मुंबई में सर्वश्रेष्ठ बाल हिरासत वकील

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पारिवारिक वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड

Payne & Associates
मुंबई, भारत

2009 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
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अबाउटहम स्वयं को एक कानूनी फर्म के रूप में परिचित कराने का अवसर लेते हैं, जो सभी प्रकार के सिविल और आपराधिक मामलों...
INDIAN LEGAL
मुंबई, भारत

2000 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
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इंडियन लीगल हेल्प्स मुंबई आधारित एक कानून फर्म है, जिसकी आरंभिका त्रिपाठी एंड एसोसिएट्स द्वारा की गई थी।ILH विदेशी...
Shraddha Dalvi
मुंबई, भारत

2009 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
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2009 से पारिवारिक न्यायालय में अभ्यास करते हुए, मेरा विशेषकरण नागरिक कानूनों, पारिवारिक कानून जिसमें हिंदू कानून,...

2000 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
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हमारे बारे मेंयूआर लीगल (अंतर्राष्ट्रीय लॉ फर्म) एडवोकेट्स एवं सॉलिसिटर्स विभिन्न विधिक क्षेत्रों में विशेषज्ञ...
Borkar & Company Advocates High Court
मुंबई, भारत

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बोरकर एंड कंपनी एडवोकेट्स हाई कोर्ट एक मुंबई स्थित लॉ फर्म है जिसका चार पीढ़ियों से समृद्ध विरासत है। इस फर्म की...
मुंबई, भारत

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LEX SCRIPTA LLP भारत में तेजी से विस्तार कर रहे पूर्ण-सेवा साझेदारी विधि फर्म है, जो व्यक्तियों से लेकर कॉर्पोरेट संस्थाओं...
LEXWORK
मुंबई, भारत

2000 में स्थापित
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LEXWORK मुंबई, भारत में स्थित एक प्रतिष्ठित पूर्ण-सेवा विधिक फर्म है, जो विविध क्षेत्रों में व्यापक कानूनी विशेषज्ञता...
Lawcrust Legal Consulting Services
मुंबई, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 70 लोग
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LawCrust Global Consulting Ltd. is headquartered in Mumbai and operates as a global legal consulting and hybrid advisory firm. It began its journey in 2016 under a different name, was rebranded as LawCrust in 2018, and became a public limited company in 2023. The firm integrates legal consulting...
Legal Arrow LLP
मुंबई, भारत

2020 में स्थापित
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लीगल एरो एलएलपी भारत में एक गतिशील फुल-सरविस लॉ फर्म है, जो विविध अभ्यास क्षेत्रों में व्यापक कानूनी समाधान...
जैसा कि देखा गया

1. मुंबई, भारत में बाल हिरासत कानून के बारे में: एक संक्षिप्त अवलोकन

मुंबई में बाल हिरासत का हक-निर्णय भारतीय कानून के प्रमुख ढांचे के अंतर्गत होता है। मुख्य कानून \"गार्डियंस एंड वार्ड्स एक्ट, 1890\" और हिन्दू मिनॉरिटी एंड गार्डियंशिप एक्ट, 1956 जैसे प्रावधान हैं। इन नियमों के आधार पर फैमिली कोर्ट में custody, care-guardianship और maintenance के मुद्दों का निर्णय होता है।

सबसे अहम सिद्धांत है बच्चे के सर्वोत्तम हित का संरक्षण, जिसे न्याय प्रक्रिया में प्रमुख माना जाता है। अदालतें अधिकांशतः माता-पिता के बीच साझा custody के पक्ष में भी निर्णय देती हैं, खासकर तब जब दोनों पक्ष बच्चे के लिए बेहतर वातावरण दे सकें।

official source: संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कन्वेशन के अनुच्छेद 3 के अनुसार “In all actions concerning children, the best interests of the child shall be a primary consideration.”

नोट: मुंबई स्थित फैमिली कोर्ट्स और जिला अदालतें इस प्रकार के मामलों में स्थानीय कानूनों के साथ राज्य के नियमों का पालन करती हैं। सही मार्गदर्शन के लिए स्थानीय एडवोकेट से मिलना आवश्यक होता है।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

बाल हिरासत के मामले जटिल होते हैं और इनमें कानूनी प्रक्रियाओं की सही जानकारी आवश्यक है। नीचे 4-6 विशिष्ट परिस्थितियाँ दी जा रही हैं, जहाँ मुंबई से जुड़े मामलों में कानूनी सलाहकार की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।

  • डायवोर्स के बाद custody के वाद पर मतभेद: तलाक के पश्चात बच्चे की देखरेख किसके पास रहेगी, यह निर्णय स्थानीय फैमिली कोर्ट में होता है।
  • Relocation या बच्चे की मुंबई से बाहर शिफ्टिंग: अगर एक माता पिता बच्चे के साथ बाहर जाने की चाह रखता है, तो विकल्प कैसे तय होंगे, यह जटिल सवाल बन सकता है।
  • डोमेस्टिक विसॉलेंस के संदर्भ में custody का प्रश्न: सुरक्षा और स्थिर वातावरण की आवश्यकता होने पर अदालत क्या निर्णय लेती है।
  • बच्चे के विशेष आवश्यकताओं के अनुसार guardianship: मानसिक या शारीरिक समस्याओं के मामले में उपयुक्त guardian कौन बने, इस पर कानूनी मार्गदर्शन जरूरी है।
  • Grandparents या अन्य परिवार सदस्य की custody का विवाद: parental custody के प्रबल दावे के बीच अन्य रिश्तेदारों के अधिकार का विश्लेषण।
  • हिंडन- या मुस्लिम-आधारित वैवाहिक कानून के संदर्भ में custody की दलीलें: व्यक्तिगत कानूनों के दायरे में custody कैसे तय होती है।

इन सभी स्थितियों में एक सक्षम adviсe, lawyer या legal consultant की सलाह आवश्यक होती है ताकि आपके अधिकार और बच्चे के हित दोनों सुरक्षित रह सकें।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

मुंबई-आधारित custody मामलों में 2-3 विशिष्ट कानून मूल आधार होते हैं:

  1. गार्डियंस एंड वार्ड्स ऐक्ट, 1890: यह कानून Minor के व्यक्ति और संपत्ति दोनों के guardian के बारे में व्यवस्था देता है और अदालत को custody-education-maintenance के आदेश जारी करने की शक्ति देता है।
  2. हिन्दू मिनॉरिटी एंड गार्डियंशिप ऐक्ट, 1956: हिन्दू बच्चों के guardianship के नियम निर्धारित करता है, जिसमें माता-पिता और अन्य कानूनी संरक्षक के अधिकार-संयोजन स्पष्ट होते हैं।
  3. फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984: महाराष्ट्र के मुंबई जिले में फैमिली कोर्ट स्थापित करने के उद्देश्य से बना यह कानून custody, divorce, maintenance आदि मामलों के त्वरित और विशेषज्ञ निपटारे के लिए आधार बनता है।

इन कानूनों के अलावा महाराष्ट्र राज्य के कानूनों के अनुरोध पर फैमिली कोर्ट में स्थानीय निर्देश और प्रक्रियाएं लागू होती हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाल हिरासत क्या है?

बाल हिरासत बच्चे के संरक्षण, देखभाल और सुरक्षा के अधिकार का विषय है। यह निर्णय माता-पिता के बीच साझा संरचना या एक अभिग्रह की देखरेख पर निर्भर कर सकता है।

मुंबई में custody केस किन परिस्थितियों में दायर किया जाता है?

तलाक, विभाजन, maintenance, relocation, या बच्चे की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर custody केस दायर किया जा सकता है।

Best interests of the child का मतलब क्या है?

यह सिद्धांत बताता है कि निर्णय बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित और संतुलित वातावरण बनाने के लक्ष्य से लिया जाए।

क्या custody केवल एक माता पिता के पास हो सकता है?

हां, पर अदालत अक्सर साझा custody या खंडित custody के विकल्प भी देखती है ताकि बच्चे के लिए स्थिरता बनी रहे।

अगर पिता बाहर रहते हैं तो custody कैसे तय होती है?

कानून बच्चे के सुरक्षित वातावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, नियमितता और संपर्क अधिकारों को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है।

ग्रोपिंग-मैथड के बारे में कैसे निर्णय होता है?

कानून के अनुसार अदालत बच्चे के हित को प्राथमिक मानेगी और माता-पिता के व्यवहार, आय, सुरक्षा, और संरक्षण क्षमता को भी देखेगी।

क्या Mumbai के Family Court में custody मामले जल्दी निपटते हैं?

हां, सामान्य तौर पर फैमिली कोर्ट में त्वरित निपटान के प्रयास होते हैं, लेकिन केस की जटिलताओं के अनुसार समय लग सकता है।

क्या एक वकील my case के लिए जरूरी है?

हां, विशेषकर अदालत-प्रक्रिया, दाखिलियों, और गवाह-साक्ष्यों के प्रबंधन के लिए एक अनुभवी adviсe आवश्यक होता है।

custody के लिए किस तरह के दस्तावेज चाहिए होते हैं?

डायवोर्स-डिटेल, बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल-हेल्थ रिकॉर्ड, रहते स्थान के प्रमाण, आय-साक्ष्य आदि सामान्य दस्तावेज होते हैं।

क्या maintenance और custody एक साथ मामला बना सकते हैं?

हां, कई बार maintenance के मुद्दे custody के साथ जुड़े होते हैं और अदालत एक साथ निर्णय दे सकती है।

क्या अदालत घरेलू हिंसा के मामलों में custody बदल सकती है?

यदि Domestic Violence से बच्चे के हित को खतरा हो, अदालत सुरक्षा के साथ custody में बदलाव कर सकती है।

गोपनिय दस्तावेज सुरक्षा कानूनों के अंतर्गत कैसे संरक्षित रहते हैं?

कैसे-कैसे forensics, witness protection और privacy-प्रोटेक्शन सहित निर्देश दिए जाते हैं ताकि बच्चों और परिवार की सुरक्षा बनी रहे।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Commission for Protection of Child Rights (NCPCR) - http://ncpcr.gov.in
  • National Legal Services Authority (NALSA) - https://nalsa.gov.in
  • Maharashtra State Legal Services Authority (MSLSA) - https://mslsa.gov.in

6. अगले कदम

  1. स्थिति का आकलन करें: अपने बच्चे के सर्वोत्तम हित के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें।
  2. डॉक्यूमेंट्स एकत्र करें: जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल रिकॉर्ड, मेडिकल रिकॉर्ड आदि तैयार रखें।
  3. अनुभवी वकील ढूंढें: मुंबई के फेमिली लॉ फोकस्ड advиसे, बार-एशोसिएशन से अनुशंसाओं को देखें।
  4. फैमिली कोर्ट-फॉर्म और प्रक्रिया समझें: दावा दायर करने से पहले प्रारूप और समयसीमा जान लें।
  5. पहला कॉन्सल्टेशन लें: सामान्य प्रश्न, शुल्क, और रणनीति पर बात करें।
  6. क्विक-टैक्टिक्स बनाएं: बच्चे के स्कूल, हेल्थ और सोशल सपोर्ट के इंतजाम पहले से करें।
  7. छात्र-ग्रहण और सुरक्षा: बच्चे की सुरक्षा और निजी जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

अधिक जानकारी के लिए official स्रोतों के पन्ने देखें: NCPCR, NALSA और महाराष्ट्र कानून संसाधन।

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