भारत में सर्वश्रेष्ठ समलैंगिक एवं एलजीबीटी वकील
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1. भारत में समलैंगिक एवं एलजीबीटी कानून के बारे में
भारत में कानूनी स्थिति ने 2018 में बड़ा मोड़ लिया। सुप्रीम कोर्ट ने consensual adult संबंधों को अपराध मानने वाली धाराओं को हटा दिया।
Navtej Singh Johar बनाम Union of India के फैसले ने IPC धारा 377 के समान उम्र के वयस्कों के बीच सहमत रिश्तों को अपराध नहीं माना।
संवैधानिक अधिकारों के दायरे में एलजीबीटी व्यक्तियों को निजता, समानता और गरिमा के अधिकार मिलते हैं। ये अधिकार धारा 14, 19 और 21 के माध्यम से संरक्षित हैं।
“Right to privacy is a fundamental right under the Constitution.”
सार: Puttaswamy v Union of India (2017) - Supreme Court of India
Transgender Persons (Protection of Rights) Act 2019 ने transgender व्यक्तियों के लिए पहचान, सुरक्षा और भेद-भाव-रोध के प्रावधान दिए। फिर भी कानून के पालन-प्रकार में चुनौतियाँ बनी रहती हैं।
“The Act provides protection of rights of transgender persons and prohibits discrimination.”
सार: Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019 - आधिकारिक gazette/सरकारी दस्तावेज़
फिलहाल समान विवाह, पारिवारिक अधिकार आदि पर निर्णय अदालतों के अधीन हैं और राष्ट्रीय स्तर पर एक ठोस निर्णय नहीं है। अधिकांश मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
एलजीबीटी मुद्दों पर कानूनी सहायता ढीली स्थिति में अहम हो जाती है। नीचे 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए गए हैं जिनमें वकील की सलाह उपयोगी रहती है।
- पुलिस या सरकारी एजेंसियों द्वारा भेदभाव या गलत प्रताड़ना हो तो। एक वकील उचित संरक्षण और प्रवर्तन-उपाय दे सकता है।
- IPC धारा 377 के अधीन पूर्व-2018 मामलों का पुनर्मूल्यांकन या शिकायत-निवारण करना हो तो।
- Transgender पहचान के दस्तावेज, नोटिस, स्कूल-या नौकरी में भेदभाव जैसी स्थिति पर कानूनी मार्गदर्शन चाहिए।
- Same-sex पार्टनर के लिए पारिवारिक अधिकार, आवास, सुरक्षा-सम्बन्धी दावे हों तो एक advoket की मदद जरूरी है।
- घर पर DV ( Domestic Violence) के मामलों में सुरक्षा-आदेश या संरक्षण पाने के लिए।
- Child adoption या Guardian के रूप में अधिकारों के लिए सतर्क-दिशा-निर्देशन चाहिए।
एनालिसिस और सहायता के लिए आम तौर पर प्रैक्टिस में निम्न प्रकार के अभिभावक-स्तर के वकील काम आते हैं। इनमें से 2014 के NALSA निर्णय से transgender अधिकार का दायरा स्पष्ट हुआ था।
3. स्थानीय कानून अवलोकन
- Indian Penal Code (IPC) धारा 377 - पहले समलैंगिक समबंधों को अपराध मानती थी। 2018 के Navtej Singh Johar फैसले से वैधानिकता का स्वर बदला गया और consensual adult relations को अपराध नहीं माना गया।
- Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019 - transgender व्यक्तियों के लिए पहचान, सुरक्षा, भेद-भाव-रोध आदि के प्रावधान देता है।
- संघीय संविधान के प्रावधान - अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 19(1)(a) और अनुच्छेद 21 एलजीबीटी व्यक्तियों को समानता, स्वतंत्रता और जीवन-गौरव से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
इन के अलावा अदालतों के फैसलों ने निजता, गरिमा और पहचान के अधिकार को मजबूत किया है। भारत के क्षेत्रीय न्यायालय भी इन अधिकारों को स्तर-वार लागू करते हैं।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या अब भारत में समलैंगिक विवाह मान्यता प्राप्त है?
नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर समान विवाह अभी मान्यता प्राप्त नहीं है। कुछ मामलों में अदालतें मार्ग दिखाती हैं पर फैसला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है।
क्या IPC धारा 377 अब लागू नहीं है?
कार्य-प्रभावित रूप से consensual adult relations पर अब न्यायिक सुरक्षा है। हालाँकि अन्य अपराध-प्रकार के लिए धारा 377 अभी भी प्रभावी हो सकती है।
अगर मैं transgender हूँ, तो दस्तावेजों पर लिंग कैसे बदल सकता हूँ?
Transgender Persons Act 2019 के अनुसार पहचान-प्रमाण (certificate of identity) प्राप्त किया जा सकता है। यह जिले के अधिकारी के माध्यम से किया जा सकता है और पासपोर्ट, आधार आदि में लिंग बदलाव संभव है।
कानूनी तौर पर LGBT व्यक्तियों के कौन से मौलिक अधिकार सुरक्षित हैं?
निजता, समानता, गरिमा और जीवन-गौरव के अधिकार संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के अधिकारों के अंतर्गत आते हैं।
क्या LGBT व्यक्ति नौकरी या शिक्षा में भेदभाव के विरुद्ध सुरक्षा पाता है?
हाँ, निजात-गेल अधिकार और समानता के सिद्धांतों के अनुसार भेदभाव रोकथाम के दावों के लिए वकील से सहायता मिल सकती है।
क्या Same-sex Couple Adoption कर सकते हैं?
वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त परिवार-आधार पर_same-sex couple के लिए संयुक्त अपनत्व स्पष्ट रूप से मान्यता प्राप्त नहीं है। कुछ अवसरों पर व्यक्तिगत अदालतें निर्णय दे सकती हैं, पर कानून स्पष्ट रूप से इसे मान्यता नहीं देता।
Transgender पहचान के लिए अदालत से कौन-सा कदम उठाने चाहिए?
स्थानीय नगरपालिका या जिला- प्राधिकरण के तहत पहचान-प्रमाण के लिए आवेदन दें। आवश्यक दस्तावेज और पहचान-आधार पर निर्भर फैसले होते हैं।
अगर मेरे साथ पुलिस-या अदालत में भेदभाव हो रहा हो तो क्या करें?
सबूत जुटाएं, एक वकील से मिलें और आवश्यक लिखित शिकायत दर्ज कराएं। अदालत-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई संभव है।
एलजीबीटी समुदाय के लिए कौन से नीतिगत संसाधन उपलब्ध हैं?
राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई संगठनों के साथ हेल्पलाइन और कानूनी सहायता उपलब्ध है।
क्या लैंगिक पहचान के कारण मेडिकल-केयर में भेदभाव होता है?
भेदभाव बंद हो सकता है और आवश्यक देखभाल तक पहुँच के लिए कानूनी उपाय अपनाए जा सकते हैं।
मैं कैसे सुनिश्चित कर सकता हूँ कि मेरा डेटा सुरक्षित रहे?
कानूनी मार्गदर्शन से तय करें कि कौन से दस्तावेज शेयर करें और किस विभाग के साथ डाटा साझा किया जाए।
हेट-क्राइम जैसे मामलों में क्या करें?
घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करें और वकील से संपर्क करें ताकि उचित जाँच और सुरक्षा मिल सके।
5. अतिरिक्त संसाधन
- Orinam - LGBTQ अधिकारों पर भारतीय संदर्भ में जानकारी और संसाधन। वेबसाइट: https://orinam.org/
- Naz Foundation India - एलजीबीटी स्वास्थ्य, सहायता और शिक्षा-कार्यक्रम। वेबसाइट: https://nazindia.org/
- The Humsafar Trust - शिक्षा, काउंसिलिंग और कानूनी सहायता के लिए संस्थागत नेटवर्क। वेबसाइट: https://www.humsafar.org/
6. अगले कदम
- अपने केस की प्रकृति स्पष्ट करें कि धारा 377, भेद-भाव,身份-मान्यता आदि किस दायरे में है.
- विश्वसनीय स्रोतों से स्थानीय LGBT-कानून-वार्ता के बारे में जानकारी जुटाएं.
- समझदारी के साथ क्षेत्रीय बार-आईन या बार काउंसिल से LGBT-फ्रेंडली वकील खोजें।
- पहला परामर्श समय-सीमा और फीस-रचना स्पष्ट करें।
- अपनी पहचान, दस्तावेज और प्रमाण-पत्र तैयार रखें ताकि कानूनी प्रक्रिया सरल हो।
- सीधे और स्पष्ट प्रश्न-सूची के साथ सलाहकार से मिलें ताकि आपके अधिकार सुरक्षित रहें।
- अगर आप चाहें तो सुरक्षा-निर्देशन और अस्थायी राहत के लिए अदालत-निर्देश प्राप्त करें।
नोट: भारत निवासियों के लिए यह गाइड तात्कालिक कानूनी सलाह नहीं है। हालिया अदालत-निर्णय और कानून-परिवर्तनों के लिए स्थानीय वकील से संपर्क करें।
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