भारत में सर्वश्रेष्ठ गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ वकील
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India में गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ कानून के बारे में: India में गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ कानून का संक्षिप्त अवलोकन
भारत में गैर-लाभकारी संगठनों के लिए एक एकीकृत केंद्रीय कानून नहीं है; अधिकांश संस्थाओं को उनकी संरचना के अनुसार अलग-अलग नियमों का पालन करना पड़ता है। सामान्य रूप से यह Trusts, Societies और Section 8 Companies के रूप में स्थापित होते हैं।
गैर-लाभार्थी संस्थाओं की गतिविधियाँ कर-छूट लाभ, दान-स्वीकृति और विदेशी योगदान पर निर्भर करती हैं। इन संस्थाओं के लिए पंजीकरण, वार्षिक सूचना-दान, ऑडिट और दानकर्ता-गोपनीयता जैसे नियम अनिवार्य होते हैं।
सरकारी ढांचे में सबसे प्रचलित कानून और स्रोत हैं: Trusts से संबंधित भारतीय ट्रस्ट्स एक्ट 1882, Societies के लिए सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860, Sections-8 कंपनियाँ के लिए Companies Act 2013 के अंतर्गत पंजीकरण, और विदेशी सहयोग पर FCRA 2010 द्वारा विनियमन।
“No person shall receive any foreign contribution except in accordance with the provisions of this Act.”स्रोत: Foreign Contribution Regulation Act, 2010. FCRA-Official
“Registration under section 12A of the Income Tax Act, 1961 is a precondition for tax exemption.”स्रोत: Income Tax Department. Income Tax Department - Charities
“A Section 8 company is a not-for-profit company with charitable objects and aims to promote social welfare.”स्रोत: Ministry of Corporate Affairs. MCA - Section 8 Companies
इन स्रोतों से स्पष्ट है कि भारत में गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए पंजीकरण और कर-उपदान, विदेशी योगदान, और ऑडिट जैसी कई बाध्यताएँ हैं। निवासियों के लिए यह जानना आवश्यक है कि कौन सा ढाँचा उनके उद्देश्य, फंडिंग स्रोत और वहन योग्य अनुपालन के अनुरूप है।
आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्य की सूची बनाएं। India से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें
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नई-स्थापना: संरचना चयन और शासन-प्रस्ताव बनाना - आप चाहेंगे कि ट्रस्ट, सोसायटी या Section 8 कंपनी किस अनुशासन में बने। उदाहरण के तौर पर Azim Premji Foundation या Smile Foundation जैसी संस्थाओं के लिए सही-शुरुआती ढांचे का चयन महत्वपूर्ण है ताकि कर-छूट और दान-नियमन सुगम हो। दो-तीन प्रारूपों के फायदे-तब-more स्पष्ट होते हैं।
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टैक्स एक्सेम्प्शन पंजीकरण (12A/80G) के लिए आवेदन - 12A और 80G पंजीकरण प्राप्त करने हेतु दस्तावेज, जन-हित निर्णय-पत्र और ट्रस्ट/सोसायटी के संचालन की रिकॉर्डिंग जरूरी होती है। उदाहरण के लिए GiveIndia और Goonj जैसे आकर-चिह्न संस्थान इस पथ से दान-देने वालों को राहत देते हैं।
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विदेशी योगदान (FCRA) प्राप्ति/एनालिसिस - विदेशी निधि मिलने पर FCRA के नियमों का पालन आवश्यक होता है। एक FCRA पंजीकृत संस्था को ही विदेशी योगदान स्वीकार करना चाहिए, क्यों कि कानून स्पष्ट है: “No person shall receive any foreign contribution except in accordance with the provisions of this Act.”
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आडिट, वार्षिक रिपोर्टिंग और ROC-फाइलिंग - Trusts, Societies और Section 8 कंपनियाँ क्रमशः वार्षिक अंकेक्षण, वित्तीय विवरण और ROC/State-Registrars के साथ रिपोर्टिंग के उत्तरदायी होती हैं। यह सुचारु कार्य-विधि सुनिश्चित करने के लिए एक कानूनी सलाहकार की जरूरत पड़ती है।
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जोड़-तोड़, विलय या dissolution - संगठन के संरचनात्मक परिवर्तन, जैसे कि amalgamation, dissolution, या grant-नियोजन परिवर्तन, में कानूनी मार्गदर्शन अनिवार्य होता है ताकि पूर्व-निर्धारित नियमों के अनुसार प्रावधान पूरे हों।
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राज्य-स्तर पर विशिष्ट पंजीकरण - कुछ राज्यों के अपने Trusts/Societies कानून होते हैं जिनमें राज्य-स्तर पर पंजीकरण और अनुपालन की पाबंदियाँ शामिल हो सकती हैं।
स्थानीय कानून अवलोकन: India में गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें
नीचे क्रम-अनुसार कानून संस्थाओं को पंजीकरण, संचालन और अनुपालन के मुख्य ढांचे प्रदान करते हैं:
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Indian Trusts Act, 1882 - निजी और सार्वजनिक ट्रस्टों के निर्माण, नियंत्रण और दायित्वों के नियम निर्धारित करता है।
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Societies Registration Act, 1860 - सोसायटी फॉर्म के पंजीकरण एवं संचालन के लिए मानक प्रावधान देता है, अधिकांश राज्यों में लागू है।
Companies Act, 2013 (Section 8 Companies) - न-लाभकारी उद्देश्य के लिए पंजीकृत कंपनी के रूप में संचालन करना संभव बनाता है। यह एक आधुनिक, केंद्र-आधारित ढाँचा है जो कॉर्पोरेट-गवर्नेंस और फंडिंग-प्रणालियों को एकीकृत करता है।
“Section 8 Company is a not-for-profit company with charitable objects and aims to promote social welfare.”स्रोत: Ministry of Corporate Affairs. MCA - Section 8 Companies
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: 10-12 प्रश्न-उत्तर जोड़े
NGO के लिए कौन सा ढांचा उपयुक्त है: ट्रस्ट, सोसायटी या Section 8 कंपनी?
यह चयन आपके उद्देश्य, फंडिंग मॉडल और अनुमति दायित्व पर निर्भर करता है। ट्रस्ट सरल पंजीकरण दे सकता है; सोसायटी अधिक लोकतांत्रिक शासन देती है; Section 8 कंपनी कॉर्पोरेट-गवर्नेंस और स्थिरता प्रदान करती है।
12A और 80G पंजीकरण क्यों जरूरी है?
12A से आयकर exemption मिलती है, जिससे संस्थान का आय-कर भार घटता है। 80G से दानकर्ताओं को कर में कटौती मिलती है, जो दान प्राप्ति बढ़ाने में मदद करता है।
FCRA के अंतर्गत विदेशी योगदान प्राप्त करने के लिए क्या अनिवार्य है?
हर विदेशी योगदान स्वीकार करने के लिए FCRA पंजीकरण आवश्यक है। No person shall receive any foreign contribution except in accordance with the provisions of this Act.
क्या FCRA पंजीकरण ऑनलाइन है?
हाँ, FCRA पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन किया जाता है।
नियमित ऑडिट और वार्षिक रिटर्न किसके द्वारा कैसे दाखिल होते हैं?
ट्रस्ट/सोसायटी/Section 8 कंपनी के अनुसार ऑडिट, फाइनेंशियल स्टेटमेंट और ROC-फाइलिंग अनिवार्य होते हैं।
मालिकाना-आधारित परिवर्तन (दायित्व) कब जरूरी होता है?
यदि संरचना, स्वरूप या उद्देश्य में परिवर्तन होता है तो नया पंजीकरण या परिवर्तन-उचित आवेदन आवश्यक हो सकता है।
राज्य-स्तर पर क्या-क्या अनुपालनों का पालन चाहिए?
हर राज्य के अपने ट्रस्ट/सोसायटी कानून होते हैं; कुछ राज्यों में विशेष पंजीकरण और सालाना रजिस्टरिंग की जरूरत है।
ट्रस्ट बनाम सोसायटी में चुनाव कैसे करें?
ट्रस्ट का नियम सरल और निजी-स्वामित्व पर निर्भर होता है, जबकि सोसायटी अधिक लोकतांत्रिक शासन और नियमित सदस्य-वार्षिक बैठकों पर जोर देती है।
CSR ऑब्लिगेशन का NGO पर प्रभाव क्या है?
कंपनी CSR कानून के अनुसार कुछ NGO कार्यों को CSR गतिविधियों के रूप में मान्यता मिलती है। यह फण्डिंग के लिए एक मार्ग देता है।
एक NGO को भंग/समाप्त करने के कानूनी कदम क्या हैं?
धारणीय नियमों के अनुसार आंतरिक-अनुदान, ऑडिट, देनदारियों का निपटान और पंजीकरण-विलोपन-निर्णय जरूरी होते हैं।
कानून-परिवर्तनों के समय NGO को क्या कदम उठाने चाहिए?
नए नियमों के अनुसार आंतरिक प्रक्रियाओं को अपडेट करें, आवश्यक पंजीकरण/नवीनीकरण करवाएं, और दानकर्ताओं को स्पष्ट सूचना दें।
क्या दानकर्ता के लिए किसी प्रकार की सूचना देनी पड़ती है?
कई मामलों में दानदाता के लिए 80G/12A लाइनों के अंतर्गत आवश्यक जानकारी रिपोर्टिंग की जाती है।
कानूनी सलाहकार कैसे चुनें?
कानून-प्रथा में अनुभव, FCRA/12A/80G पंजीकरण से निपटने की विशेषज्ञता, और ROC-फाइलिंग के अनुभव पर देखें।
अतिरिक्त संसाधन: NGO से संबंधित 3 विशिष्ट संगठन
- GuideStar India - NGO सूचना, अनुपालन रिकॉर्ड और सामाजिक प्रदर्शन के लिए एक प्रमुख पोर्टल। वेबसाइट: guideStarIndia.org
- Charities Aid Foundation India (CAFI) - दान, फंडिंग एक्वायरमेंट और NGO-समाकाल के लिए संसाधन। वेबसाइट: CAFI.org.in
- GiveIndia - दान-नज़र और NGO मानक-निर्माण के लिए एक विश्वसनीय मंच। वेबसाइट: GiveIndia.org
अगले कदम: गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया
- अपने उद्देश्य, कार्य-क्षेत्र और कानूनी ढाँचे को स्पष्ट करें ताकि सही प्रकार का पंजीकरण चुना जा सके।
- कानून-परामर्श के लिए अनुभव वाले वकील/कानूनी सलाहकार की सूची बनाएं, लक्ष्य-उद्योग NGO-उन्मुख हो।
- स्पष्ट-चर्चित पंजीकरण-चरण तय करें: 12A/80G/FCRA अनुमानित आवश्यकताएं आपके ढांचे के अनुसार।
- गवर्निंग बॉडी और नीति-डाक्यूमेंट्स बनाएं: ट्रस्ट/सोसायटी/Section 8 कंपनी के लिए-cmpr
- DFIR, डेटा सुरक्षा, दानकर्ता-गोपनीयता और वित्तीय नियंत्रण के टेम्पलेट तैयार करें।
- आवश्यक दस्तावेजों के साथ पंजीकरण-अरजी दाखिल करें; राज्य/केन्द्र स्तर पर आवश्यक आवेदन करें।
- पदोन्नति-समय पर अनुपालन चेकलिस्ट बनाकर अद्यतन रखें और ऑडिट/रिपोर्टिंग को नियमित करें।
उद्धरण स्रोत और आधिकारिक पन्ने:
- Foreign Contribution Regulation Act, 2010 - No person shall receive any foreign contribution except in accordance with the provisions of this Act. FC-तथ्य जानकारी: https://fcra.gov.in
- Income Tax Department - 12A/80G पंजीकरण से कर-छूट के प्रावधान: https://www.incometaxindia.gov.in
- Ministry of Corporate Affairs - Section 8 Companies और not-for-profit संरचना: https://www.mca.gov.in
नोट: उपरोक्त जानकारी सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय कानून-परामर्श लें और अद्यतन आधिकारिक स्रोत देखें।
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