दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ ऊर्जा, पर्यावरण और ईएसजी वकील

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GNK Law Associates
दिल्ली, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
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दिल्ली के सर्वश्रेष्ठ वकीलजीएनके एडवोकेट एंड सॉलिसिटर, अपने विशिष्ट कानून क्षेत्रों के अभ्यासरत वकीलों और...
Vidhiśāstras-Advocates & Solicitors
दिल्ली, भारत

2011 में स्थापित
English
विधिशास्त्र - अधिवक्ता एवं सलिसिटर, 2011 में श्री आशीष दीप वर्मा द्वारा स्थापित, भारत में एक प्रतिष्ठित विधिक फर्म है...
LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
दिल्ली, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
Thukral Law Associates
दिल्ली, भारत

2000 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
Hindi
English
हम कौन हैंथुक्करल लॉ एसोसिएट्स एक पूर्ण-सेवा विधिक फर्म है जो विशेष रूप से एनआरआई के लिए विभिन्न विधिक संबंधित...
Samvad Partners
दिल्ली, भारत

2013 में स्थापित
उनकी टीम में 150 लोग
English
Samvād: Partners एक पूर्ण-सेवा भारतीय कानून फर्म है जिसकी बैंगलोर, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई और नई दिल्ली में कार्यालय हैं। हम...
Kochhar & Co.
दिल्ली, भारत

1994 में स्थापित
उनकी टीम में 50 लोग
Hindi
English
ओवरव्यूकोचर एंड को. (“फर्म”) भारत के प्रमुख कॉर्पोरेट लॉ फर्मों में से एक है।नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू, चेन्नई,...
जैसा कि देखा गया

1- Delhi, India में Energy, Environment & ESG कानून का संक्षिप्त अवलोकन

Delhi, India में Energy, Environment और ESG कानून एक साथ काम करते हैं ताकि ऊर्जा उत्पादन, पर्यावरण सुरक्षा और कॉरपोरेशनों की जिम्मेदारियों को एकसाथ सुनिश्चित किया जा सके।

दिल्ली में इन नियमों को DPCC (Delhi Pollution Control Committee) और DERC (Delhi Electricity Regulatory Commission) जैसे क्षेत्रीय प्राधिकरण लागू کرتے हैं। व्यवसायों को प्रदूषण नियंत्रण, ऊर्जा दक्षता और ESG-सम्बन्धी सूचना देने के नियमों का पालन करना होता है।

Energy और ESG से जुड़े कई मानक और पॉलिसियाँ केंद्र सरकार द्वारा तय होते हैं, जिनका दिल्ली में स्थानीय अनुपालन DPCC और स्थानीय नीति-आधारित नियमों के साथ होता है।

“The Environment Protection Act, 1986 provides the framework for the protection and improvement of the environment.”

MoEFCC

“Business Responsibility and Sustainability Report (BRSR) requires listed entities to disclose material ESG information.”

SEBI

“Air pollution management is a national priority to protect public health.”

CPCB

महत्वपूर्ण बिंदु दिल्ली में पर्यावरणीय मानक केंद्रीय कानूनों से संचालित होते हैं और स्थानीय DPCC-नियमन के साथ लागू होते हैं। ESG दायित्वों के लिए SEBI की BRSR आवश्यकता अब बड़ेListed-समूहों पर अनिवार्य है।

2- आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे दिल्ली-आधारित वास्तविक परिस्थितियों के उदाहरण दिए गए हैं जहाँ कानूनी सलाह महत्वपूर्ण होती है।

  • एक दिल्ली-आधारित विनिर्माण इकाई को DPCC से Consent to Establish (CTE) और Consent to Operate (CTO) के लिए आवेदन करना होता है। ऐसा समय पर न करना बड़े जुर्माने या प्रक्रिया-रोधी आदेश ला सकता है।

    कानूनी सलाहकार आपके दस्तावेज, अनुपालन चेक-लिस्ट और आवेदन-नीति को सही तरीके से पूरा कर सकता है।

  • प्रोजेक्ट-शुरुआत के दौरान ध्वनि-आवृत्ति और धुआं नियंत्रण के लिए DPCC के निर्देश मिलते हैं; इंटर-स्टेकहोल्डर सुनवाई के चरणों में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।

    एक अधिवक्ता हैल्प से समय-सीमा और अपील-प्रক্রिया स्पष्ट हो जाती है।

  • एक सूचीबद्ध निगम Delhi में ESG संकेतों पर BRSR रिपोर्ट तैयार कर रहा है; सही ढंग से डेटा एकत्रित और रिपोर्ट करना कानूनी अनिवार्यता है।

    कानूनी सलाहकार ESG-डिस्कॉज़र, सूचना-घटक चयन और आचरण-मानक के अनुरूप मदद दे सकता है।

  • रोफ-रूम में rooftop solar प्रोजेक्ट लगाने के लिए नीति, ग्रिड-और नेट मीटरिंग शर्तें समझनी होंगी; गलतियों से देरी और दाम-रहित नुकसान हो सकता है।

    एक कानूनी सलाहकार आपके लिए नीति-सम्बन्धी चुकी-चुकियाँ साफ कर सकता है।

  • Delhi निवासियों के लिए औद्योगिक-स्थलीय कारणों से प्रदूषण-शिकायत दायर करनी हो तो DPCC/CPCB के संतुलित फैसलों के खिलाफ अपील-या मध्यस्थता की जरूरत पड़ती है।

    इसमें सही न्याय-मार्ग और सबूत-प्रस्तुति अहम होती है।

  • कचरा-प्रबंधन, ई-स्वच्छता और EPR नियमों के अनुपालन के लिए Delhi-आधार पर कानून-उन्मुख कदमों की आवश्यकता पड़ सकती है।

    कानूनी सलाहकार इन दायित्वों को समझाकर कार्य योजना बना सकता है।

3- स्थानीय कानून अवलोकन

  • Water (Prevention and Control of Pollution) Act, 1974 और उसके नियम Delhi में DPCC के माध्यम से लागू होते हैं। यह जल-प्रदूषण रोकथाम के लिए अनुमति, निगरानी और जुर्माने के ढांचे देता है।

  • Air (Prevention and Control of Pollution) Act, 1981 और उससे सम्बद्ध नियम Delhi में प्रदूषण-नियंत्रण के लिए केंद्रीय-नीतियों का स्थानीय अनुपालन सुनिश्चित करते हैं।

  • Delhi Electricity Reforms Act, 2000 और Delhi Electricity Regulatory Commission (DERC) के अंतर्गत दिल्ली में विद्युत-विक्रय, दरें और लाइसेंसिंग regulate होते हैं।

  • Solid Waste Management Rules, 2016 (SWM) और Plastic Waste Management Rules जैसे केंद्रीय नियम Delhi में DPCC के अधीन लागू होते हैं।

  • Delhi Noise Pollution Rules, Noise Regulation and Control Rules 2000 के अंतर्गत शोर-प्रदूषण पर नियंत्रण होता है; जिला-स्तर पर अनुपालन जरूरी है।

4- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

ESG क्या है?

ESG(Environmental, Social, Governance) ऐसे मानक हैं जो कम्पनी के पर्यावरणीय प्रभाव, सामाजिक दायित्व और प्रबंधन-शैली को मापते हैं. Delhi में ESG सूचना SEBI के BRSR के अंतर्गत disclose की जाती है.

मैं Delhi में किस प्रकार के पर्यावरण-परमिट के लिए आवेदन कर सकता हूँ?

मतलब है कि यदि आप प्रदूषण-उत्पादन या जल-प्रदूषण से जुड़े कार्य कर रहे हैं तो DPCC से CT(E) और CTO जैसे परमिट चाहिए होते हैं. अलग-अलग गतिविधियों के लिए अलग-पालन-सूची होगी.

कौन से नियम Delhi में लागू होते हैं?

Air Act, Water Act और EP Act Delhi में प्रभावी हैं. DPCC इन कानूनों के निर्देशों को Delhi के लिए लागू करती है.

क्या मुझे Environmental Impact Assessment (EIA) की आवश्यकता है?

यदि आपका projekt prescribed activities की सूची में आता है तो EIA-प्रक्रिया आवश्यक हो सकती है. स्थानीय नीति और परियोजना-आकार इसे निर्धारित करते हैं.

GRAP क्या है और कब लागू होता है?

GRAP सामान्यतः हवा की गुणवत्ता-स्थिति के आधार पर आपातकालीन और प्रभावी नियंत्रण के लिए एक चरणबद्ध योजना है. Delhi-NCR क्षेत्र में CPCB और DPCC इसे लागू करते हैं.

मैं ESG रिपोर्ट कैसे तैयार कर सकता/सकती हूँ?

Top listed entities के लिए SEBI की BRSR आवश्यक है. yrity की प्रकृति के अनुसार ESG-मैट्रिक्स इकट्ठे कर के रिपोर्ट में प्रदर्शित करने होंगे.

कानूनी सलाहकार से कैसे मदद मिलेगी?

वह आपकी compliance-चेकलिस्ट बनाकर आवेदन, आंटी-अपील, दायित्व-निर्देशन और दस्तावेज तैयारी में मदद करेगा. Delhi-आधारित अधिवक्ता local नियमों को अच्छी तरह समझते हैं.

किस प्रकार के उल्लंघन पर क्या दंड होता है?

DPCC या CPCB द्वारा जारी नोटिस के तहत जुर्माने, दंड-व्यवस्था और कार्य-रुकवा देने जैसे कदम उठाए जाते हैं. उचित अपील-चरण से बचाव संभव है.

क्यों ESG डेटा प्रासंगिक है?

ESG डेटा निवेशकों और regulators के लिए material information है. SEBI के अनुसार यह निवेश निर्णय और कम्पनी की प्रतिष्ठा को प्रभावित करता है.

क्या Delhi निवासी भी environment से जुड़े मामलों में शिकायत कर सकते हैं?

हाँ, DPCC या CPCB के पास शिकायत दर्ज करायी जा सकती है. सही सबूतों के साथ उचित सरकारी-चैनल चुना जाना चाहिये.

कौन सा डेटा सार्वजनिक करना होता है?

उच्च-स्थिति वाली कम्पनी के लिए ESG डेटा सार्वजनिक रिपोर्टिंग के रूप में disclosure होता है. कुछ नियम अधिनियमित तरीके से संरक्षित भी रहते हैं.

कानूनी प्रक्रिया शुरू कैसे करें?

पहला कदम प्रमाण-संग्रह और समस्या-परिशोधन का है. फिर Delhi-आधारित अधिवक्ता से initial consultation लें और स्थिति-аналyses करें.

Delhi में किस प्रकार के दायर-आदेशों का सामना कर सकते हैं?

DPCC/CPCB के आदेश, रोक-थाम नोटिस और जुर्माने जैसे प्रवर्तनों का सामना करना पड़ सकता है. सही मार्ग-निर्णय से विकल्प खुलते हैं.

5- अतिरिक्त संसाधन

  • DPCC - Delhi Pollution Control Committee- दिल्ली में प्रदूषण-नियमन के लिए मुख्य सरकारी इकाई. आधिकारिक साइट: dpcc.delhigovt.nic.in

  • SEBI- Listed entities के लिए ESG-सम्बन्धी disclosure नियमों के लिए जिम्मेदार regulator. आधिकारिक साइट: sebi.gov.in

  • BEE- Bureau of Energy Efficiency; ऊर्जा दक्षता और labelings के मानक. आधिकारिक साइट: beeindia.gov.in

6- अगले कदम

  1. अपने केस या परियोजना के पर्यावरण, ऊर्जा और ESG-आवश्यकताओं की स्पष्ट सूची बनाएं.

  2. Delhi-आधार पर अनुभवी अधिवक्ता या कानूनी सलाहकार से initial consultation लें.

  3. कौन-कौन से permits, approvals और disclosures आवश्यक हैं, यह documents-चेकलिस्ट बनाएं.

  4. डॉक्यूमेंट्स तैयार करें और आवेदन/अपील-फाइलिंग के लिए सही समय-सीमा नोट करें.

  5. स्थानीय DPCC/DERC/SEBI के साथ संवाद की रणनीति तय करें; जरूरत हो तो negotiation या mediation विकल्प तय करें.

  6. कानूनी अनुशीलन के साथ compliance- calendar बनाएं ताकि बार-बार रिन्यूअल मिस-न हो.

  7. नवीनतम नीति-परिवर्तनों पर अपडेट रहने के लिए हर 6-12 महीनों में legal-audit कराएं.

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