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Shivam Legal Services
दिल्ली, भारत

2019 में स्थापित
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Vidhiśāstras-Advocates & Solicitors
दिल्ली, भारत

2011 में स्थापित
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विधिशास्त्र - अधिवक्ता एवं सलिसिटर, 2011 में श्री आशीष दीप वर्मा द्वारा स्थापित, भारत में एक प्रतिष्ठित विधिक फर्म है...
LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
दिल्ली, भारत

2016 में स्थापित
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. Delhi, India में Faith-Based Law कानून के बारे में: Delhi, India में Faith-Based Law कानून का संक्षिप्त अवलोकन

Delhi में Faith-Based Law धार्मिक संस्थाओं, ट्रस्ट, एंडॉवमेंट और चैरिटेबल गतिविधियों को नियंत्रित करता है। यह क्षेत्र संविधान के मूल अधिकारों के साथ मिलकर कार्य करता है। स्थानीय नीतियाँ और पंजीकरण-नियमन के लिए दिल्ली सरकार के अधिकारी और केंद्रीय कानून एक साथ प्रभावी होते हैं।

इस क्षेत्र में सबसे मुख्य बेजोड़ तथ्य यह है कि कोई एक विशिष्ट “Faith-Based Law” नहीं है; बल्कि भारतीय संविधान, केंद्रीय अधिनियमों और राज्य-स्तर के निर्देशों का संयोजन काम करता है। Delhi के मामलों में पंजीकरण, आडिट, दान-स्वीकृति तथा ट्रस्ट-एंडॉवमेंट के रख-रखाव के लिए कई प्रावधान लागू रहते हैं।

“Subject to public order, morality and health and to the other provisions of this Part, all persons are equally entitled to freedom of conscience and the right freely to profess, practise and propagate religion.”

स्रोत: संविधान-आर्टिकल 25, Official text लिंक: https://legislative.gov.in/constitution-of-india#Article25

“Subject to public order, morality and health, every religious denomination or any section thereof shall have the right to establish and maintain institutions for religious and charitable purposes; to manage its affairs in matters of religion; and to own and acquire movable and immovable property.”

स्रोत: संविधान-आर्टिकल 26, Official text लिंक: https://legislative.gov.in/constitution-of-india#Article26

“The State shall not deny to any person equality before the law or equal protection of the laws within the territory of India.”

स्रोत: संविधान-आर्टिकल 14, Official text लिंक: https://legislative.gov.in/constitution-of-india#Article14

इन उद्धरणों के जरिए स्पष्ट है कि Faith-Based मामलों में मौलिक अधिकार और कानून-व्यवस्था दोनों की भूमिका है। Delhi निवासियों के लिए यह जरूरी है कि वे इन अधिकारों और दायित्वों को समझकर अपना पथ चुनें।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: Faith-Based Law कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्य

  • परिदृश्य 1 - दिल्ली में धार्मिक ट्रस्ट की स्थापना और पंजीकरण: एक नए मंदिर या मजार ट्रस्ट के लिए पंजीकरण, ट्रस्ट ड deed तय करना और आवश्यक रॉयटेशन-चक्र बनाना जरूरी होता है। इस स्थिति में अधिवक्ता से सही trusteeship, compliance और Tax exemption के रास्ते साफ होते हैं।

  • परिदृश्य 2 - आयकर इनाम और 12A/80G पंजीकरण: चैरिटेबल ट्रस्ट को कर‑छूट प्राप्त करने के लिए 12A और 80G पंजीकरण की जरूरत पड़ती है। विशेषज्ञ वकील अनुपालन समयरेखा, दस्तावेज और ऑडिट-प्रक्रिया सुनिश्चित कर सकता है।

  • परिदृश्य 3 - Foreign Contributions Act (FCRA) अनुपालन: विदेश से दान प्राप्‍त होता है तो FCRA के तहत रिश्वत-रक्षा और लेखांकन आवश्यक होते हैं। Delhi में NGOs के लिए यह एक सामान्य लेकिन जटिल क्षेत्र है।

  • परिदृश्य 4 - वक्फ संपत्ति या दरवारे ट्रस्ट-प्रबंधन विवाद: मुस्लिम ट्रस्ट/वक्फ की संपत्ति, कब्ज़े, ट्रस्ट-निर्वहन में विवाद हो तो उच्च न्यायालय के मार्गदर्शन के बिना समाधान कठिन हो सकता है।

  • परिदृश्य 5 - ट्रस्ट के trustees/management‑structure में संशोधन: ट्रस्ट के संविधान के अनुसार trusteeship में बदलाव, बहुमत के नियम और शासन-नियम की पुनर्संरचना के लिए कानूनी सलाह जरूरी है।

  • परिदृश्य 6 - पंजीकरण, ऑडिट, और आंतरिक ट्रस्ट‑गवर्नेंस के लिए विवाद‑निपटार्इ: ट्रस्ट के खर्चों, दान-रसीदों, और फंड के दुरुपयोग की शिकायतें आती हैं तो कोर्ट‑कानून का सहारा लेना पड़ सकता है।

इन स्थितियों में एक अनुभव‑सम्पन्न advokat, legal advisor या advocate की जरूरत होती है ताकि Delhi‑के कानूनों के अनुरूप सही डॉक्यूमेंटेशन, नीतिगत निर्णय और अदालत‑प्रक्रियाओं को सही तरह से संभाला जा सके।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: Delhi, India में Faith-Based Law को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

  • Indian Trusts Act, 1882: धार्मिक ट्रस्ट भी इसी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण और संचालन के मानक नियमों के अनुसार चलते हैं। Delhi‑में यह सामान्य ढांचा बनता है।

  • Societies Registration Act, 1860: धार्मिक समाजों के पंजीकरण, ब्रह्म-समिति तथा उनके governance‑structure को नियंत्रित करता है। Delhi में सामाजिक-नियमन की प्रमुख धुरी है।

  • Waqf Act, 1954 (विकास/संशोधन के साथ प्रचलित कानून): मुस्लिम waqf ट्रस्ट‑प्रदत्त संपत्ति, मालिकाना हक और नियंत्रण‑बनावट को निर्धारित करता है। Delhi के waqf प्रतिस्पर्धाओं में यह मुख्य कानून है।

  • आयकर अधिनियम, 1961 (धर्मार्थ/चैरिटेबल ट्रस्ट के लिए)- 12A/80G जैसे टैक्स‑अपेक्षित लाभों के लिए आवश्यक पंजीकरण और अनुपालन के नियम यहां से आते हैं।

इन कानूनों के साथ Delhi‑specific निर्देश और पंजीकरण प्रक्रियाएं राज्य‑स्तर पर Charity Commissioner तथा Registrar of Societies के माध्यम से संचालित होती हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

Faith‑Based Law क्या है?

यह ऐसी कानूनी व्यवस्था है जो धार्मिक संस्थाओं, ट्रस्ट, endowments और चैरिटेबल गतिविधियों के पंजीकरण, स्वामित्व‑प्रबंध, आयकर और Außen‑आनुदान आदि को नियंत्रित करती है।

कौन‑सा प्रमुख कानून Delhi में लागू होता है?

Delhi में Indian Trusts Act, 1882, Societies Registration Act, 1860 और Waqf Act, 1954 मुख्य हैं। आयकर कानून के प्रावधान भी लागू होते हैं।

ऐसे ट्रस्ट के लिए ट्रस्ट-डीड कैसे बनवाएं?

एक अनुभवी advokat से ट्रस्ट डीड drafting कराएं जो trustees, उद्देश्य, संपत्ति और governance‑structure स्पष्ट करे। Delhi‑specific पंजीकरण प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।

12A और 80G पंजीकरण क्यों और कैसे आवश्यक है?

ये पंजीकरण टैक्स‑छूट के लिए जरूरी हैं। इसका लाभ लेने के लिए आवेदन और आवश्यक दस्तावेज सत्यापित होने चाहिए।

FCRA अनुपालन कब आवश्यक होता है?

विदेशी दान स्वीकार करने के लिए FCRA पंजीकरण आवश्यक होता है। Delhi‑based NGOs को MHA के नियमों के अनुसार रिपोर्टिंग करनी होती है।

वक्फ संपत्ति के विवाद कैसे सुलझते हैं?

वक्फ संपत्ति के मालिकाना, 관리‑आधिकार और दान‑उपयोग को लेकर उच्च न्यायालय‑स्तर तक मामला जा सकता है। उचित रिकॉर्ड और डाक्यूमेंटेशन मदद करता है।

ट्रस्ट में trustees कब और कैसे बदले जा सकते हैं?

ट्रस्ट डीड के अनुसार संशोधन और बोर्ड‑आधारित निर्णय से trustees बदले जा सकते हैं। आवश्यकतानुसार अदालत से आदेश भी लिया जा सकता है।

ट्रस्ट के खातों की ऑडिट कौन करता है?

अनुदान या दान‑रसीदों के हिसाब से ऑडिट आवश्यक होता है। पंजीकृत ट्रस्ट को ऑडिट‑रिपोर्ट जमा करनी पड़ती है।

Delhi में धार्मिक संस्थाओं के लिए पंजीकरण कैसे शुरू करें?

सबसे पहले ट्रस्ट/संगठन के उद्देश्य, trustees list, address, bank details तैयार करें। फिर Registrar of Societies या Charity Commissioner के पास आवेदन दें।

ट्रस्ट के दस्तावेज़ क्यों जरूरी होते हैं?

दस्तावेज़ सुरक्षा, पंजीकरण और टैक्स‑अनुपालन के लिए आवश्यक हैं। गलत‑दस्तावेज़ से कानूनी जोखिम बढ़ते हैं।

ट्रस्ट की आय और दान का रिकॉर्ड कैसे रखें?

सभी दान‑रसीदें, खर्च‑विवरण और आय‑खर्च का स्पष्ट रिकॉर्ड रखें। नकद transacctions को भी उचित तरीके से दर्ज करें।

किस तरह के दान पर कौन‑से कानून लागू होते हैं?

Chari table donations पर नियम अलग होते हैं-FCRA, 12A/80G, NICRA आदि के अनुसार। दान के प्रकार के अनुसार सही कानून लागू होंगे।

यदि ट्रस्ट कानून का उल्लंघन हो तो क्या करें?

बुरी तरह से संचालन पर शिकायत दर्ज हो सकती है। मामले में अदालतों या Regulatory bodies से सपोर्ट लिया जा सकता है।

5. अतिरिक्त संसाधन: Faith‑Based Law से संबंधित 3 विशिष्ट संगठनों

  • National Legal Services Authority (NALSA) - कानूनी aid और सामाजिक न्याय के संसाधन उपलब्ध कराता है। स्रोत: https://nalsa.gov.in
  • Delhi State Legal Services Authority (DSLSA) - दिल्ली में नि:शुल्क कानूनी सहायता और साक्षात्कार सेवाएं प्रदान करता है। स्रोत: https://www.delhilsa.gov.in
  • Income Tax Department - चैरिटेबल ट्रस्ट्स के लिए 12A/80G आदि टैक्स‑चूट नियमों की जानकारी और फॉर्म‑डाउनलोड्स उपलब्ध होते हैं। स्रोत: https://www.incometaxindia.gov.in

इन संसाधनों से आप कानूनी सहायता, पंजीकरण और अनुपालन के बारे में स्पष्ट मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

6. अगले कदम: Faith-Based Law वकील खोजने के लिए 5‑7 चरणीय प्रक्रिया

  1. आपके क्षेत्र (Delhi) के Faith‑Based Law मामलों में अनुभव वाले advocates की सूची बनाएं।
  2. उनके पिछले केस‑प्रफेशन, सफलता‑दर और क्लाइंट‑फीडबैक चेक करें।
  3. संभावित वकील के साथ पहले‑फेस‑टू‑फेस या ऑनलाइन परामर्श शेड्यूल करें।
  4. कानूनी फीस संरचना, कुल समय‑सीमा और संसाधनों पर क्लियर क्लॉज लें।
  5. अपने ट्रस्ट/योजनाओं के सभी दस्तावेज़ एकत्र रखें ताकि वकील पूरी तैयारी कर सके।
  6. कानून‑समझ के लिए आवश्यक उद्धरण और आधिकारिक स्रोतों की सूची साझा करें।
  7. एक लिखित कार्ययोजना बनाएं जिसमें पंजीकरण, अनुपालन और court‑based steps शामिल हों।

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