भारत में सर्वश्रेष्ठ वसीयत और वसीयतपत्र वकील
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भारत वसीयत और वसीयतपत्र वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
हमारे 1 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें वसीयत और वसीयतपत्र के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.
- संपत्ति का विभाजन
- कक्षा 2 के वारिस (पिता) को प्रॉपर्टी की बिक्री अनुबंध में परिवार के सदस्य के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है क्योंकि पहले पंजीकरण के समय वह उपस्थित नहीं थे। विभाजन के दौरान, क्या वह कक्षा 1 - पत्नी (स्वर्गीय), 3 पुत्रों के संयुक्त स्वामित्व वाली संपत्ति में अपना...
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वकील का उत्तर Remedium Reel Attorneys द्वारा
यदि वसीयत नहीं है, तो उत्तराधिकारी को ट्रांसप्रोवे रजिस्ट्री में प्रशासन पत्र प्राप्त करने के लिए 2 या 3 व्यक्तियों को नियुक्त करना होता है जो उन्हें अन्य उत्तराधिकारियों की इच्छाओं के अनुरूप संपत्ति का प्रशासन करने का अधिकार देता...
पूरा उत्तर पढ़ें
1. भारत में वसीयत और वसीयतपत्र कानून के बारे में
वसीयत एक कानूनी दस्तावेज है जिसमें व्यक्ति मृत्यु के बाद अपनी संपत्ति के बंटवारे के निर्देश देता है।
भारत में वसीयत बनाना सामान्य है ताकि वारिसों के बीच विवाद कम हों और अचल संपत्ति आदि का वितरण स्पष्ट रहे।
वसीयत के बारे में सामान्य नियम भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम और अन्य व्यक्तिगत कानूनों से प्रभावित होते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य- वसीयत लिखित, हस्ताक्षरित और दो गवाहों के हस्ताक्षर प्रामाणिकता के लिए आम तौर पर आवश्यक माने जाते हैं।
“An Act to consolidate the law relating to intestate and testamentary succession.”
Source: Indian Succession Act, 1925 - official text: Indian Succession Act, 1925
“An Act to amend the law relating to succession in case of Hindus, Jains, Sikhs and Buddhists.”
Source: Hindu Succession Act, 1956 - official text: Hindu Succession Act, 1956
“An Act to provide for the registration of documents.”
Source: Registration Act, 1908 - official text: Registration Act, 1908
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
वसीयत बनाते समय कुछ असमंजस और जटिलताएं आ सकती हैं जिन्हें कानूनी सलाहकार समझाएं तो सही हस्तांतरण हो सकता है।
नीचे 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए गए हैं जिन्हें देखते हुए अधिवक्ता से विशेषज्ञ सहायता लेना सुरक्षित है।
- परिशिष्ट संपत्ति का वितरण- कई संपत्तियाँ एक साथ एक से अधिक राज्यों में हों तो वसीयत की वैधता और वितरण सही क़ायदे से जरूरी है।
- नाबालिग बच्चों के लिए संरक्षक निर्णय- अगर आपके बच्चे नाबालिग हैं, तो संरक्षक नामित करना जरूरी होता है और इसके लिए कानूनी दस्तावेज चाहिए।
- विदेशी-राज्य संपत्ति का समन्वय- भारत से बाहर के परिसंपत्तियों के साथ इंटर-स्टेट वितरण की जरूरत हो तो सही कानून की चेकलिस्ट चाहिए।
- जटिल दावा-गुट और विरोध- पारिवारिक विवाद की स्थिति में वसीयत की वैधता पर प्रश्न उठ सकता है, एडवोकेट की सहायता आवश्यक है।
- भागीदारी में महिलाओं के अधिकार- 2005 के हिंदू विवाह संशोधन और coparcenary अधिकारों के बाद वितरण आधुनिक बनता है; ऐसे मामलों में कानूनी सलाह लाभदायक है।
- आधुनिक दस्तावेजीकरण और वैलिडेशन- वसीयत को सही तरीके से लिखवाने, गवाहों की गारंटी और पंजीकरण की प्रक्रिया में अवरोध हो तो कानून सलाह चाहिए।
उच्च-स्तरीय वास्तविक परिस्थितियाँ: कई लोग एक ही संपत्ति पर कारोबार करते हैं, या एक संरक्षक बनाकर बच्चों के लिए सुरक्षा चाहते हैं; इन मामलों में वकील अदालत-आधारित प्रैक्टिकल गाइड दे सकता है।
3. स्थानीय कानून अवलोकन
- भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925- वसीयत और उत्तराधिकार से जुड़े प्रावधान governed करते हैं।
- हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956- हिंदू, जैन, सिख और बौद्ध के विरासत नियमों को संचालित करता है; coparcenary अधिकार आदि बदलते हैं।
- पंजीकरण अधिनियम 1908- वसीयत की पंजीकरण की संभावनाओं और प्रमाणिकता बढ़ाने के लिए महत्त्वपूर्ण है; अनिवार्यता नहीं है पर विवाद से बचाता है।
नोट: मुस्लिम, ईसाई आदि धर्मों में व्यक्तिगत कानून भी भूमिका निभाते हैं, पर वसीयत के अन्तर-धर्म नियम मुख्यतः उत्तराधिकार अधिनियम से संचालित होते हैं।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वसीयत क्या है?
वसीयत मृत्यु के बाद संपत्ति के वितरण के निर्देश का लिखित प्रमाण है, जिसे टेस्टेटर ने तैयार किया हो।
क्या मुझे भारत में वसीयत बनाने के लिए वकील की आवश्यकता है?
अनिवार्य नहीं, पर लागत, विवाद, और प्रमाणिकता के लिए वकील की सलाह सुरक्षित रहती है।
वसीयत बनाने के लिए कौन-कौन से मानदंड आवश्यक हैं?
यह लिखित हो, टेस्टेटर के हस्ताक्षर हों, और आम तौर पर दो गवाहों की उपस्थिति आवश्यक हो।
हथखड़ी या हैंडरिटन (होलोग्राफ) वसीयत वैध हो सकती है?
भारतीय कानून में सामान्यतः लिखित वसीयत ही मान्य मानी जाती है; हस्ताक्षरित गवाहों के साथ प्रमाणित होने पर वैध माना जाता है।
क्या मैं वसीयत को पंजीकृत करवा सकता हूँ?
पंजीकरण वैकल्पिक है, पर पंजीकृत वसीयत प्रमाणिकता बढ़ाता है और विवाद कम करता है।
वसीयत कब बदली जा सकती है या समाप्त की जा सकती है?
नया वसीयत बनाकर या मौजूदा वसीयत को रद्द कर के या संपत्ति का दान देकर बदला जा सकता है।
एक से अधिक वसीयत होने पर क्या होता है?
पूर्व वसीयत समाप्त नहीं होती; सामान्यतः केवल नवीन वसीयत लागू होती है, अतः स्पष्टता जरूरी है।
प्रॉबेट की आवश्यकता कब पड़ती है?
कानून के अनुसार कुछ मामलों में परीक्षणाधिकारी की पुष्टि (प्रॉबेट) आवश्यक होती है, ताकि संपत्ति सही संपत्तियों को ट्रांसफर हो सके।
क्या वसीयत में शादी-बच्चों के बारे में नियम आते हैं?
वसीयत के जरिए आप अपने नियम अनुसार संपत्ति दे सकते हैं; दायित्व, संरक्षक और बच्चों के हित संतुलित रखें।
मैं कैसे जानूं कि मेरी वसीयत सुरक्षित है?
उचित गवाह, सुरक्षा-नोट, पंजीकरण, और एक भरोस्तेदार स्टोरिंग स्थान से सुरक्षित रखा जा सकता है; एडवोकेट से सुरक्षित तरीके से लिखवाएं।
कौन सा दस्तावेज़ मेरे पैसे के मामले में सबसे पहले देखा जाएगा?
Testator के मृत्यु-समय के प्रॉक्सी दस्तावेज़, वसीयत, वस्तु-स्थिति, और गवाहों के साक्ष्य प्राथमिक आधार होंगे।
क्या मुझे अंतर-राज्य संपत्ति के लिए अलग वसीयत बनानी चाहिए?
हां, अलग-अलग राज्य-स्तर पर संपत्ति के वितरण के लिए एक से अधिक वसीयत की जरूरत पड़ सकती है और वकील से निर्देश लें।
5. अतिरिक्त संसाधन
- National Legal Services Authority (NALSA) - मुफ्त कानूनी सहायता और वसीयत, प्रॉबेट आदि के उपाय; वेबसाइट: nalsa.gov.in
- Bar Council of India (BCI) - बार-चै���, advokate network और सफलताओं के निर्देश; वेबसाइट: barcouncilofindia.org
- Vidhi Centre for Legal Policy - कानून-नीति पर शोध-लेख और नागरिक-उपयोगी गाइड; वेबसाइट: vidhi.org
6. अगले कदम
- अपने परिसंपत्तियों की पूरी सूची बनाएं-खुद की संपत्ति, बैंक खाते, निवेश, प्रॉपर्टी आदि।
- अनुमानित कुल दायित्व और लाभार्थियों के नाम तय करें।
- एक विश्वसनीय कानूनी सलाहकार (advocate) से पहले-आउटलाइन पर चर्चा करें।
- Will draft करवाएं-साथ में संरक्षक, वैध गवाह, और संपत्ति का वितरण स्पष्ट हो।
- यदि संभव हो तो वसीयत को पंजीकृत करवाने पर विचार करें।
- डॉक्यूमेंट्स की फोटोकॉपी सुरक्षित जगह पर रखें और वारंटि-उपलब्ध साक्ष्यों के साथ रखें।
- हर परिवर्तन पर नया दस्तावेज बनाएं और पुराने को स्पष्ट रूप से रद्द करें।
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