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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
गया, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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भारत में सूचना प्रौद्योगिकी कानून के बारे में विस्तृत मार्गदर्शिका

1. भारत में सूचना प्रौद्योगिकी कानून का संक्षिप्त अवलोकन

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के कानूनी मान्यता और डिजिटल सिग्नेचर के लिए ढांचा देता है। यह इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स, आचरण और साइबर-क्राइम से जुड़ी गतिविधियों के लिए साइबर कानून का आधार है।

2008 के संशोधन के साथ डेटा सुरक्षा, इंटरमीडिएरी दायित्व और अपराधों के दायरे को स्पष्ट किया गया। यह देश के भीतर और बाहर संचालित डिजिटल गतिविधियों पर गाइडlines तय करता है।

"An Act to provide for the legal recognition of electronic records, and for the digital signatures, and for matters connected therewith or incidental thereto."
"Section 66A of the Information Technology Act, 2000 is unconstitutional and void."

हाल के परिवर्तन में डिजिटल पर्सनल डाटा सुरक्षा के लिए नया अधिनियमन मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिसे 2023 में अधिनिर्णीत किया गया है। सरकार ने डेटा प्रोफाइल्स और डेटा प्राइवेसी के लिए नया ढाँचा स्थापित किया है ताकि व्यक्तिगत जानकारी के ऑनलाइन प्रदर्शन को सुरक्षित रखा जा सके।

नीतिगत मार्गदर्शन के लिए MeitY तथा CERT-In आदि आधिकारिक संस्थान सक्रिय रहते हैं। उच्च न्यायालय के निर्णयों ने भी ऑनलाइन अभिव्यक्ति बनाम सुरक्षा के संतुलन पर मार्गदर्शन दिया है

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 - टेक्स्ट और अनुप्रयोग कानून
  • Information Technology (Amendment) Act, 2008 - धाराओं में सुधार
  • Digital Personal Data Protection Act, 2023 - डेटा प्राइवेसी का नया ढाँचा

आधिकारिक स्रोत: IT Act 2000 का आधिकारिक पाठ, DPDPA 2023 की MeitY जानकारी, Shreya Singhal बनाम Union of India - Supreme Court

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे दिए गए 4-6 विशिष्ट परिदृश्य वास्तव में भारत के कानूनी ढांचे के अंतर्गत आते हैं। प्रत्येक स्थिति में एक अनुभवी कानून advisor की सलाह लाभदायक होती है।

  • परिदृश्य 1 - ऑनलाइन सामग्री से जुड़ी शिकायत: एक निजी प्लेटफॉर्म पर अभद्र या गलत सामग्री प्रकाशित होने पर धाराएं कैसे लगें और कैसे हटाई जाए, यह स्पष्ट करने के लिए आप कानून सलाहकार से सहायता लें।
  • परिदृश्य 2 - डेटा ब्रेच और डेटा सुरक्षा दायित्व: अगर आपकी संस्था के सिस्टम से उपयोगकर्ता डेटा लीक हो जाए, तो 43A-सम्बन्धी दायित्व और DPDPA 2023 के अनुरूप कदम क्या उठाने चाहिए, यह समझना जरूरी है।
  • परिदृश्य 3 - इंटरमीडिएरी दायित्व और जिम्मेदारी: सोशल नेटवर्किंग साइट या ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ता-जनित सामग्री के लिए takedown notice, पहचान और प्रकटीकरण नियम कैसे लागू होंगे, यह जानना आवश्यक है.
  • परिदृश्य 4 - इण्डस्ट्री-स्तर कॉपीराइट और इंटरनेट-आधारित ट्रेडमार्क: ऑनलाइन कंटेंट पर कॉपीराइट उल्लंघन या मालिश के मामले में कानूनी सुरक्षा और उपाय क्या हैं, यह समझना उपयोगी है।
  • परिदृश्य 5 - डिजिटल signatures और ई-चैन: डिजिटल सिग्नेचर प्रमाणन, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अनुबंधों की वैधता पर विवाद हो तो कैसे निपटें, इसके लिए वकील मदद दे सकते हैं।
  • परिदृश्य 6 - Aadhaar और डेटा अनुपालन: सरकारी डेटाबेस से जुड़ी सुरक्षा-उल्लंघन के मामले में सही अनुपालन, शिकायत-प्रक्रिया और वैधानिक कार्रवाइयों को समझना जरूरी है।

उच्चारण के साथ उदाहरण: Shreya Singhal बनाम Union of India मामले में अदालत ने 66A धाराओं को असंवैधानिक ठहराया था, जिससे मौजूदा अभिव्यक्ति के अधिकार और सुरक्षा-नीति का संतुलन परिपक्व हुआ। यह दर्शाता है कि कानूनी सलाहकार के बिना सोशल मीडिया-आधारित मामलों में गलत कदम भारी परिणाम दे सकते हैं

आधिकारिक उद्धरण और मार्गदर्शन के लिए देखें: Supreme Court of India, IT Act 2000, Intermediary Guidelines Rules 2021

3. स्थानीय कानून अवलोकन

भारत में सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े प्रमुख कानून नीचे दिए गए हैं। ये कानून एक-दूसरे के साथ मिलकर साइबर क्राइम, डाटा सुरक्षा और डिजिटल माध्यमों पर नियंत्रण करते हैं।

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 - इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, डिजिटल signatures, इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स और साइबर क्राइम की परिभाषाओं के लिए मूल ढांचा देता है।
  • Information Technology (Amendment) Act, 2008 - साइबर क्राइम धाराओं में संशोधन और इंटरमीडिएटरी दायित्वों को स्पष्ट करता है।
  • Digital Personal Data Protection Act, 2023 - व्यक्तिगत डेटा के प्रोसेसिंग के लिए अधिकार, दायित्व और डेटा संरक्षण बोर्ड के गठन पर केन्द्रित है।

आधिकारिक उद्धरण के लिए देखें: IT Act 2000, DPDPA 2023

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IT Act क्या है?

यह कानून इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, डिजिटल सिग्नेचर, इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स और साइबर अपराध से जुड़ी धाराओं का प्रावधान करता है।

66A क्या है और इसे प्रचलित क्यों नहीं माना गया?

66A सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा थी, जिसे 2015 में Supreme Court ने असंवैधानिक माना। यह अभिव्यक्ति के अधिकार पर अति-नियंत्रण मानकर रद्द कर दी गई।

DPDPA 2023 क्या है?

यह व्यक्तिगत डेटा के सुरक्षित प्रोसेसिंग के नियम तय करता है और डेटा principals तथा data fiduciaries के अधिकार और दायित्व निर्धारित करता है।

Intermediary Guidelines Rules 2021 क्यों अहम हैं?

ये नियम intermediaries को जोखिम-आधारित due diligence, content removal प्रक्रिया और user privacy प्रोटेक्शन के लिए निर्देश देते हैं।

43A का क्या महत्व है?

43A डेटा सुरक्षा के बारे में संविदात्मक दायित्वों का हिस्सा है; कंपनियाँ उपभोक्ता डेटा की सुरक्षा के लिए उचित तकनीकी उपाय करें, यह कानून कहता है।

किस प्रकार के अपराध IT Act के अंतर्गत आते हैं?

हैकिंग, impersonation, गलत दस्तावेज, डेटा चोरी, और साइबर धोखाधड़ी आदि धाराओं के दायरे में आते हैं।

कौन सा कानून आईपी/कॉपीराइट से जुड़े मामलों में लागू होता है?

ऑनलाइन कंटेंट पर कॉपीराइट संबंधित मुद्दों के लिए कॉपीराइट अधिनियम 1957 और IPC की धाराएं सहायक होती हैं।

व्यापार-ऑनलाइनデा क्या है?

डिजिटल अनुबंध, электронной हस्ताक्षर, और ई-चैन से जुड़े नियमों पर IT Act का प्रावधान लागू होते हैं।

डेटा ब्रेच की स्थिति में क्या करें?

तत्काल कानूनी सलाह लें, प्रभावित उपयोगकर्ताओं को सूचना दें, और आवश्यक ड्यू-डिलीज प्रक्रिया अपनाएं ताकि DPDPPA 2023 के अनुरूप हो सके।

कौन से substantives कानूनी कदम उठाने चाहिए?

अपने मामलों के अनुसार धाराओं का चयन करें, उचित निजता और सामग्री नियंत्रण के उपाय अपनाएं, और आवश्यक प्रतिरक्षण/नोटिस तैयार रखें।

क्या सरकारी एजेंसी के साथ सहयोग जरूरी है?

हां, ठोस रिकॉर्ड के साथ शिकायत, सूचना और हलके-फुल्के संचार में सहयोग जरूरी है ताकि मामलों की गति बढ़े।

5. अतिरिक्त संसाधन

नीचे तीन प्रमुख संगठन हैं जो सूचना प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण के बारे में विश्वसनीय मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

  • MeitY - Ministry of Electronics and Information Technology - भारतीय डिजिटल पॉलिसी, कानून और स्टेट प्लानिंग का आधिकारिक स्रोत। वेबसाइट
  • CERT-In - Indian Computer Emergency Response Team - साइबर सुरक्षा, incident response और सुरक्षा दिशानिर्देश का केंद्र। वेबसाइट
  • Data Security Council of India (DSCI) - कॉरपोरेट गवर्नेंस और डेटा सुरक्षा-प्रशिक्षण संस्थान, प्रमाणन और गाइडलाइंस। वेबसाइट

6. अगले कदम

  1. आपके मुद्दे की स्पष्ट रुचि और उद्देश्यों को लिखित रूप में निर्धारित करें।
  2. प्रासंगिक दस्तावेज एकत्र करें - contracts, notices, data-flow diagrams आदि।
  3. कानून विशेषज्ञ की चयन प्रक्रिया शुरू करें - क्षेत्र-विशेषता cyber law, IPC, DPDPPA आदि पर ध्यान दें।
  4. परामर्श के लिए एक या अधिक advokat से मुलाकात करें; प्रश्न-सूची साथ ले जाएँ।
  5. फीस संरचना, आचरण-वार्ता, और ड्यू-डिलीज टाइमलाइन पर स्पष्ट समझौता करें।
  6. आवश्यक मामलों के लिए preliminary legal opinion प्राप्त करें।
  7. अगर आवश्यक हो तो एसेसमेंट रिपोर्ट, incident response योजना और compliance गाइड तैयार करवाएं।

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