दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ साहसिक पूंजी वकील

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Shivam Legal Services
दिल्ली, भारत

2019 में स्थापित
उनकी टीम में 5 लोग
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हम अनुभव और नई ऊर्जा का मिश्रण लेकर अनेक मुकदमों और पैरालीगल सेवाओं के क्षेत्रों में कार्यरत हैं। हम नागरिक,...
Vidhiśāstras-Advocates & Solicitors
दिल्ली, भारत

2011 में स्थापित
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विधिशास्त्र - अधिवक्ता एवं सलिसिटर, 2011 में श्री आशीष दीप वर्मा द्वारा स्थापित, भारत में एक प्रतिष्ठित विधिक फर्म है...
LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
दिल्ली, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

दिल्ली, इंडिया में साहसिक पूंजी कानून के बारे में

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में स्टार्टअप और निवेश के लिए साहसिक पूंजी एक फलता-फूलता क्षेत्र बन गया है।

इस क्षेत्र में फंड-मैनेजर्स को SEBI के अधीन वैधानिक ढांचे के अनुरूप संचालित होना होता है, खासकर Alternative Investment Funds (AIF) के नियमों के अनुसार।

SEBI (Alternative Investment Funds) Regulations, 2012 विनियमन इन्वेस्टर्स-फंड को एक सुरक्षित और पेशेवर वातावरण प्रदान करते हैं.

मुख्य बात यह है कि दिल्ली के बाहर भी केंद्रीकृत कानून लागू होते हैं, पर Delhi निवासी स्टार्टअप और फंड-मैनेजर्स को इन नियमों का सही अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए ताकि पूंजी तक पहुँच आसान और चिंता-रहित हो सके।

“AIF Regulations provide the regulatory framework for Category I and II funds including venture capital funds.”

दिल्ली के वकील-सलाहकारों की भूमिका यहां काफी अहम रहती है, क्योंकि कंपनियों के संस्थापन, फंड रजिस्ट्रेशन, और विदेशी निवेश के नियम अक्सर जटिल होते हैं।

आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • दिल्ली-आधारित फंड बनाम SEBI रजिस्ट्रेशन - एक Category I AIF या VCF के लिए संरचना, पूंजी व्यवस्था और फंड मैनेजर नियुक्ति के लिए क़ायदे चाहिए।

    उदाहरण: दिल्ली-एनसीआर के एक स्टार्टअप-इन्वेस्टमेंट फंड को SEBI के साथ पंजीकृत करवाने के लिए अर्हता-सम्बन्धी दस्तावेज, NOC और कंफैक्शन चाहिये।

  • विदेशी निवेश (FDI) के साथ Delhi स्टार्टअप फंडिंग - विदेशी निवेश के लिए FEMA नीति के अनुरूप मंजूरी, automatic route या prescribed route की पहचान आवश्यक है।

    उदाहरण: दिल्ली स्थित स्टार्टअप में विदेशी VC का निवेश, FDI रिटर्न-ड्रॉ़ सपोर्ट और लाइन-ऑफ-कायदा के अनुसार लागू हो सकता है।

  • टीम-शिट और कॉन्वर्टिबल डेरिवेटिव्स की negociación - टर्म शीट, शेयर-इश्यू, प्रेफरेंशियल ऑलोटमेंट आदि पर वैधानिक मार्गदर्शन चाहिए।

    उदाहरण: Delhi स्टार्टअप Series A के लिए प्रेफरेंशियल शेयर की कीमत तय करते समय SAIF/convertible नोट्स के नियम समझना जरूरी है।

  • ESOP नीति और कॉरपोरेट गवर्नेंस - दिल्ली निगमों में ESOP और गवर्नेंस की हलचल पर कानून-संगत अनुपालन आवश्यक है।

    उदाहरण: Delhi-based इकाइयों में ESOP प्लान बनाते समय कर-लाभ और दाखिले के नियम स्पष्ट करने होते हैं।

  • exit-रणनीतियाँ और M&A - exit के लिए डीडिंग, due diligence, और कॉन्ट्रैक्ट-रेडीनेस पर वकील चाहिए।

    उदाहरण: दिल्ली-आधारित यूनिट का acquisition या IPO के लिए वैधानिक रिकॉर्ड और स्टॅण्डर्ड डॉक्यूमेंट तैयार करना आवश्यक है।

  • टैक्स और अनुपालन नीति - AIF Category I/II की पास-थ्रू टैक्सेशन, डीडी-राइट्स और टैक्स सेविंग्स समझनी होती हैं।

    उदाहरण: आयकर व्यवस्था में 115UB के अंतर्गत AIF-आय का पैस-थ्रू प्रभाव दिल्ली-आधारित फंड के लिए कितना लाभदायक है, यह देखने योग्य है।

स्थानीय कानून अवलोकन

  • SEBI (Alternative Investment Funds) Regulations, 2012 - भारत में AIF के संचालन के लिए मुख्य नियामक ढांचा। Category I और II फंड्स पर नियम लागू होते हैं।

    दिल्ली-आधारित फंड के लिए यह नियम मार्गदर्शक है, खासकर फंड-मैनेजर नियुक्ति, फंड-ऑपरेशन और निवेशकों की सुरक्षा के लिए।

  • Foreign Exchange Management Act, 1999 (FEMA) एवं RBI नीति - विदेशी निवेश का प्रवर्तन और मार्गदर्शन। Delhi-आधारित स्टार्टअप को विदेशी फंडिंग के समय NOC, मूल्य-निर्धारण और रेमिटेंस नियमों का पालन करना पड़ता है।

    FDI के automatic बनाम approval routes के नियमन Delhi के व्यवसाय-निर्देशा के अनुसार लागू होता है।

  • Companies Act, 2013 और संबंधित नियम - कॉर्पोरेट संरचना, शेयर-आयोजन, बोर्ड-गवर्नेंस और रिकॉर्ड-कीपिंग के मानक।

    दिल्ली-स्थित कंपनियाँ इन नियमों के अनुरूप पंजीकरण, AGM-डायरेक्टर्स और वित्तीय विवरण प्रस्तुत करेंगी।

  • आयकर अधिनियम, 1961 - Section 115UB और pass-through टैक्सेशन - AIF Category I और II के लिए निवेशकों पर पास-थ्रू टैक्सेशन का प्रावधान।

    Delhi-आधारित फंडों के लिए निवेशक-स्तर पर टैक्स-लाभ स्पष्ट रहते हैं, लेकिन संरचना-निर्भर विवरण कानून-गाइडेंस लेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साहसिक पूंजी क्या है?

साहसिक पूंजी एक ऐसी पूंजी संरचना है जो स्टार्टअप और छोटे व्यवसायों में निवेश करती है। यह फंड-मैनेजर के माध्यम से संचालित होता है और लाभ-हानि शेयरिंग के नियमों के भीतर काम करता है।

क्या साहसिक पूंजी फंड SEBI के अधीन आते हैं?

हाँ, भारतीय नियमों के अनुसार AIF Regulations के अंतर्गत आते हैं, जिसमें Category I और II फंड शामिल हैं।

दिल्ली में फंड शुरू करने के लिए मुझे किसकी जरूरत है?

कानूनी सलाहकार, कॉपी-लिग्न और SEBI पंजीकरण के लिए अनुभवयुक्त वकील की आवश्यकता होती है।

SEBI रजिस्ट्रेशन के लिए फॉर्म-नॉमिनेशन कैसे होते हैं?

रोस्टर-के-पंजीकरण, फंड मैनेजर-के-डॉक्यूमेंट्स, पूंजी संरचना और निवेशक-गाइडेंस से सम्बंधित कागजात चाहिए।

विदेशी निवेश Delhi स्टार्टअप में कैसे आता है?

FDI policy के अनुसार approval route या automatic route हो सकता है। फॉर्म-फाइलिंग, valuation और pricing नियमों का पालन जरूरी है।

AIF Category I और II में टैक्स कैसे होता है?

इन फंडों के निवेशक के स्तर पर पास-थ्रू टैक्सेशन संभव है, पर फंड-स्तर पर पूरी संरचना से जुड़ी टैक्स नीतियाँ लागू होती हैं।

दिल्ली में ESOP कैसे काम करता है?

ESOP योजना के लिए स्थानीय स्टैक्चर्ड कम्पनी कानून और आयकर नियमों का अनुपालन आवश्यक है।

Term sheet और कॉन्वर्टिबल डि-नोट्स Delhi में कैसे नियंत्रित होते हैं?

कॉन्वर्टिबल डेरिवेटिव्स के मूल्यांकन, इश्यू और शेयर-होल्डिंग पर स्पष्ट शर्तें होनी चाहिए।

exit विकल्प क्या हैं?

खरीद, IPO या secondary sale Delhi-आधारित फंड और स्टार्टअप के लिए सामान्य exit मार्ग हैं।

कानूनी अनुपालन में देरी से क्या नुकसान हो सकता है?

अनुपालन में देरी से जुर्माने, पेनल्टी या निवेश की प्रक्रिया में देरी हो सकती है।

दिल्ली निवासियों के लिए व्यावहारिक सलाह क्या है?

स्थानीय कानून-विशेषज्ञ से प्रारम्भिक 상담 लें, फंड-निर्माण और FDI की संरचना स्पष्ट करें, और KYC/AML नियमों का पालन रखें।

एक वकील के साथ engagement-टर्म कैसे तय करें?

फीस-स्टруктचर, अनुमानित पैनल-भूमिका, और समय-सीमायें स्पष्ट लिखित रूप में हों।

अतिरिक्त संसाधन

  • IVCA - Indian Private Equity & Venture Capital Association - भारत में VC-PE उद्योग के लिए प्रमुख उद्योग-समिति
  • वेबसाइट: https://ivca.in/

  • Startup India - Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) - स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए सरकारी पहल
  • वेबसाइट: https://www.startupindia.gov.in/

  • TiE Delhi-NCR - दिल्ली-एनसीआर में स्टार्टअप नेटवर्किंग और mentorship
  • वेबसाइट: https://delhi.tie.org/

अगले कदम

  1. अपने उद्देश्य स्पष्ट करें कि आप VC फंड, स्टार्टअप इन्वेस्टमेंट, या FDI मार्गदर्शन चाहते हैं।
  2. दिल्ली-आधारित अनुभव वाले कानून-विभाग के वकील/कंसल्टेंट की सूची बनाएं।
  3. SEBI AIF/FDI/Companies Act सहित आवश्यक नियमावलियों का आकलन करवाएं।
  4. कानूनी टीम से प्रारम्भिक consultation और engagement-terms तय करें।
  5. आवश्यक डॉक्यूमेंट्स‑-कंपनी-रजिस्ट्रेशन, MOA, PPM, term sheets‑-तैयार रखें।
  6. फंड-मैनेजर और निवेशक-वार्ता के लिए due diligence-चेकलिस्ट बनाएं।
  7. एग्रीमेंट और डील-डिलिवरेबल्स को अंतिम रूप दें और Regulatory filings करें।

उद्धरण - आधिकारिक स्रोत

“SEBI के साथ Alternative Investment Funds Regulations निवेशक-तथा फंड के लिए विनियमित वातावरण प्रदान करते हैं।”

Source: SEBI बार-रेगुलेशन पेज

“FDI in India is permitted under automatic route in most sectors, subject to sectoral caps.”

Source: Reserve Bank of India and FEMA policy notices

“Category I and II Alternative Investment Funds are taxed as pass-through vehicles for investors under relevant tax provisions.”

Source: Income Tax Department guidelines

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