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भारत में सर्वश्रेष्ठ पेटेंट वकील

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Advocate Ankit Kumar Singh
पटना, भारत

2018 में स्थापित
उनकी टीम में 1 व्यक्ति
English
Hindi
बौद्धिक संपदा पेटेंट बौद्धिक संपदा लाइसेंसिंग एवं लेनदेन +6 और
एडवोकेट अंकित कुमार सिंह की विशेषज्ञता में आपका स्वागत है – प्रतिष्ठित पटना हाई कोर्ट में आपके विश्वसनीय...
Parker & Parker Advocates - IP & Corporate Law firm
अहमदाबाद, भारत

2004 में स्थापित
उनकी टीम में 25 लोग
English
बौद्धिक संपदा पेटेंट व्यापार रहस्य +6 और
पार्कर और पार्कर - वकील बौद्धिक संपदा अभियोजन और संबंधित वाणिज्यिक कानूनी सेवाओं पर पूरे भारत में केंद्रित है, जो...
Legal Square Chambers
लखनऊ, भारत
परामर्श मुफ़्त · 30 मिनट

2001 में स्थापित
उनकी टीम में 18 लोग
English
Hindi
Legal Square Chambers एक पूर्ण-सेवा मुकदमाकशी और परामर्श प्रैक्टिस है जो रणनीतिक, परिणाम-उन्मुख कानूनी समाधान प्रदान करती है।...
Kamaltara Partners LLP (Advocates & Solicitors)
मुंबई, भारत
परामर्श मुफ़्त · 15 मिनट
प्रति घंटा शुल्क ₹2,000

2025 में स्थापित
उनकी टीम में 8 लोग
English
Marathi (Marāṭhī)
Hindi
कमलतारा पार्टनर्स एलएलपी (KAMALTARA PARTNERS LLP) एक फुल-सर्विस लॉ फर्म है, जो व्यावसायिक और वित्तीय उद्यमों, बड़े कॉर्पोरेट...
Vrushali Suryawanshi And Associates
पुणे, भारत

2021 में स्थापित
उनकी टीम में 5 लोग
Hindi
Marathi (Marāṭhī)
English
अधिवक्ता वृषाली सूर्यवंशी एंड एसोसिएट्स पुणे स्थित एक विश्वसनीय लॉ फर्म है, जो व्यक्तियों, परिवारों, संपत्ति...
DLA & Associates
हैदराबाद, भारत

2025 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
DLA & Associates भारत में आधारित एक बुटीक पूर्ण-सेवा विधिक फर्म है, जो घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय क्लाइंट्स को विभिन्न...
Ishan Ganguly
कोलकाता, भारत

2025 में स्थापित
उनकी टीम में 1 व्यक्ति
English
हमारी फर्म प्रभावशाली कानूनी अभ्यास के लिए समर्पित है, जिसमें पर्यावरण कानून और जलवायु वकालत पर विशेष ध्यान...

2023 में स्थापित
उनकी टीम में 4 लोग
English
Arohana Legal Advocates is a boutique corporate law firm based in Jaipur that provides end-to-end advisory for corporate enterprises and startups. The practice focuses on corporate and commercial matters including general corporate work, Mergers and Acquisitions related activity, cross border...
Kontract Genie Legal LLP
हैदराबाद, भारत
परामर्श मुफ़्त · 15 मिनट

2021 में स्थापित
उनकी टीम में 5 लोग
English
Hindi
Kontract Genie में, हम वकीलों की एक ऐसी टीम हैं जो हमारे ग्राहकों को सर्वोत्तम अनुबंध अनुभव प्रदान करने के लिए समर्पित है।...
CHOUDHARY AND ASSOCIATES ADVOCATES RANCHI AND NEW DELHI
रांची, भारत
परामर्श मुफ़्त · 15 मिनट

2009 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Bengali
कॉर्पोरेट कानूनचौधरी एंड एसोसिएट्स की कॉर्पोरेट लॉ डिवीजन उन उत्कृष्ट टीमों में से एक है जिन्होंने कॉर्पोरेट...
जैसा कि देखा गया

1. भारत में पेटेंट कानून के बारे में

भारत में पेटेंट कानून का मुख्य उद्देश्य आविष्कारकों को उनके नवोन्मेष के लिए अधिकार देना है ताकि वे अपने विकसन को व्यावसायिक रूप से सुरक्षित तरीके से विकसित कर सकें।

पेटेंट के लिए आवश्यक तीन प्रमुख मूल्यमानदंड हैं: novelty, inventive step और industrial applicability. इन معیارों के आधार पर आवेदन स्वीकार या अस्वीकार किया जाता है।

पेटेंट का अधिकार 20 वर्ष के लिए सीमित अवधि के लिए मिलता है और इसके लिए वार्षिकMaintenance शुल्क देना होता है। इसके अलावा पेटेंट आवेदन प्रक्रिया में पूर्व-स्वीकृति विरोध (pre grant opposition) और बाद में विरोध (post grant opposition) के अवसर भी होते हैं।

"A patent is an exclusive right granted for a limited period on a new invention in exchange for disclosure of the invention."
"The mere discovery of a new form of a known substance which does not result in the enhancement of the known efficacy of that substance shall not be patentable."

भारत में पेटेंट के प्रमुख कानूनक ढांचे के बारे में संक्षेप में:

  • The Patents Act, 1970 - आविष्कार के लिए पेटेंट प्राप्त करने के अधिकार, पात्रता मानदंड और प्रतिरक्षा संरचना को नियंत्रित करता है।
  • The Patents Rules, 2003 - आवेदन, परीक्षण, विरोध और शुल्क से संबंधित प्रक्रियात्मक नियम निर्धारित करता है।
  • IPR नीति 2016 - समग्र दृष्टिकोण में सभी प्रकार के IPR के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए दिशानिर्देश देता है।

उच्चतम न्यायालय द्वारा भी पेटेंट के दायरे में नवीनता और वैधानिकता के कारण महत्वपूर्ण निर्णय दिए गए हैं, जैसे ग्लीवेक केस से जुड़ी धारणाओं पर भारत ने 3-d ड्राफ्ट के मानदंड स्पष्ट किए हैं।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

भारत में पेटेंट से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं के लिए एक अनुभवी कानूनी सलाहकार या अधिवक्ता की सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नीचे 4-6 वास्तविक परिस्थितियाँ दी जा रही हैं जिनमें वकील की आवश्यकता स्पष्ट हो जाती है:

  • 1) नया आविष्कार भारतीय धरातल पर पेटेंट कराना - शुरुआती फाइलिंग से लेकर पूर्ण विवरण बनाने, प्राथमिक अर्जी, और सामान्य क्लाउड-आधारित फाइलिंग में मदद चाहिए।
  • 2) अमेरिकी/यूरोप आदि से PCT राष्ट्रीय चरण प्रविष्टि - अंतरराष्ट्रीय आवेदन के बाद भारत में राष्ट्रीय चरण के लिए सही फॉर्मिंग और समय-सीमा आवश्यक हैं।
  • 3) प्रस्तुति प्राप्त ऑब्जेक्शन (Exam Report) पर जवाब देना - नकली/नवीनता के प्रमाण, inventive step के विरोध आदि पर तर्क सम्मिलित करने के लिए अनुभवी वकील जरूरी।
  • 4) पूर्व-ग्रांट और पोस्ट-ग्रांट विरोध - किसी अन्य पार्टी के विरोध से आपके आवेदन/पेटेंट का सुरक्षित बचाव और त्वरित प्रवर्तन संभव बनता है।
  • 5) दवा/औषधि आदि रोग-सम्बन्धी आविष्कारों में 3-d जैसे मानदंडों पर चुनौती - Novartis बनाम भारत निर्णय जैसे मुद्दों पर मजबूत तर्क की जरूरत होती है।
  • 6) पेटेंट के प्रवर्तन और प्रतिकूल प्रवर्तनों पर संरक्षण - infringement से सुरक्षा, रोकथाम और अनुचित उपयोग रोकथाम के लिए कानूनी कदम उठाने में मदद।

उदाहरण के तौर पर, Natco Pharma ने 2012 में Sorafenib (Nexavar) के लिये भारत में compulsory license प्राप्त किया-यह दिखाता है कि कैसे सार्वजनिक हित के लिए वैधानिक मार्ग खुलते हैं और इसके लिए कानूनी सलाह आवश्यक होती है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

भारत में पेटेंट से जुड़ी प्रमुख कानूनी संरचना में तीन मुख्य कानून आते हैं:

  • The Patents Act, 1970 - पेटेंट की पात्रता, अधिकार, अवधि, और संशोधन-प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है।
  • The Patents Rules, 2003 - फाइलिंग, examination, opposition, फीस आदि के विस्तृत नियम देता है।
  • IPR Policy 2016 - समष्टि स्तर पर IPR के संरक्षण, संवर्धन और जागरूकता के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है।

संशोधित नियम व प्रक्रियाओं के अपडेट के लिए IP India के आधिकारिक पन्ने देखें।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेटेंट क्या है?

पेटेंट एक सरकारी एकाधिकार है जो आविष्कारक को एक सीमित समय के लिए अपने आविष्कार का व्यावसायिक उपयोग exclusive रूप से करने का अधिकार देता है।

पेटेंट कितने समय तक रहता है?

भारत में पेटेंट की वैधता 20 वर्ष होती है, जो फाइलिंग तिथि से गिनी जाती है और वार्षिक फीस के साथ बनाए रखी जाती है।

पेटेंट के तीन मुख्य मानदंड क्या हैं?

novelty, inventive step और industrial applicability। बिना इन तीनों के पेटेंट नहीं मिल सकता।

3-d का क्या मतलब है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

3-d नियम कहता है कि ज्ञात पदार्थ के नए रूप से अगर ज्ञात प्रभाव में वृद्धि नहीं होती तो वह पेटेंट योग्य नहीं माना जाता।

पेटेंट आवेदन से पहले कि क्या मुझे एक खोज करनी चाहिए?

हाँ, अंतरराष्ट्रीय और भारतीय डेटाबेस में पूर्व-खोज से यह पता चलता है कि आपकीImplantation unique है या नहीं।

Pre-grant और post-grant विपक्ष में क्या अंतर है?

Pre-grant विपक्ष आवेदन के परीक्षण से पहले हो सकता है, जबकि post-grant विपक्ष पेटेंट दावों के जारी होने के बाद दायर होता है।

क्या मैं भारत से बाहर भी पेटेंट करा सकता हूँ?

हाँ, PCT मार्ग से अंतरराष्ट्रीय फाइलिंग के बाद भारत में national phase के लिए प्रवेश किया जा सकता है।

कौन सी मुख्य प्रक्रियाएं हैं जिनके लिए वकील चाहिए?

फाइलिंग, examination report के जवाब, post-grant Opposition, और compulsory licensing के मामलों में अधिवक्ता आवश्यक होता है।

Compulsory licensing कब लागू होता है?

जब सार्वजनिक हित के कारण महत्त्वपूर्ण दवाओं या संसाधनों की उपलब्धता और मूल्य नियंत्रण आवश्यक हो, तब ये अधिकार मिलते हैं।

क्या भारत में सॉफ्टवेयर पेटेंट संभव है?

भारत में सॉफ्टवेयर के लिए सीधी पेटेंट क्षमता सीमित है; व्यावहारिक तौर पर कंप्यूटेशनल तरीके से सृजित स्थिर तकनीक या विशिष्ट हार्डवेयर-समर्थित समाधान को माना जाता है।

पोस्ट-ग्रांट ऑब्जेक्शन के लिए समय सीमा क्या है?

ऑब्जेक्शन के जवाब हेतु समय-सीमा आम तौर पर 12 महीनों के भीतर दी जाती है; बढ़ाने के लिए अनुरोध किया जा सकता है।

पेटेंट ड्राफ्टिंग में क्या खास देखना चाहिए?

स्पष्ट, संपूर्ण और पेचीदा दावों के साथ एक स्पष्ट विवरण दें ताकि अनावश्यक अस्पष्टता न रहे और व्यापक संरक्षण संभव हो।

पेटेंट के लिए कुल लागत कितनी होती है?

फाइलिंग फीस, विषय-वस्तु शुल्क, वार्षिक Maintainance शुल्क और वकील शुल्क मिलाकर लागतें बदलती हैं; शुरुआती फेज में 1-2 लाख से शुरू हो सकती हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • CGPDTM (Office of the Controller General of Patents, Designs and Trade Marks) - पेटेंट, डिजाइनों और ट्रेड मार्क्स के लिए मुख्य नियंत्रण संस्था। https://ipindia.gov.in
  • WIPO India - विश्वस्तर पर IP के सीखने और भारत के संदर्भ में सूचना संसाधन। https://www.wipo.int/about-ip/en/regions/wipo_india/
  • NIIPM (National Institute of Intellectual Property Management) - IPR पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम देता है।

6. अगले कदम

  1. अपनी आविष्कार की पहचान करें और पूर्व-खोज करें- IP India तथा अन्य डेटाबेस पर समानता देखिए।
  2. यदि आवश्यक हो तो एक संपूर्ण या प्रायोगिक डाक्यूमेंटेशन तैयार करें।
  3. एक अनुभवी पेटेंट वकील या कानूनी सलाहकार से कॉन्टैक्ट करें और चयन करें।
  4. फाइलिंग रणनीति तय करें- सीधे भारतीय आवेदन या PCT के जरिए अंतरराष्ट्रीय फाइलिंग।
  5. First Examination Report (FER) के जवाब के लिए योजना बनाएं और समय पर प्रतिक्रिया दें।
  6. यदि जरूरत हो तो pre-grant या post-grant विरोधी कदम उठाएं और यह सुनिश्चित करें कि दावों की सुरक्षा हो।
  7. पेटेंट प्राप्त होने के बाद उचित maintenance शुल्क दें और समय‑समय पर औपचारिकता पूरी करें।

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