दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ सैन्य तलाक वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
दिल्ली, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. Delhi, India में सैन्य तलाक कानून के बारे में

Delhi, India में सैन्य तलाक के लिए कोई अलग स्वतंत्र कानून नहीं है; तलाक सामान्य नागरिक व्यक्तिगत कानूनों के अंतर्गत आता है। सेना के कर्मियों के लिए न्याय प्रक्रिया और पारिवारिक अधिकार आम तौर पर स्थानीय फॅमिली कोर्ट के अधिकार-क्षेत्र में आते हैं। सैनिकों के सेवा नियम अदालत के फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं, जैसे रख-रखाव, मतभेद में बच्चे की देखरेख आदि की व्यवस्था, पर तलाक का आधार और प्रक्रिया नागरिक कानून से ही तय होते हैं।

दिल्ली निवासी सैन्य कर्मी के तलाक के लिए प्रमुख मार्ग सामान्य हिन्दू विवाह अधिनियम, नसबंदी नहीं; inter-religious मामलों के लिए विशेष विवाह अधिनियम आदि लागू होते हैं। दो प्रमुख बातें ध्यान में रखें: स्थानांतरण और ड्यूटी के कारण बहुविध स्थानों पर रहने की स्थिति में अदालत के समन्वय, और दिल्ली के फॅमिली कोर्ट्स में मुकदमा दर्ज करने की संभावना।

“An Act to provide for the establishment of the Armed Forces Tribunal for the adjudication of disputes and matters relating to the service matters.”

आधिकारिक संदर्भ: Armed Forces Tribunal Act, 2007 के उद्देश्य के बारे में आधिकारिक सार यह है कि सेना के सेवा- matters से जुड़ी disput es अब एक विशेष ट्रिब्यूनल के जरिये सुलझते हैं।

आधिकारिक संदर्भ: Hindu Marriage Act, 1955 के आधिकारिक पृष्ठ से यह स्पष्ट है कि परिवारिक कानून हिंदू समुदाय के विवाह, तलाक आदि पर नियम تحدید करता है।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: सैन्य तलाक कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची

Delhi से संबंधित वास्तविक स्थितियों में नीचे दिए गए परिदृश्य सामने आ सकते हैं जिनमें वकील की जरूरत होती है। प्रत्येक परिदृश्य के साथ एक व्यावहारिक सुझाव जो Delhi-स्थित फॅमिली कोर्ट के कामकाज के अनुसार है:

  • परिदृश्य 1: एक Défense अधिकारी दिल्ली में तैनात है और उसकी पत्नी दिल्ली में तलाक करने के लिए फाइल करना चाहती है। सेवा-स्तर के कारण प्रस्तुति और सेवा-पूर्व समन की जटिलताएं हो सकती हैं। सलाह: पहले वकील से यह जानें कि दिल्ली के किस फैमिली कोर्ट में वादी/प्रतिवादी की habitual residence है और कहाँ मुकदमा दायर किया जा सकता है।
  • परिदृश्य 2: सैनिक ड्यूटी के कारण spouse दिल्ली से बाहर पोस्टेड है। ऐसे में सार्थक सेवा-सम्बंधी नोटिस, मॉडल विकल्प और स्थान-पर-आधारित बहस की जरूरत होती है। सलाह: अनुभवी रक्षा कानून विशेषज्ञ से स्थगन, समन-प्रक्रिया और सेवा-सम्बन्धी NOC से संबन्धित मार्गदर्शन लें।
  • परिदृश्य 3: Maintenance (भरण-पोषण) संबंधी मांग CrPC धारा 125 के अंतर्गत दिल्ली में दायर हो। सैन्य वेतन-सहायता जैसी सेवा-आय को भरण-समिति में विचार किया जा सकता है। सलाह: ऐसे मामलों के लिए अनुभवी वकील से अदालत-आयोग के मानकों के अनुसार भरण-आयोग तय करवाने पर जोर दें।
  • परिदृश्य 4: बच्चों की कस्टडी और उनके देखरेख के मुद्दे सैन्य पृष्ठभूमि के कारण जटिल हो सकते हैं, विशेषकर deployed माता-पिता के संदर्भ में। सलाह: Delhi के फॅमिली कोर्ट से कस्टडी की व्यवहारिक गाइडेंस और visitation rights जानें।
  • परिदृश्य 5: Domestic Violence Act के अंतर्गत पत्नी द्वारा DVिशन की शिकायत दिल्ली में दर्ज हो। रक्षा कर्मियों के साथ भी यह कानून लागू है और सुरक्षा आदेशों का मार्गदर्शन चाहिए। सलाह: DV अधिनियम के लाभों, निर्देश, और आपातकालीन राहत के लिए विशेषज्ञ से मदद लें।
  • परिदृश्य 6: inter-religious विवाह या domicile-स्थिति के कारण Special Marriage Act के अंतर्गत तलाक की मांग Delhi में हो। सलाह: वैकल्पिक कानूनों के बारे में स्पष्ट रणनीति बनाएं और jurisdiction confirm करें।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: Delhi, India में सैन्य तलाक को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

Delhi में तलाक से जुड़ते जिन प्रमुख कानूनों को समझना आवश्यक है:

  • हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 - हिंदू समुदाय के भीतर विवाह, तलाक, गुज़िरात आदि के नियम।
  • विशेष विवाह अधिनियम, 1954 - inter-religious और inter-caste विवाहों के लिये तलाक और अन्य राहतों के प्रावधान देता है।
  • दमन-धारण (Domestic Violence) अधिनियम, 2005 - घरेलू हिंसा से पीड़ित व्यक्तियों के लिए सुरक्षा आदेश, राहतें और संरक्षण प्रदान करता है।

इसके अलावा दिल्ली में भरण-वरन (Maintenance) के लिए आलोक CrPC धारा 125 लागू होती है, जिसका उद्देश्य पत्नी, बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता के लिए भरण-निर्वाह सुनिश्चित करना है।

“If any person having sufficient means neglects or refuses to maintain his wife, his legitimate or illegitimate child, or his father or mother.”

दिल्ली में तलाक से जुड़ी कार्यवाही में यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि आंतरिक सेवा, Army Act, Navy Act, Air Force Act जैसे निर्देश संरचना-स्तर पर लागू हो सकते हैं और अदालत के आदेशों के साथ सेवा-आवंटन के समन्वय की जरूरत पड़ती है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या military तलाक के लिए Delhi की Family Court जरूरी है?

हाँ, सामान्यत: Delhi के Family Court ही तलाक, कस्टडी, भरण-पोषण जैसे मामलों की अधिकारिता रखते हैं, भले ही पति-पत्नी में से एक रक्षा सेवक हो।

कौन सा कानून लागू होगा अगर विवाह हिंदू धर्म का है?

यदि विवाह हिंदू धर्म का है, तो हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 लागू होगा और तलाक की प्रक्रिया वहीं से शुरू होगी।

Inter-religious विवाह में कौन सा कानून लागू होगा?

Inter-religious विवाह के लिए विशेष विवाह अधिनियम 1954 लागू होता है, और Delhi में इसी कानून के अंतर्गत तलाक की प्रक्रिया चलेगी।

क्या Defence personnel के वैवाहिक विवाद में maintenance court आदेश दे सकता है?

हाँ, CrPC की धारा 125 के अनुसार यदि पति या पत्नी के पास पर्याप्त साधन हैं और वे भरण-पोषण नहीं कर रहे हैं, तो अदालत onderhoud आदेश दे सकती है।

DV शिकायत किन परिस्थितियों में दर्ज की जा सकती है?

DV अधिनियम 2005 के अंतर्गत घरेलू हिंसा से पीड़ित व्यक्ति सुरक्षा आदेश, रोक-टोक और राहत प्राप्त कर सकता है, चाहे वह रक्षा सेवक के विरुद्ध हो या उसके परिवार के अन्य सदस्य के विरुद्ध हो।

कौन से दस्तावेज़ ज़रूरी होते हैं?

पहचान पत्र, विवाह प्रमाण पत्र, domicile प्रमाण, बच्चों के जन्म प्रमाण-पत्र, आय-प्रमाण आदि आम तौर पर मांगे जाते हैं।

क्या तलाक mutual consent से जल्दी मिल सकता है?

हाँ, यदि दोनों पक्ष छह महीने के दर्शित समय के बाद सहमत हों और अदालत संतुष्ट हो कि पुनर्मिलन की संभावना नहीं, तो दया-पूर्वक तलाक हो सकता है।

कस्टडी के मामलों में Delhi Court कैसे निर्णय लेता है?

बच्चों के सर्वोच्च हित को प्राथमिक मानकर निर्णय लिया जाता है; माता-पिता के क्षेत्रीय निवास, रोजगार, और सुरक्षा-नीतियों को भी महत्व दिया जाता है।

क्या Delhi में कोई विशेष निर्देश हैं जो military परिवारों के लिए मदद कर सकें?

District Courts के Family Court परिसर में समर्पित legal aid desks और defense lawyers की उपस्थिति से सहायता मिलती है; DSLSA और DCW जैसी संस्थाएँ मार्गदर्शन देती हैं।

क्या तलाक के बाद maintenance के कुछ हिस्से बदल सकते हैं?

हाँ, अदालत के पुनर्विचार और परिवर्तनादेश (Modification) के माध्यम से maintenance amount बदला जा सकता है, अगर परिस्थितियाँ बदली हों।

क्या मैं एक ही वकील के साथ Civil और Military मामलों एक साथ ले जा सकता हूँ?

हाँ, पर एक अनुभवी family-law advokat आपके दोनों मामलों के केंद्र-नुकते मिलकर चेक करेगा ताकि प्रक्रिया सुव्यवस्थित रहे।

आखिरी कदम क्या हो?

तुरंत एक qualified family-law वकील से सलाह लें, Delhi के Family Court के jurisdiction की पुष्टि करें, और आवश्यक दस्तावेज एकत्रित करें।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • राष्ट्रीय वैधानिक सहायता संस्था (National Legal Services Authority, NALSA) - Legal aid और free legal services के लिए राष्ट्रीय मंच।
  • दिल्ली राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण (Delhi State Legal Services Authority, DSLSA) - दिल्ली में लोक-उपयोगी कानूनी सहायता कार्यक्रम और क्लीनिक।
  • दिल्ली आयोग फॉर विमेन (Delhi Commission for Women, DCW) - घरेलू हिंसा, महिला सुरक्षा और परामर्श सेवाएं प्रदान करता है।

इन संस्थाओं के आधिकारिक साइट लिंक पर जाकर मुफ्त कानूनी सहायता, मार्गदर्शन और स्थानीय क्लीनिक्स के बारे में जानकारी लें।

6. अगले कदम: सैन्य तलाक वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. Delhi के आसपास के District Courts की Family Court सूची और क्षेत्र-वार अधिकारिता पहचानें (जैसे Saket, Dwarka, Patiala House Courts)।
  2. अपनी स्थिति के अनुसार उपयुक्त कानून तय करें (हिंदू विवाह अधिनियम बनाम Special Marriage Act आदि).
  3. कौशल-युक्त अनुभव वाले रक्षा-तथा फॅमिली-लॉ के advokat खोजें; ISR/Service Law से परिचित प्रैक्टिशनर देखें।
  4. पूर्व-परामर्श के लिए दस्तावेज़准备 करें - विवाह प्रमाण, बच्चों के प्रमाण, आय प्रमाण, सेवा-स्थिति आदि।
  5. कानूनी फीस, केस-फार्मेट, और court-fee के बारे में स्पष्ट प्रस्ताव मांगें।
  6. पहला काउंसिलिंग सेशन बुक करें और दिल्ली Family Court में jurisdiction पक्का करें।
  7. कानूनी नोटिस, प्लीडिंग, और डोकेमेंटेशन के साथ केस-स्टेप-चेकलिस्ट बनाए रखें।

आधिकारिक उद्धरण स्रोत

“An Act to provide for the establishment of the Armed Forces Tribunal for the adjudication of disputes and matters relating to the service matters.”
“An Act to amend and codify the law relating to marriage among Hindus.”
“If any person having sufficient means neglects or refuses to maintain his wife, his legitimate or illegitimate child, or his father or mother.”

आधिकारिक लिंक

  • हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 - Official text: https://www.indiacode.nic.in/acts/In1957OnHinduMarriageAct1955
  • Armed Forces Tribunal Act, 2007 - Official text: https://legislation.gov.in/
  • CrPC धारा 125 - Maintenance provisions - Official text: https://legislative.gov.in/
  • National Legal Services Authority (NALSA) - https://nalsa.gov.in/
  • Delhi State Legal Services Authority (DSLSA) - https://dslsa.org.in/
  • Delhi Commission for Women (DCW) - https://dcw.gov.in/

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