सिवान में सर्वश्रेष्ठ गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
सिवान, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. सिवान, भारत में गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ कानून का संक्षिप्त अवलोकन

सीवान जिला बिहार का एक प्रमुख आदित्य क्षेत्र है जहाँ कई गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ सामाजिक कार्य करती हैं. इन संस्थाओं के लिए पंजीकरण के कई मार्ग उपलब्ध हैं, जैसे समाज (Society) 1860 के अधिनिर्देश, ट्रस्ट 1882 के अधिनिर्देश और कॉम्पनीज ऐक्ट 2013 के तहत सेक्शन 8 कंपनियाँ. हर मार्ग के अपने-अपने अनुपालन और लाभ हैं.

भारत के गैर-लाभकारी कानून में विदेशी योगदान के नियम भी बहुत मायने रखते हैं. विदेशी फंडिंग पाने के इच्छुक संगठन FCRA के अंतर्गत पंजीकरण कराते हैं और इसके नियमों का पालन करते हैं.

मुख्य बात यह है कि सिवान के नॉन-प्रॉफिट संस्थान स्थानीय और केंद्रीय कानून दोनों के अधीन रहते हैं, जिनमें पंजीकरण प्रकार, आय कर सहूलियत और विदेशी योगदान पर नियंत्रण शामिल हैं.

“The primary object of the Foreign Contribution Regulation Act 2010 is to regulate the acceptance and utilization of foreign contributions or foreign hospitality by certain individuals or associations.”
Source: fcra.gov.in

आयकर मार्गदर्शन से संस्थाओं को 12A और 80G प्रविष्टियाँ मिलती हैं ताकि आय से आच्छादित लाभ मिल सके. यह कर-सहायता NGOs के लिए प्रमुख वित्तीय सुविधा है.

“The registration under section 12A is required to claim exemption on income of a trust or NGO.”
Source: incometaxindia.gov.in

सीवान में स्थानीय किसानों, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में NGO-कार्य प्रचलित है. हाल के वर्षों में पारदर्शिता और डाक्यूमेंटेशन पर प्राथमिक्ता बढ़ी है.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

सीवान में गैर-लाभकारी संस्थाओं को निर्णय, पंजीकरण, और अनुपालन से जुड़ी कठिनाइयाँ आ सकती हैं. नीचे 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए गए हैं जिनमें कानूनी सलाह जरूरी होती है.

  • पंजीकरण और गठन के विकल्प चयन - एक नया NGO 1860 के समाज अधिनियम, 1882 के ट्रस्ट अधिनियम या 2013 के सेक्शन 8 कंपनी के रूप में कैसे पंजीकृत करे, यह निर्णय लेना कठिन हो सकता है.
  • विदेशी योगदान (FCRA) से जुड़े नियम - यदि संस्था को विदेशी राशि मिलती है, तो पंजीकरण, फाइलिंग और निगरानी नियमों का अनुपालन आवश्यक है. स्थानीय दायरे में फर्जीवाड़े और ट्रांसफर प्रकरणों से जुड़ी कानूनी बदली हो सकती है.
  • कर अवकाश (टैक्स-एक्जेम्शन) के लिए 12A/80G - टैक्स-छूट के लिए आवश्यक आवेदन, ऑडिट, और आवधिक आयकर विभाग की जाँच-नीतियाँ.
  • वार्षिक अनुपालन और आडिट - वित्तीय वर्ष-आधारित दाखिले, ऑडिट रिपोर्ट और सूचना प्रस्तुतिकरण की तिथियाँ सुनिश्चित करना जरूरी होता है.
  • सम्पत्ति/भूमि से जुड़ी समस्या - जमीन पर दान, भूमि-देवदारी, या ग्राम पंचायत के साथ अनुबंधों के मामले में कानूनन सुरक्षा चाहिए.
  • गवर्नेंस और आंतरिक विवाद - निदेशक मंडल के निर्णय, बहिष्कार-योजना और दायित्व-निर्धारण में कानूनी सलाह आवश्यक हो सकती है.

सीवान के निकटवर्ती क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण कल्याण योजनाओं के लिए कई NGOs स्थानीय सरकार और ग्राम पंचायतों के साथ कार्य करते हैं. इस प्रकार के मामलों में एक अनुभवी_advocate_ के साथ संवाद लाभदायक रहता है.

3. स्थानीय कानून अवलोकन

नीचे सीवान-आधारित NGOs के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण 2-3 कानूनों का नाम और उनका संक्षिप्त सार दिया गया है.

  • Societies Registration Act, 1860 - समाजों के पंजीकरण और आंतरिक नियम-पालन का आधार है. बिहार में कई NGOs इसी मार्ग से पंजीकृत होते हैं.
  • Indian Trusts Act, 1882 - ट्रस्टों के लिए नियम-निर्धारण, ट्रस्ट दस्तावेज की मान्यता और संरचना निर्धारित करता है.
  • Companies Act, 2013 (Section 8 Companies) - लाभ-रहित कंपनियाँ बनाकर सामाजिक कार्य संचालित करने के लिए उपयुक्त मार्ग.

फिर भी अन्य प्रमुख कानून हैं जो NGO के विकास और अनुपालन को प्रभावित करते हैं: FCRA 2010 विदेशी योगदानों के नियम, और Income Tax Act 1961 के तहत 12A-80G जैसी कर-छूट प्रावधान.

“Section 8 companies are not-for-profit organisations formed for promoting commerce, art, science, sports, education, research, social welfare or other charitable objects.”
Source: Ministry of Corporate Affairs

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीवान में NGO के लिए कौन-कौन से पंजीकरण विकल्प हैं?

सीवान में NGO पंजीकरण के तीन सामान्य मार्ग हैं: 1860 के समाज अधिनियम के तहत Society, 1882 के ट्रस्ट अधिनियम के तहत Trust, और Companies Act 2013 के अंतर्गत Section 8 Company. हर विकल्प के अधिकार और दायित्व अलग हैं.

FCRA पंजीकरण क्यों आवश्यक है और कब लेना चाहिए?

यदि NGO को विदेश से फंडिंग चाहिए, तब FCRA पंजीकरण अनिवार्य होता है. बिना पंजीकरण के विदेशी योगदान प्राप्त नहीं किया जा सकता. साथ ही वार्षिक फाइलिंग और आय-खर्च रिपोर्टिंग भी अनिवार्य है.

12A और 80G टैक्स छूट पाने के लिए क्या आवश्यक है?

12A पंजीकरण के बाद NGOs अपने आय पर आयकर में छूट का दावा कर सकते हैं. 80G के लिए दानदाताओं को कर कटौतियां मिल सकती हैं. यह दोनों प्रविष्टियाँ देय जाँच और वैध ऑडिट पर निर्भर करती हैं.

NGO के लिए वार्षिक अनुपालन क्या-क्या शामिल होते हैं?

आमतौर पर वित्तीय विवरण, ऑडिट रिपोर्ट, बोर्ड बैठक के मिनट्स, और संबंधित सरकारी फॉर्म-फाइलिंग शामिल होते हैं. समय-सीमा का पालन अत्यंत जरूरी है.

सीवान में भूमि/सम्पत्ति से जुड़े विवादों में वकील की भूमिका क्या है?

दारोगा-ग्राम स्तर पर भूमि-दान, देन-दार, अनुबंध, पट्टा आदि मामलों में कानूनी सलाहकार की मदद से वैधानिक दस्तावेज तैयार किए जाते हैं और विवादों का निपटान होता है.

कौन से कानूनी दस्तावेज सबसे महत्वपूर्ण होते हैं?

संगठन के नियमावली (MOA), संविधान, ट्रस्ट डीड, पंजीकरण प्रमाण पत्र, बैंक-खाते के रिकॉर्ड, वित्तीय वर्ष-आधारित ऑडिट रिपोर्ट आदि प्रमुख होते हैं.

कानूनी सलाह कब और कैसे लेना चाहिए?

नए पंजीकरण, फॉर्म-फाइलिंग, विदेशी सहायता, या किसी विवाद के समय तुरंत वकील से संपर्क करें. स्थानीय बार অ্যासोसिएशन से संपर्क करना उपयोगी रहता है.

सीवान के लिए कौन-सी सार्वजनिक पहुँच संसाधन उपयोगी हैं?

स्थानीय विधिक सहायता कार्यालय, जिला न्याय सुविधा केंद्र और NALSA जैसी संस्थाओं के मार्गदर्शन से मदद मिलती है.

NGO पंजीकरण के दौरान किन बातों पर खास ध्यान दें?

धारणा-स्तर, उद्देश्य, संस्थागत संरचना, वित्तीय प्रणाली और स्वयं का पारदर्शी इतिहास. साथ ही विदेशी योगदान और कर-छूट के नियमों के अनुसार अनुपालन योजना बनाएं.

कानूनी सहायता किस प्रकार मिल सकती है?

सीवान सहित बिहार में राज्य-स्तर पर Legal Aid Services उपलब्ध हैं. NALSA और BSLSA के कार्यक्रमों से मुफ्त या कम-शुल्क कानूनी सहायता मिलती है.

क्या एक NGO के लिए बाहरी सलाहकार सच में आवश्यक हैं?

हां, विशेषकर FCRA, 12A/80G, और संयुक्त-राज्य स्तर के अनुपालन के लिए अनुभवी Advocate की भूमिका अहम हो जाती है.

NGO के लिए यदि विवाद हो तो सबसे पहले क्या करें?

कानूनी सलाह लें, दस्तावेज़ एकत्र करें, और स्थिति के अनुसार अग्रिम कदम तय करें. स्थानीय अदालत-समझौता या वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) के विकल्प भी देखे जा सकते हैं.

5. अतिरिक्त संसाधन

ये संस्थान और संसाधन NGO-कार्य के लिए उपयोगी दिशानिर्देश, मार्गदर्शन, और सहायता प्रदान करते हैं.

  • - निःशुल्क कानूनी सहायता और संसाधन. nalsa.gov.in
  • - बच्चों के अधिकारों पर केंद्रित प्रमुख NGO. cry.org
  • - शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में राष्ट्र-स्तर पर समर्थक गतिविधियाँ. azimpremji.org

6. अगले कदम

  1. अपने संगठन के लक्षित उद्देश्यों और गतिविधियों के अनुसार पंजीकरण प्रकार तय करें (Society, Trust या Section 8 Company).
  2. सीवान में स्थानीय बार-एसोसिएशन से NGO-विशेषज्ञ वकील की सूची मांगें और उनकी योग्यता जाँचें.
  3. FCRA, 12A और 80G जैसी प्रमुख देयताओं के लिए आवश्यक दस्तावेज़ तैयार रखें.
  4. NGO के लिए एक स्पष्ट अनुपालन योजना और आडिट-गाइडलाइन बनाएं।
  5. डायरेक्टर-मैनेजमेंट, बोर्ड मिनिट्स और वित्तीय रिकॉर्ड के लिए सिस्टम बनाएं।
  6. संबंधित सरकारी पोर्टलों पर आवश्यक फॉर्म और अनुपालन-तिथियाँ नोट करें और कैलेंडर बनाएं।
  7. सबसे पहले एक स्थानीय वकील से 1-2 घंटे की initial consultation बुक करें और आपकी स्थिति पर मार्गदर्शन मांगें.

उद्धरण और आधिकारिक स्रोत:

“The Foreign Contribution Regulation Act 2010 aims to regulate the acceptance and utilization of foreign contributions by certain individuals or associations.”
Source: fcra.gov.in
“Section 8 companies are not-for-profit organizations formed for promoting commerce, art, science, sports, education, research, social welfare or other charitable objects.”
Source: Ministry of Corporate Affairs
“Registration under section 12A is required to claim exemption on income of a trust or NGO.”
Source: Income Tax Department

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