दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ अन्यायपूर्ण मृत्यु वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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दिल्ली, भारत

2016 में स्थापित
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
Vidhiśāstras-Advocates & Solicitors
दिल्ली, भारत

2011 में स्थापित
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विधिशास्त्र - अधिवक्ता एवं सलिसिटर, 2011 में श्री आशीष दीप वर्मा द्वारा स्थापित, भारत में एक प्रतिष्ठित विधिक फर्म है...
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Delhi, India में अन्यायपूर्ण मृत्यु कानून के बारे में: Delhi, India में अन्यायपूर्ण मृत्यु कानून का संक्षिप्त अवलोकन

दिल्ली में अन्यायपूर्ण मृत्यु से निपटने के लिए एक अलग एकीकृत कानून नहीं है। वास्तविक न्यायिक उपाय सामान्य भारतीय कानून के दायरे में आते हैं। दायरे में अपराध-नियमन के लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) और नागरिक मुआवजे के लिए द ट्रैफिक-घटना से जुड़ी धाराओं का समावेश रहता है।

304A - Causing death by negligence

304A IPC के अनुसार किसी के द्वारा जानबूझकर या लापरवाही से मौत का कारण बनने पर अपराध माना जाता है। Delhi में यह प्रायः सड़क-दुर्घटना, चिकित्सकीय लापरवाही अथवा अन्य लापरवाह कृत्यों के परिणामस्वरूप लागू होता है।

The Fatal Accidents Act, 1855 provides compensation to dependants of a person killed by the wrongful act of another

The Fatal Accidents Act, 1855 परिवार के उन सदस्यों को मुआवजा देता है जिन्हें दुर्घटना में हुई मौत से नुकसान पहुँचा है। यह कानून दिल्ली-राज्य के नागरिकों के लिए भी लागू है।

महत्वपूर्ण तथ्य - Delhi में मुआवजे के दावे सामान्यतः ट्रिब्यूनल या अदालत के समक्ष दायर होते हैं; कानूनिक उपचार का चयन दुर्घटना के प्रकार पर निर्भर होता है।

166(1) - Right to compensation for death or bodily injury

Motor Vehicles Act, 1988 के अंतर्गत दुर्घटना की स्थिति में मुआवजा पाने का अधिकार दिया गया है। Delhi में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में इंश्योरर, मालिक और चालक के विरुद्ध दावा किया जा सकता है।

आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: अन्यायपूर्ण मृत्यु कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। Delhi, India से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें

दिल्ली में ऐसे मामलों में विशिष्ट परिदृश्य होते हैं जिनमें कानूनी सहायता आवश्यक हो जाती है। नीचे दिए गए उदाहरण बुनियादी संरचना को स्पष्ट करते हैं, ताकि आप सही मार्ग चुन सकें।

  • सड़क दुर्घटना के कारण हुई मृत्यु: एक दिल्ली-आधारित सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर परिवार को मुआवजे के लिए Motor Vehicles Act के तहत दावा करना पड़ सकता है।
  • चिकित्सा लापरवाही से मृत्यु: अस्पताल में उपचार-लापरवाही से मृत्यु होने पर 304A IPC के अंतर्गत आरोप-प्रत्य्यारोप और Fatal Accidents Act के दावे दोनों उभर सकते हैं।
  • निर्माण या फैक्ट्री दुर्घटना से मौत: दिल्ली के निर्माण स्थल या फैक्ट्री में दुर्घटना से मृत्यु पर परिवार को मुआवजे व राहत मिल सकती है; निजी उत्तरदायित्व व ट्रिब्यूनल के फैसले लागू होते हैं।
  • जागरूकता की कमी से सुरक्षा-घटना: सार्वजनिक स्थान पर विद्युत शॉर्ट-डायनास्टिक, गोदाम-गिरावट आदि घटनाओं में मुआवजे के दावे जुड़ते हैं।
  • क्रिमिनल आक्रमण या हत्या: अधिकारिक धाराओं के अनुसार यह अपराध है और साथ ही परिवार के भविष्य के लिए civil-एक्शन और दावा भी संभव है।
  • मृत्यु के लिए कानूनी दस्तावेज़ीकरण में देरी: विकट फॉर्म-फाइलिंग प्रक्रियाओं, प्रमाण-पत्रों और ठोस साक्ष्यों के संकलन की आवश्यकता हो सकती है; इस स्थिति में वकील की सलाह अनिवार्य है।

स्थानीय कानून अवलोकन: Delhi, India में अन्यायपूर्ण मृत्यु को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें

Delhi में निम्न कानूनों का प्रमुख स्थान है जो अन्यायपूर्ण मृत्यु के मामलों में दायित्व, मुआवजा और अपराध-नियम को नियंत्रित करते हैं।

  • The Indian Penal Code, 1860 - 304A के अंतर्गत मौत के लिए लापरवाही का अपराध स्थापित करता है, जिसमें दुर्घटना के कारण मृत्यु होती है।
  • The Fatal Accidents Act, 1855 - मृतक के dependants को मुआवजे का अधिकार देता है।
  • The Motor Vehicles Act, 1988 - सड़क दुर्घटनाओं में मुआवजे के नियम स्थापित करता है; 166 और related sections के अंतर्गत दावा दायर किया जाता है।

दिल्ली कोर्ट-प्रसंग में इन कानूनों के साथ स्थानीय प्रक्रियागत नियम भी लागू होते हैं; यदि मृत्यु किसी मानव-वृद्धि, चिकित्सा-घटना या यातायात दुर्घटना से जुड़ी हो, तो अदालत-श्रेणी के निर्णय आवश्यक होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: 10-12 प्रश्न-उत्तर

अंततः अन्यायपूर्ण मृत्यु क्या है?

यह ऐसी मृत्यु है जो किसी के लापरवाही या गलत आचरण के कारण होती है। Delhi में इसे अक्सर IPC 304A के दायरे में देखा जाता है और civil-claim के लिए Fatal Accidents Act का उपयोग किया जाता है।

Delhi में न्याय पाने के लिए कौन से कानून लागू होते हैं?

सबसे सामान्य तीन कानून हैं: IPC की धारा 304A, The Fatal Accidents Act 1855 और The Motor Vehicles Act 1988। हर मामले के तथ्य के अनुसार इन तीनों के बीच उचित मिश्रण तय होता है।

मैं किनको अदालत में दावा कर सकता/सकती हूँ?

न्यायिक सहायता के अंतर्गत मृतक के dependants, spouse, children और अन्य निर्भर लोग मुआवजे के दावे की पात्रता रखते हैं। कानून-निर्भरता के आधार पर दावा निर्णय होता है।

कौन सा दावा पहले दायर किया जा सकता है?

यदि दुर्घटना सड़क-घटना से जुड़ी है तो मोटर वाहन अधिनियम के तहत दावे पहले दायर हो सकते हैं, फिर Fatal Accidents Act के दावे की गहराई बढ़ सकती है।

कानूनी सहायता कहाँ से मिल सकती है?

Delhi-शासित क्षेत्रों में DSLSA और NALSA जैसी सरकारी संस्थाओं से मुफ्त या सस्ते कानूनी सहायता मिल सकती है।

दावे के लिए समय-सीमा क्या है?

मामलों की समय-सीमा प्रकृति के अनुसार भिन्न होती है; सामान्यतः मोटर वाहन दुर्घटना के दावे 2 साल तक चले सकते हैं, जबकिFatal Accidents Act के लिए भी कई बार इसी प्रकार की समय-सीमा रहती है।

मेरे पक्ष के लिए कौन सा प्रमाण आवश्यक होगा?

घटना का प्रमाण-चिह्न जैसे FIR, मेडिकल-रिकॉर्ड, death certificate, डिपेंडेंट्स की आय-घोषणा, प्रमाण-पत्र आदि आवश्यक होते हैं।

किस प्रकार का मुआवजा मिल सकता है?

मुआवजे में जीवन-आश्रय, रोटी-रोटी के नुकसान, चिकित्सा खर्च, शारीरिक-हानि तथा अन्य आर्थिक नुकसान शामिल हो सकते हैं।

क्या एक साथ क्रिमिनल और सिविल केस चल सकता है?

हाँ, अक्सर एक ही दुर्घटना के लिए/crime के तहत अभियोजन और civil-claim दोनों एक साथ चलते हैं।

कानूनी सहायता प्राप्त करते समय किन बातों का ध्यान रखें?

कानून-एजेंट के अनुभव, विशेष क्षेत्र-ज्ञान, Delhi-राज्य के नियमों की समझ और शुल्क संरचना को स्पष्ट करें।

क्या मैं अपने मामले के लिए विशेषज्ञ वकील चुन सकता/सकती हूँ?

हाँ, जो मोटर दुर्घटना या चिकित्सा-लापरवाही के मामलों में विशेषज्ञ हो, उसे चुनना लाभदायक रहता है।

क्या दिल्ली में न्याय के लिए अदालतें अलग हैं?

दिल्ली न्यायिक प्रकरण अधिकतर दिल्ली उच्च न्यायालय और जिला अदालतों के क्षेत्राधिकार में आते हैं; यह मंच नियम-निर्भर है।

कब मैं उच्च न्यायालय जा सकता/सकती हूँ?

जब जिला न्यायालय के निर्णय से असंतुष्टि हो या दायरे की आवश्यकता हो, तब appellate remedies के तहत उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।

क्या मुआवजा गैर-आर्थिक नुकसान के लिए भी हो सकता है?

जी हाँ, कुछ मामलों में व्यक्ति की मानसिक पीड़ा, जीवन शैली में कमी आदि गैर-आर्थिक नुकसान भी मुआवजे में शामिल हो सकते हैं।

अतिरिक्त संसाधन: अन्यायपूर्ण मृत्यु से संबंधित 3 विशिष्ट संगठनों की सूची

  • National Legal Services Authority (NALSA) - मुफ्त कानूनी सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करता है; official site: https://nalsa.gov.in/
  • Delhi State Legal Services Authority (DSLSA) - दिल्ली में कानूनी सहायता और सलाह सेवाएं प्रदान करता है; official site: https://dslsa.org/
  • National Human Rights Commission (NHRC) - मानवाधिकार से जुड़े मामलों में सहायता और शिकायत-निवारण केंद्र; official site: https://nhrc.nic.in/

अगले कदम: अन्यायपूर्ण मृत्यु वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपने मामले के प्रकार स्पष्ट करें - सड़क दुर्घटना, चिकित्सा लापरवाही या अन्य कारण।
  2. Delhi-आधारित वकील की तलाश करें जो मोटर दुर्घटना अधिनियम, Fatal Accidents Act और IPC में अनुभव रखते हों।
  3. सिफारिशों के लिए DSLSA, NALSA, NHRC आदि के संपर्क उपयोग करें।
  4. पहली相談 में पेशेवर अनुभव, सफलता-की-स्थिति और फीस संरचना स्पष्ट करें।
  5. पूर्व-केस-नमुने और क्लाइंट-फीडबैक की समीक्षा करें।
  6. कानूनी रणनीति के बारे में स्पष्ट लिखित योजना प्राप्त करें।
  7. नीति-तत्व और टाइमलाइन पर सहमत होने के बाद अनुबंध पर हस्ताक्षर करें।

आधिकारिक स्रोत संदर्भ: The Indian Penal Code, 1860, The Fatal Accidents Act, 1855, The Motor Vehicles Act, 1988, India Code.

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