दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ दिवाला एवं ऋण वकील
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भारत दिवाला एवं ऋण वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें दिवाला एवं ऋण के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.
- ऋण
- वर्तमान में मैं कई असुरक्षित ऋणों में फंसा हुआ हूँ। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण मैंने अपनी नौकरी और सभी संपत्तियाँ खो दी हैं। क्या मुझे व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए जाना चाहिए?
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वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा
प्रत्यक्ष तथ्यों के आधार पर यह समझाया गया है कि वर्तमान में भारत में व्यक्तिगत दिवालियापन पर इनसॉल्वेंसी एंड बैंकक्रप्सी कोड (IBC) लागू नहीं होता क्योंकि सामान्य व्यक्तियों से संबंधित प्रावधानों को अभी तक सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया...
पूरा उत्तर पढ़ें - सर, मुझे अपने ग्राहक पार्टी से भुगतान लेना है और वह भुगतान नहीं कर रहा है।
- सर, मैं वस्त्र व्यापार कर रहा हूँ और मैंने अपनी पार्टी को 4,12,536/00 रुपये मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है। मेरा ग्राहक भुगतान नहीं कर रहा है, जबकि वह वित्तीय रूप से सक्षम है।
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वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा
दिए गए तथ्यों के आधार पर, मेरा परिपक्व मत है कि आपने अपनी वस्त्र व्यापार की सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत अपने ग्राहक को ₹4,12,536 मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है, माल उचित रूप से डिलीवर और स्वीकृत हो चुका है,...
पूरा उत्तर पढ़ें
Delhi, India में दिवाला एवं ऋण कानून के बारे में
दिल्ली में दिवाला एवं ऋण कानून मुख्य रूप से Insolvency and Bankruptcy Code 2016 (IBC) और ऋण-संबंधी अन्य केंद्रीय कानूनों के तहत संचालित होता है। इन मामलों में अदालती प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर के पदचिह्न के साथ Delhi Bench-NCLT और DRT के साथ निपटती है।
IBC का उद्देश्य समय-सीमित पुनर्गठन या परिसमापन के जरिये परिसम्पत्ति मूल्य अधिकतम करना है और सभी क्रेडिटर के हितों की सुरक्षा करना है।
“The Insolvency and Bankruptcy Code 2016 consolidates and amends the law relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time-bound manner for maximization of value of assets.”
“The CIRP shall be completed within 180 days from the date of admission, with possible extensions subject to certain approvals and conditions.”
“IBBI guidelines emphasize timely and efficient resolution processes to protect creditors’ interests and maximize asset value.”
आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
दिल्ली में दिवाला एवं ऋण मामलों में कानूनी प्रतिनिधित्व अनिवार्य या बेहद लाभकारी हो सकता है। नीचे Delhi-आधारित वास्तविक-सीधे परिदृश्यों से समझिए कि कब एक अनुभवी advokat से मदद चाहिए।
- दिल्ली-स्थित एक लघु-उद्यमी का बैंक ऋण नहीं चुक पाने पर CIRP या ऋण पुनर्गठन का चयन करने की स्थिति।
- एक व्यक्ति के कई उधारदाताओं के साथ अलग-अलग ऋणों के कारण ऋण-समझौते या ऋण-निपटान करने की आवश्यकता।
- किसी पर्मुख गारंटर के रूप में Delhi में ऋण के कारण मुकदमे/DRT में प्रतिरक्षण या परिसमापन-प्रतिरोध की ज़रूरत।
- DRT या NCLT के माध्यम से ऋण-उद्धार, परिसमापन या ऋण-समझौता की प्रक्रिया Delhi में शुरू करनी हो।
- ग्राहक-संरक्षित ऋण (SARFAESI/Debt Recovery) के विरुद्ध Delhi-आधारित याचिका/अपील फाइल करनी हो।
- एक Delhi-आधारित स्टार्टअप के लिए निवेशकों के ऋण-फेसेस और पुनर्गठन के लिए कानूनी मार्ग तय करना हो।
इन परिदृश्यों में एक अनुभवशील वकील आपकी स्थिति का सही प्रकार से आकलन कर सकता है, सही अदालत-प्रक्रिया चुन सकता है, और आवश्यक दस्तावेज़ों की सूची बनाकर प्रक्रिया को समय पर आगे बढ़ा सकता है।
स्थानीय कानून अवलोकन
- Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - कॉरपोरेट पर्सन, पार्टनरशिप फर्म और व्यक्तिगत इन्सॉल्वेंसी के रीकॉन्फिगरेशन, रेसोल्यूशन और परिसमापन के लिए एक समय-सीमित ढांचा देता है।
- Recovery of Debts due to Banks and Financial Institutions Act, 1993 (RDDBFI Act) - बैंकों और वित्तीय संस्थाओं द्वारा ऋण-वसूली के लिए निर्धारित कानून है; Delhi में DRT-DRT benches इस प्रक्रिया को संभालते हैं।
- Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI Act) - secured assets के एकत्रीकरण, पुन:कष्टन और सुरक्षा हित के प्रवर्तन के लिए प्रयोज्य है; Delhi में ऋण-उद्धार के लिए सुरक्षा-हित का त्वरित प्रवर्तन संभव बनाता है।
Delhi में NCLT (National Company Law Tribunal) और DRT (Debt Recovery Tribunal) की Delhi Bench मामलों का निर्णयन करते हैं। इन संस्थाओं के निर्णय Delhi-आधारित व्यवसायों और नागरिकों के लिए निर्णायक बनते हैं।
आमतौर पर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिवाला क्या है और मैं कब दावा कर सकता/सकती हूँ?
दिवाला एक कानूनी प्रक्रिया है जिसमें ऋणदाता-समूह के साथ मिलकर समस्या-समाधान किया जाता है। व्यक्तिगत, पार्टनरशिप या कॉरपोरेट संस्थाओं के लिए विकल्प मिलते हैं। सही समय पर कानूनी सलाह जरूरी है ताकि नुकसान कम हो और परिसमापन-समय सीमा से बचा जा सके।
IBC के तहत CIRP क्या है और मैं इसे Delhi में कैसे शुरू कर सकता/सकती हूँ?
CIRP Insolvency Resolution Process है; यह 180 दिनों के भीतर पूरा करना लक्ष्य है और दिल्ली में NCLT के न्यायिक प्रावधानों के तहत संचालित होता है। प्रक्रिया अधिकतम मूल्य पर क्रेडिटर-हित सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित है।
क्या केवल कंपनियाँ दिवाला में जा सकती हैं?
नहीं, IBC व्यक्तिगत व्यक्तियों, भागीदारी फर्मों और कॉरपोरेट संस्थाओं पर भी लागू होता है। Delhi resident individuals के लिए भी CIRP और व्यक्तिगत दिवाला प्रावधान उपलब्ध हैं।
दिल्ली में व्यक्तिगत दिवाला संभव है या नहीं?
हाँ, IBC के अंतर्गत व्यक्तिगत दिवाला के विकल्प हैं, जिसमें व्यक्तिगत ऋण-समझौता और CIRP के साथ जुड़ी प्रक्रियाएँ शामिल हो सकती हैं। अनुभवी वकील ही उपयुक्त मार्ग तय कर सकते हैं।
DRT और NCLT में कैसे अंतर है?
DRT ऋण-वसूली से जुड़ी कट्टर प्रक्रियाओं पर केंद्रित है, खासकर बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के लिए। NCLT परिसमापन, पुनर्गठन और कंपनियों से जुड़े मामलों की प्रमुख अदालत है, जिसमें IBC के अंतर्गत फैसले होते हैं।
कौन से दस्तावेज़ जरूरी होते हैं?
आमतौर पर ऋण विवरण, बैंक स्टेटमेंट्स, ऋण-सम्पर्की अनुबंध, पात्र क्रेडिटर्स की लिस्ट, करंट पंजीकरण और पहचान-प्रमाण आदि जमा करने होते हैं। Delhi के कोर्ट-फॉर्मेट के अनुसार अतिरिक्त फॉर्म्स की जरूरत पड़ सकती है।
क्या मैं प्रक्रिया शुरू करने से पहले settle कर सकता/सकती हूँ?
हाँ, 90 प्रतिशत वित्तीय क्रेडिटर्स से सहमति के साथ कुछ स्थितियों में प्रक्रिया रोकी जा सकती है; यह अधिकतर समय-सीमा के भीतर समझौते के लिए प्रासंगिक है।
क्या IBC में खत्म करने के लिए फीस लगती है?
हाँ, CIRP में पारिश्रमिक और अदालत-शुल्क, कानूनी शुल्क आदि लगते हैं। Delhi-आधारित केस के अनुसार शुल्क-स्तर भिन्न होते हैं।
कौन-सी स्थितियाँ प्रक्रिया में देरी कर सकती हैं?
क्रेडिटर्स-सीओसी की प्रतिक्रिया समय, अनुपयुक्त दस्तावेज, और अदालत के क्रमिक आदेश देरी का कारण बनते हैं।
क्या दिल्ली में कानून-आशय परिवर्तन हाल के वर्षों में हुए हैं?
हाँ, IBC और संबंधित कानूनों में कई संशोधन हुए हैं ताकि समय-सीमा, क्रेडिटर-हिस्सेदारी और व्यक्तिगत दिवालियापन के नियम स्पष्ट हों।
मैं Delhi से किसी अनुभवी वकील को कैसे ढूंढूं?
नीचे 6 सरल कदम आपको सही विशेषज्ञ तक पहुंचाने में मदद करेंगे।
क्या मैं एक से अधिक वकील हायर कर सकता/सकती हूँ?
ऐसी स्थिति में आम तौर पर एक मुख्य कानूनी सलाहकार पर्याप्त होता है, परन्तु विशिष्ट दस्तावेज़-समझौते या अन्य कानूनी तंत्र के लिए एक सहयोगी एडवोकेट सहायक हो सकता है।
अतिरिक्त संसाधन
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - आधिकारिक नियामक और मार्गदर्शक साइट: https://www.ibbi.gov.in/
- National Company Law Tribunal (NCLT) - Delhi Bench - NCLT के निर्णय और Delhi Bench के बारे में जानकारी: https://nclt.gov.in/
- Bar Council of Delhi (BCD) / बार काउंसिल ऑफ दिल्ली - स्थानीय वकील दर्जों और मार्गदर्शन के लिए: https://bardelhi.org
अगले कदम
- अपनी ऋण स्थिति का स्पष्ट सार तैयार करें-कौन-से क्रेडिटर्स हैं, बकाया राशि कितनी है, ब्याज दर क्या है।
- दिल्ली-आधारित IBC विशेषज्ञ वकील/कानूनी सलाहकार के साथ प्राथमिक कॉनसल्टेशन बुक करें।
- कौन-सी प्रक्रिया (IBC CIRP, DRT, SARFAESI आदि) उपयुक्त है, इसे स्पष्ट करें और समय-सीमा समझें।
- जरूरत हो तो दस्तावेज़ एकत्र करें-ऋण अनुबंध, बैंक स्टेटमेंट, आय-जातीय प्रमाण-पत्र आदि।
- फीस संरचना, भुगतान-रचना और अपेक्षित समय-सीमा पर लिखित स्पष्ट समझौता लें।
- दिल्ली केन्द्रित अदालत-फिसलन और फॉर्मेट के अनुरूप आवेदन-परामर्श तैयार करवाएं।
- प्रक्रिया शुरू होने पर नियमित फॉलो-अप और स्थिति-समीक्षा के लिए कानूनी प्रतिनिधि से संपर्क में रहें।
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