशंका हो?

तो आप प्राथमिक-शिकायत, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) या राज्य-स्तरीय निगरानी संस्थान के समक्ष याचिका कर सकते हैं।

कौन-सी प्रमुख दस्तावेज़ चाहिए?

आमतौर पर कंपनी पंजीकरण प्रमाण पत्र, पैन, GSTIN, डिलीवरी-शेड्यूल, बैंक गारंटी आदि आवश्यक रहते हैं।

बिद-एवल्यूएशन कैसे होता है?

आमतौर पर मूल्य, योग्यता, तकनीकी अनुभव और डिलिवरेबल-समर्थन जैसी मापदंडों पर आधारित होता है।

बोली स्वीकार या अस्वीकार का निर्णय क्यों होता है?

यह निर्णय स्पष्ट, तर्कसंगत और ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया के आधार पर लिया जाता है ताकि हर बिडर को बराबरी मिले।

घटिया भुगतान-समझौता के क्या उपाय हैं?

आमतौर पर सरकार अनुबंध के clauses के अनुसार ब्याज, फांसी-आदेश या भुगतान-निर्देशन से निपटती है।

एग्रीमेंट-नियम में परिवर्तन कैसे रोकें?

कॉन्ट्रैक्ट-रेफरेंस, संशोधित शर्तें और change-Order के स्पष्ट दस्तावेज़ बना कर रखें।

क्या आप appellate- remedy ले सकते हैं?

हाँ, सामान्यत: हाई कोर्ट या सेकेंड-अपील में आप चुनौती दे सकते हैं, विशेषकर अनुशासन और प्रक्रियागत त्रुटियों पर।

क्या अदालतों में तुरंत injunctive relief मिल सकता है?

यह तथ्य-आधारित होता है, परन्तु तात्कालिक रोक संभव है जब नुकसान सार्वजनिक हित से जुड़ा हो या irreparable हो।

Arbitration में कितना समय लगता है?

मामला जटिलता पर निर्भर है, पर सामान्यतः 12 से 36 महीने में निर्णय संभव हो सकता है।

क्या लखनऊ निवासियों के लिए विशेष सलाह है?

स्थानीय संदिग्ध-टेंडर से पहले स्थानीय ADVOCATE से समीक्षा कराएं, ताकि UP-specific नियमों का पालन हो सके।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Central Public Procurement Portal (CPP Portal) - eprocure.gov.in
  • Central Vigilance Commission (CVC) - cvc.nic.in
  • Department of Expenditure (DoE) - doe.gov.in

6. अगले कदम

  1. अपने विषय से संबद्ध कानूनी सवालों को स्पष्ट करें और लक्षित उद्देश्य तय करें।
  2. Lucknow में किस विभाग या परियोजना के टेंडर से जुड़ना है, उसका चयन करें।
  3. एक अनुभवी सरकारी अनुबंध वकील से initial consultation दें-पूर्व-चयनित दस्तावेज़ लेकर जाएं।
  4. दस्तावेज़-चेकलिस्ट बना कर सभी आवश्यक प्रमाण-पत्र एकत्रित करें।
  5. यदि आप शिकायत करना चाहते हैं तो प्राधिकार-घटक या CVC के साथ रास्ते तय करें।
  6. ड्राफ्टिंग में कानूनी तर्क, फेयर-एव्यूएशन और लागत-मान सटीकता रखें।
  7. अनुद्वेष-संरक्षण के लिए आवश्यक हो तो arbitration के विकल्प पर विचार करें।

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