गया में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक कानून वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
गया, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

भारत में अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक कानून का संक्षिप्त अवलोकन

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक कानून दुनिया भर में अपराधों को सीमारेखा से ऊपर मानता है। भारत इन अपराधों को घरेलू कानून से पंजीकृत करता है। प्रमुख वैधानिक ढांचा है International Crimes (Miscellaneous Provisions) Act, 2004.

ICM Act के अंतर्गत genocide, crimes against humanity और war crimes जैसे अपराध भारत के भीतर और बाहर किए गए हों, उनके लिए दंडात्मक उपाय संभव हैं। यह कानून विदेशी नागरिकों पर भी समान अर्जिमा लागू करता है।

"An Act to provide for punishment for offences under the international law of genocide, crimes against humanity and war crimes committed anywhere in the world."
"India is not a party to the Rome Statute of the International Criminal Court."

इन बिंदुओं से स्पष्ट है कि भारत, रोम स्टैच्यू पर भागीदारी के बावजूद, अपने घरेलू ढांचे से अंतर्राष्ट्रीय अपराधों को नियंत्रित करता है। आधिकारिक स्रोतों के अनुसार भारत इस क्षेत्र में मौजूदा अनुबंध और कानूनों के साथ सहयोग करता है।

क्यों आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है?

  • विदेशी अपराध के आरोप में पकड़े गए व्यक्ति के विरुद्ध बचाव-चिकित्सा, प्रक्रिया और प्रमाण-संग्रह के लिए advokat चाहिये।
  • विदेश में अपराध से जुड़ी शर्तें भारत में ट्राय करवाने के लिए Extratition Act के तहत कानूनी सहायता जरूरी हो सकती है।
  • आरोपित या पीड़ित विदेशी संदिग्धों के साथ संयुक्त MLAT प्रक्रिया में कानूनी मार्गदर्शन आवश्यक हो सकता है।
  • क्रूरतापरक अपराध के पीड़ित परिवार को वकील की सलाह से न्याय दिलाने की मांग हो सकती है।
  • कम्प्लायंस, नुकसान भरपाई या साक्ष्य प्रबंधन के लिए अंतर्राष्ट्रीय अपराध कानून विशेषज्ञ चाहिए हो सकता है।

उदा: एक भारतीय नागरिक विदेश में war crimes के आरोपों में फंस गया हो, तो उसे ICM Act के अंतर्गत भारत में बचाव के लिए वकील चाहिए होगा।

उदा: किसी विदेशी नागरिक पर भारत में genocide के आरोप हैं और वे Indian court में defense चाहते हैं तो कानूनी सलाहकार की जरूरत पड़ेगी।

उदा: किसी कंपनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अपराधों में भागीदारी के आरोप हों तो कॉरपोरेट-लीगल स्पेशलिस्ट की भूमिका अहम रहती है।

स्थानीय कानून अवलोकन

International Crimes (Miscellaneous Provisions) Act, 2004 के तहत genocide, crimes against humanity और war crimes जैसे अपराध भारत में दंडनीय बनते हैं। यह अधिनियम विदेशी नागरिकों पर भी लागू माना जा सकता है।

Extradition Act, 1962 विदेशी माँग के आधार पर अपराधी की भारत से सत्यान्वेषण या प्रत्यर्पण से जुड़ी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है।

Geneva Conventions Act, 1960 संयुक्त राष्ट्र के जेनोवा कन्वेंशन के प्रावधानों को भारतीय कानून में लागू करने के लिए है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत अंतर्राष्ट्रीय अपराध कानून का क्षेत्र किस प्रकार संचालित करता है?

भारत ICM Act और अन्य क़ानूनों के साथ अंतर्राष्ट्रीय अपराधों को दंडनीय बनाता है। Extratition और MLAT प्रक्रियाएं सहयोग बढ़ाती हैं।

क्या भारत रोम स्टैच्यू का सदस्य है?

नहीं, भारत रोम स्टैच्यू का पार्टनर नहीं है। फिर भी ICM Act के जरिये अंतर्राष्ट्रीय अपराधों से निपटता है।

ICM Act क्या है और किसके लिए है?

ICM Act अंतर्राष्ट्रीय कानून के अंतर्गत अपराधों को भारत में दंडनीय बनाता है। यह नागरिकों और विदेशी नागरिकों दोनों पर लागू हो सकता है।

क्या भारत विदेश में किए गए अपराधों के लिए अधिकार क्षेत्र देता है?

हाँ, यह अधिनियम और अन्य प्रक्रियाएं extraterritorial अधिकार क्षेत्र की संभावनाएं स्थापित करती हैं।

कम-से-कम किस तरह की मामलों में वकील चाहिए होगा?

Extradition, MLAT, पीड़ित-उन्मुख उपचार, साक्ष्य संकलन और अदालत-समर्थन के लिए वकील जरूरी होता है।

एक अंतर्राष्ट्रीय अपराध के आरोपी के रूप में कैसे बचाव करें?

कानून की प्रक्रियाओं, अधिकारों और साक्ष्यों के निरीक्षण के लिए अनुभवी advokat शामिल करें।

ICM Act के तहत सजा कितनी हो सकती है?

जिन अपराधों के लिए दण्ड है, उनके अनुसार सजा तय होती है; सामान्य तौर पर उम्र, पुनर्वास और पुनरावृत्ति से प्रभावित होती है।

भारत में पीड़ितों के अधिकार कैसे सुरक्षित रहते हैं?

पीड़ितों के संरक्षण और साक्ष्य-उद्धरण के लिए विशेष नियम होते हैं। परामर्शदाता कानून सलाह देते हैं।

क्या कोर्ट भारत से बाहर की अदालतों में भी दख़ल डाल सकता है?

ICM Act के अनुसार घरेलू अदालतों के साथ कुछ परिस्थितियों में विदेशी मामलों पर अधिकार संभव है।

कानूनों की नवीनतम स्थिति क्या है?

भारत न तो रोम स्टैच्यू का सदस्य है और न ही ICC के प्रति बाध्य है। वैधानिक बदलाव MLAT और दंड-निर्णय पर केन्द्रित हैं।

मैं कहाँ से वकील ढूंढूँ?

विशेषज्ञ अन्तर्राष्ट्रीय अपराध कानून वाले advokat से परामर्श करें। वे कानून-प्रकिया और स्थानीय अदालतों के साथ काम करेंगे।

कानून और प्रैक्टिस से जुड़े oficiales उद्धरण

"The International Crimes (Miscellaneous Provisions) Act, 2004 provides for punishment for offences under the international law of genocide, crimes against humanity and war crimes."

सरकारी स्रोत बताते हैं कि India ICC की सदस्यता नहीं लेता, परन्तु घरेलू कानून से सहयोग करता है।

क्या अंतरराष्ट्रीय अपराध कानून में वास्तविक अदालत के उदाहरण हैं?

ICM Act के तहत भारत ने कुछ मामलों में अंतर्राष्ट्रीय अपराधों को दायरे में रखा है। अदालतें कानूनी सहायता और extradition प्रक्रियाओं के माध्यम से क्रियाशील रहती हैं।

छोटे बच्चों, महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षित उपाय क्या हैं?

कानून पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, साक्ष्यों की रक्षा और राहत उपाय उपलब्ध कराता है।

क्या मैं खुद कानूनी कार्रवाइयां कर सकता हूँ?

जी हाँ, पर अनुभव और उचित मार्गदर्शन के बिना जोखिम बढ़ सकता है। विशेषज्ञ वकील से सलाह लें।

कानून के अंतर्गत शिकायत कहाँ दर्ज करें?

ICM Act और CrPC के मायने में शिकायत स्थानीय न्यायालय के सामने दर्ज होती है।

क्या विदेशी मामलों में अदालतें स्वतंत्र निर्णय लेती हैं?

हाँ, पर süreç और मानक भारतीय कानून से संचालित होते हैं।

ICM Act के अतिरिक्त कौन से कानून मदद करते हैं?

Extradition Act, Geneva Conventions Act और CrPC जैसे कानून साथ मिलकर काम करते हैं।

मुझे कैसे पता चलेगा कि मुझे किस प्रकार बचाव चाहिए?

एक अनुभवी अंतर्राष्ट्रीय अपराध कानून वकील आपकी स्थिति के अनुसार रणनीति बताएगा।

अगर मुझे शिकायत वापस लेने की इच्छा हो?

स्थिति के अनुसार अदालत से मंजूरी लेनी पड़ सकती है। एक वकील इस प्रक्रिया में मार्गदर्शन देगा।

अन्तराष्ट्रीय अपराध कानून में भारत की स्थिति क्या है?

भारत ICC का सदस्य नहीं है, फिर भी ICM Act और संबंधित कानूनों से अंतर्राष्ट्रीय अपराधों से निपटता है।

कौन से अदालती रिकॉर्ड्स बेहतर समझाते हैं?

India की Supreme Court और High Courts के अंतरराष्ट्रीय अपराध मामलों के निर्णय महत्वपूर्ण होते हैं।

क़ानून-नुसार अधिकार क्या हैं?

Each accused has presumption of innocence, Right to counsel, and right to a fair trial, as per Indian law.

नोट

यह जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। यह कानूनी सलाह नहीं है। व्यक्तिगत स्थिति के लिए वकील से संपर्क करें।

अतिरिक्त संसाधन

अगले कदम

  1. अपने मामले की स्थिति स्पष्ट करें और लक्ष्य निर्धारित करें।
  2. ICM Act, Extradition Act आदि की रूपरेखा समझें।
  3. अंतर्राष्ट्रीय अपराध कानून में माहिर वकील खोजें।
  4. कौन से दस्तावेज उपलब्ध हैं, उसका संकलन करें।
  5. पहली सलाह के लिये कॉन्सल्टेशन शेड्यूल करें।
  6. फीस संरचना और भुगतान तरीके स्पष्ट करें।
  7. निर्णय लेने से पहले पर्याप्त सवाल पूछें और विकल्प समझें।

उद्धरण और स्रोत: आधिकारिक क़ानून पन्ने और सरकारी पन्नों पर आधारित जानकारी की पुष्टि करें-

International Crimes (Miscellaneous Provisions) Act, 2004 - IndiA Code

Extradition Act, 1962 - Legislative.gov.in

Rome Statute नहीं होने पर India's stance - MEA

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