भारत में सर्वश्रेष्ठ अभिभावकत्व वकील

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Advocate Rajasekaran M.B.A., M.L.,
तिरुपूर, भारत

2014 में स्थापित
उनकी टीम में 8 लोग
English
एडवोकेट राजसेकरन एम.बी.ए., एम.एल., तिरुपुर, तमिलनाडु में आधारित प्रतिष्ठित कानून फर्म आरजे लॉ अ‍ॅफिलिएट का नेतृत्व...
Gokhale and Associates
मुंबई, भारत

2017 में स्थापित
English
गोकले और एसोसिएट्स, जिसकी स्थापना 2017 में श्री अविनाश गोकले और श्रीमती श्रुति गोकले द्वारा की गई थी, मुंबई, भारत में...
Diligence Law Firm
कोयम्बत्तूर, भारत

English
कोयंबटूर, भारत आधारित डिलिजेंस लॉ फर्म एक पूर्ण-सेवा कानूनी प्रैक्टिस है जिसके पास 12 से अधिक वर्षों का अनुभव है।...
Enlight Juris Law Firm
मुंबई, भारत

English
एन्लाइट जूरिस लॉ फर्म, जिसकी स्थापना 15 अगस्त 2018 को हुई थी, मुंबई में मुख्यालय रखती है और इसके नेतृत्व में अधिवक्ता...
Vector Legal
अहमदाबाद, भारत

English
वेक्टर लीगल अहमदाबाद और भारत के वाणिज्यिक केंद्रों में कार्यालयों के साथ काम करता है, जो कॉर्पोरेट और वाणिज्यिक...
Lahiri & Associates
कोलकाता, भारत

1998 में स्थापित
English
लाहिरी एंड एसोसिएट्स भारत में एक प्रमुख कानूनी फर्म के रूप में प्रतिष्ठित है, जो कई प्रमुख विधिक क्षेत्रों में...
Vidhiśāstras-Advocates & Solicitors
दिल्ली, भारत

2011 में स्थापित
English
विधिशास्त्र - अधिवक्ता एवं सलिसिटर, 2011 में श्री आशीष दीप वर्मा द्वारा स्थापित, भारत में एक प्रतिष्ठित विधिक फर्म है...
ITAG Business Solutions Ltd.
कोलकाता, भारत

2007 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
आईटैग बिज़नेस सॉल्यूशंस लिमिटेड भारत स्थित एक विशिष्ट कानूनी और आईपी परामर्श फ़र्म है, जो उद्योगों और अधिकार...

2015 में स्थापित
English
आर एंड एस कोलकाता लीगल सॉल्यूशन्स भारत में एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म के रूप में खड़ी है, जो सिविल, आपराधिक, पारिवारिक...
जैसा कि देखा गया

भारत अभिभावकत्व वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

हमारे 1 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें अभिभावकत्व के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.

क्या मैं अपनी बेटी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर सकता हूँ, क्योंकि मुझे उसके ठिकाने की जानकारी नहीं है?
परिवार गृह हिंसा अभिभावकत्व परिसर दायित्व संपत्ति क्षति
उसके बारे में मेरे पास कोई जानकारी नहीं है, इसलिए मुझे उसे अपनी बेटी कहना भी मुश्किल हो रहा है। मैंने उसकी पढ़ाई, कॉलेज हॉस्टल और ट्यूशन फीस में लाखों रुपये निवेश किए हैं और उसे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका भेजा था ताकि वह अपना एमएस कर सके। लेकिन...
वकील का उत्तर Aggarwals & Associates द्वारा

हाँ, आप निकटतम पुलिस स्टेशन में घर में घुसपैठ के लिए शिकायत कर सकते हैं। आपके मामले पर विस्तृत चर्चा के लिए आप हमें 8686083333 पर संपर्क कर सकते हैं या [email protected] पर मेल कर सकते हैं।

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1 उत्तर

1. भारत में अभिभावकत्व कानून के बारे में

भारत में अभिभावकत्व कानून बच्चों की सुरक्षा, पालन-पालन और संपत्ति के संरक्षण से जुड़ा है। यह माता-पिता या संरक्षक की भूमिका तथा अदालत की देखरेख निर्धारित करता है।

दो मुख्य ढांचे से संरचना बनती है: Guardians and Wards Act 1890 और Hindu Minority and Guardianship Act 1956। इन कानूनों के जरिये बालक के सही पालन- पोषण और संरक्षण का रास्ता तय होता है।

अतिरिक्त प्रावधान के रूप में Juvenile Justice Act 2015, जिसे 2016 और 2021 में संशोधित किया गया, बच्चों के संरक्षण और संरक्षण- व्यवस्था को मजबूत करता है। यह बच्चों के न्याय-प्रणाली के भीतर सही स्थान सुनिश्चित करता है।

“Guardians and Wards Act 1890 provides for the appointment of guardians and the custody of minors under various circumstances.”

Source: https://legislative.gov.in/

“The Juvenile Justice Act aims to provide care, protection and rehabilitation to children in need of care and protection.”

Source: https://wcd.nic.in/

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • तलाक या विभाजन के बाद बाल-पालन का संरक्षक नियुक्त करने के लिए अदालत से आवेदन चाहिए।
  • बाल संपत्ति के नियंत्रण और संरक्षण में संघर्ष हो, तो अभिभावकत्व व संपत्ति संबंधी आदेश जरूरी होते हैं।
  • पारिवारिक विवाद- समाधान में कानूनी मार्गदर्शन और अनुशंसित सुरक्षा-उपाय महत्वपूर्ण होते हैं।
  • घरेलू हिंसा या सुरक्षात्मक आदेश की स्थिति में बाल-पालन हेतु संरक्षक तय करना पड़ सकता है।
  • आर्थिक अक्षमता या अव्यवस्थित स्थिति में बच्चों की देखरेख के लिए संरक्षक चयन करना पड़ सकता है।
  • संरक्षक-बंधित मामलों में कानूनी प्रक्रिया की जिज्ञासा हेतु अनुभवी अधिवक्ता की जरूरत पड़ती है।

भारत के वास्तविक उदाहरणों में अदालतें संरक्षक-निर्णय, बच्चे की सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए कानूनी मार्गदर्शन देती हैं। हर मामला विशिष्ट होता है और न्यायालय की संतुष्टि आवश्यक है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • Guardians and Wards Act, 1890 - बालक के अभिभावकत्व और संरक्षक के चयन के लिए केंद्रीय विधि- ढांचा।
  • Hindu Minority and Guardianship Act, 1956 - हिंदू बच्चों के लिए Guardian-Child सम्बन्ध और माता-पिता की जिम्मेदारी निर्धारित करता है।
  • Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 - बच्चों की सुरक्षा, देखरेख और पुनर्वास का व्यापक ढांचा; 2016 और 2021 में संशोधित हुआ।

इन कानूनों के साथ परिवार अदालतों की कार्य-प्रणाली और जिला-स्तर पर बनाए गए Family Courts का प्रावधान भी अभिभावकत्व मामलों को तेजी से सुनने में सहायक है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिभावकत्व क्या है?

अभिभावकत्व कानून के अनुसार किसी नाबालिग की देखरेख, सुरक्षा और संपत्ति के संरक्षक की नियुक्ति का अधिकार दिया जाना है। यह अदालत की निगरानी में किया जाता है।

मैं अभिभावकत्व के लिए कैसे आवेदन कर सकता हूँ?

सबसे पहले स्थानीय जिला कोर्ट या परिवार न्यायालय में सिविल पेटीशन डालें। दस्तावेज, माता-पिता की स्थिति और बच्चे की सुरक्षा विवरण जरूरी होंगे।

क्या मात-पिता के रहते भी अभिभावकत्व दिया जा सकता है?

ग़ैर-शारीरिक परिस्थितियों में अदालत द्वारा संरक्षक नियुक्त किया जा सकता है, जैसे माता-पिता असमर्थ हों, अनुपस्थित हों या बाल-हित खतरे में हो।

क्या अभिभावकत्व संपत्ति पर भी लागू होता है?

हाँ, Guardians and Wards Act के तहत संरक्षक बच्चों की संपत्ति की देखभाल कर सकता है, परसी परिपक्व निर्णय लेने के लिए अदालत की अनुमति आवश्यक होती है।

हिंदू बच्चों के लिए कौन से कानून प्रभावी हैं?

Hindu Minority and Guardianship Act 1956 हिंदू बच्चों के लिए संरक्षक-चयन, उत्तरदायित्व और सुरक्षित पालन- पोषण के नियम देता है।

क्या guardianship केवल पिता या माता के लिए है?

नहीं, व relatives भी संरक्षक बन सकते हैं, अगर अदालत मान ले कि बच्चे के हित में यही बेहतर होगा।

देश के कानून के अनुसार उम्र क्या है?

भारत में कानूनी बच्चों की आयु 18 वर्ष तक मानी जाती है; 18 वर्ष से ऊपर होने पर guardianship का प्रभाव घट सकता है।

कौन से समय-सीमा में अदालत निर्णय दे सकती है?

निर्णय गति-प्रक्रिया पर निर्भर है; सामान्यतः मामलों में प्रक्रिया कुछ महीने से एक वर्ष तक हो सकती है, लेकिन युद्धाकाल में विलंब हो सकता है।

क्या अदालत परिसर में स्थानीय वकील पर्याप्त है?

हां, स्थानीय परिवार न्यायालयों में Guardians and Wards Act तथा JJ Act के विशेषज्ञ वकील आवश्यक मार्गदर्शन दे सकते हैं।

क्या संरक्षक के सम्मानित अधिकार होते हैं?

हाँ, संरक्षक बच्चे की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक देखरेख के अधिकार और दायित्व के साथ जिम्मेदार होते हैं।

क्या बच्चों के नाम पर संपत्ति बेच सकते हैं?

अक्सर ऐसा नहीं होता जब तक अदालत की अनुमति और उचित संरक्षक-निर्णय सामने न हो; संपत्ति ट्रांसफर के लिए अदालत आदेश चाहिए।

अभिभावकत्व के लिए कौन से प्रमाण लगेंगे?

आमतौर पर पहचान, निवास प्रमाण, आय- स्रोत, बच्चों के बारे में जानकारी, और अगर आवश्यक हो तो चारित्रिक प्रमाणपत्र लगते हैं।

क्या इंटर-फ्रेम-श्चिमी मामलों में अदालती प्रक्रिया एक जैसी है?

प्रत्येक राज्य में इंटर-स्टेट नियम और जिला-स्तरीय प्रक्रिया भिन्न हो सकती है; त्यामुळे स्थानीय वकील की सलाह आवश्यक है।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Commission for Protection of Child Rights (NCPCR) - बच्चों के अधिकार और संरक्षण पर मार्गदर्शन। https://ncpcr.gov.in/
  • Ministry of Women and Child Development (WCD) - बाल सुरक्षा और कानून- व्यवस्था पर आधिकारिक जानकारी। https://wcd.nic.in/
  • Central Adoption Resource Authority (CARA) - बाल गोद लेने और संरक्षक-सम्बन्धित दिशानिर्देश। https://cara.nic.in/

6. अगले कदम

  1. अपने उद्देश्य स्पष्ट करें: बेटी/बेटे के लिए संरक्षक चाहिए या संपत्ति- संरक्षक।
  2. अपना दस्तावेज़ीकरण तैयार रखें: जन्म प्रमाण, पहचान-प्रमाण, निवास प्रमाण आदि।
  3. कानूनी परामर्श के लिए स्थानीय परिवार न्यायालय या बार-एजेंसी से वकील खोजें।
  4. समीक्षात्मक मुलाकात में केस-आधार और संभावित परिणाम समझें।
  5. कानून के अनुसार चयनित अधिकार- दायित्व समझें और प्रश्न पूछें।
  6. यदि आवश्यक हो तो पहले निपटान-समझौते का प्रयास करें और फिर अदालत में पेटीशन दें।
  7. अपनी निर्णय-योजना के साथ पूर्ण रूप से तैयारी रखें और समय-सीमा का पालन करें।

स्रोत उद्धरण और आधिकारिक लिंक

भारत में अभिभावकत्व कानून के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए ये आधिकारिक स्रोत देखें:

  • Guardians and Wards Act, 1890 - आधिकारिक कानून-स्रोत और पाठ: https://legislative.gov.in/
  • Hindu Minority and Guardianship Act, 1956 - आधिकारिक संहिता-विवरण: https://legislative.gov.in/
  • Juvenile Justice Act, 2015 - अधिनियम और संशोधनों की जानकारी: https://wcd.nic.in/

“The Juvenile Justice Act provides care, protection and rehabilitation to all children in need of care and protection.”

Source: Ministry of Women and Child Development - https://wcd.nic.in/

“Guardians and Wards Act governs the guardianship of minors and custody arrangements under various circumstances.”

Source: National Portal of India - https://www.india.gov.in/

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