भारत में सर्वश्रेष्ठ दिवाला एवं ऋण वकील

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Solomon & Co.
मुंबई, भारत

1909 में स्थापित
उनकी टीम में 75 लोग
English
दिवाला एवं ऋण
फर्म विभिन्न प्रकार के क्लाइंट्स का प्रतिनिधित्व करती है, जिसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां, सरकारी निकाय,...
Oberoi Law Chambers
नया दिल्ली, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
English
Hindi
फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
PNK Legal
मुंबई, भारत

English
PNK लीगल, मुंबई, भारत में स्थित, अपने विविध ग्राहकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कानूनी सेवाओं की एक व्यापक...
R K and Associates
लखनऊ, भारत

2003 में स्थापित
English
आर.के. एंड एसोसिएट्स भारत में एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है, जो दिवालियापन, सिविल, आपराधिक, वृद्ध एवं पारिवारिक कानून...
MythriLegal

MythriLegal

15 minutes मुफ़्त परामर्श
हैदराबाद, भारत

2019 में स्थापित
उनकी टीम में 25 लोग
English
Telugu
Hindi
मिथ्री लीगल हैदराबाद, तेलंगाना में एक विश्वसनीय कानून फर्म है जो आपराधिक रक्षा, जमानत, परीक्षण, सिविल विवाद,...
Candour Legal
अहमदाबाद, भारत

English
कैंडर लीगल अहमदाबाद में मुख्यालय वाला एक प्रतिष्ठित विधिक फर्म है, जो मुंबई और नई दिल्ली में अतिरिक्त कार्यालयों...
Solicis Lex
मुंबई, भारत

2013 में स्थापित
English
Solicis Lex एक तेजी से विस्तार कर रही भारतीय लॉ फर्म है, जो व्यक्तियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों...
CHOUDHARY AND ASSOCIATES ADVOCATES RANCHI AND NEW DELHI

CHOUDHARY AND ASSOCIATES ADVOCATES RANCHI AND NEW DELHI

15 minutes मुफ़्त परामर्श
रांची, भारत

2009 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Bengali
कॉर्पोरेट कानूनचौधरी एंड एसोसिएट्स की कॉर्पोरेट लॉ डिवीजन उन उत्कृष्ट टीमों में से एक है जिन्होंने कॉर्पोरेट...
R & D LAW CHAMBERS
अहमदाबाद, भारत

2015 में स्थापित
उनकी टीम में 9 लोग
English
आर एंड डी लॉ चैंबर्स घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए वाणिज्यिक रूप से प्रेरित कानूनी सलाह पर केंद्रित...
Samvad Partners
चेन्नई, भारत

2013 में स्थापित
उनकी टीम में 150 लोग
English
Samvād: Partners एक पूर्ण-सेवा भारतीय कानून फर्म है जिसकी बैंगलोर, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई और नई दिल्ली में कार्यालय हैं। हम...
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भारत दिवाला एवं ऋण वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न

हमारे 2 कानूनी प्रश्न ब्राउज़ करें दिवाला एवं ऋण के बारे में भारत में और वकीलों के उत्तर पढ़ें, या मुफ़्त में अपने प्रश्न पूछें.

ऋण
दिवाला एवं ऋण
वर्तमान में मैं कई असुरक्षित ऋणों में फंसा हुआ हूँ। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण मैंने अपनी नौकरी और सभी संपत्तियाँ खो दी हैं। क्या मुझे व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए जाना चाहिए?
वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा

प्रत्‍यक्ष तथ्यों के आधार पर यह समझाया गया है कि वर्तमान में भारत में व्यक्तिगत दिवालियापन पर इनसॉल्वेंसी एंड बैंकक्रप्सी कोड (IBC) लागू नहीं होता क्योंकि सामान्य व्यक्तियों से संबंधित प्रावधानों को अभी तक सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया...

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1 उत्तर
सर, मुझे अपने ग्राहक पार्टी से भुगतान लेना है और वह भुगतान नहीं कर रहा है।
दिवाला एवं ऋण
सर, मैं वस्त्र व्यापार कर रहा हूँ और मैंने अपनी पार्टी को 4,12,536/00 रुपये मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है। मेरा ग्राहक भुगतान नहीं कर रहा है, जबकि वह वित्तीय रूप से सक्षम है।
वकील का उत्तर Quartz Legal Associates द्वारा

दिए गए तथ्यों के आधार पर, मेरा परिपक्व मत है कि आपने अपनी वस्त्र व्यापार की सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत अपने ग्राहक को ₹4,12,536 मूल्य का वस्त्र प्रदान किया है, माल उचित रूप से डिलीवर और स्वीकृत हो चुका है,...

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1 उत्तर

1. भारत में दिवाला एवं ऋण कानून के बारे में: भारत में दिवाला एवं ऋण कानून का संक्षिप्त अवलोकन

भारत में दिवाला एवं ऋण कानून ऋणदार, ऋणदाता और निवेशकों के लिए एक स्पष्ट ढांचा देता है।

यह कानून कॉरपोरेट, व्यक्तिगत देनदारों और साझेदारी फर्मों पर लागू होता है और समय‑बद्ध समाधान सुनिश्चित करता है।

मुख्य ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code 2016 (IBC) के आसपास बना है; यह कॉर्पोरेट मामलों और व्यक्तिगत दिवालियापन दोनों को समाहित करता है।

IBC के अलावा ऋण संबंधी मुद्दों के लिए SARFAESI, RDDBFI जैसे वैधानिक प्रावधान भी प्रचलित हैं।

“The Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 consolidates and amends the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, individuals and partnership firms in a time bound manner.”
“The Code provides for time bound resolution of insolvency of corporate persons, individuals and partnership firms.”

आचार-संरचना के अनुसार NCLT/NCLAT न्यायिक निर्णय लेते हैं और IBBI नियामक प्रचालन करता है।

आधिकारिक स्रोत देखें: IBBI, NCLT/NCLAT, Legislation.gov.in पर IBC का पाठ और संचारित अधिनियम उपलब्ध है।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: दिवाला एवं ऋण कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्य

कानून समझना कठिन हो सकता है, इसलिए विशेषज्ञ वकील की सलाह आवश्यक है।

  • कॉन्टैक्ट‑कॉन्ट्रैक्ट बनाम दायित्वों के विवाद में CIRP शुरू करना चाहते हों। Essar Steel India Limited के CIRP उदाहरण में ऋणदाताओं की भूमिका निर्णायक रही।
  • व्यावसायिक देनदारियों के लिए औपरेशनल क्रेडिटर के तौर पर दावा दाखिल करना हो और प्रक्रिया का नियंत्रण चाहिए। Bhushan Power & Steel CIRP भी इसी प्रकार वर्षों तक चला था।
  • व्यक्तिगत दिवालिया की स्थिति हो और आपका गारंटर-स्तर का जोखिम हो। व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया कानूनी मार्ग से ही संभव है।
  • क्रॉस‑बॉर्डर insolvency के मुद्दे हों और विदेशी दायित्वों का समन्वय चाहिए।
  • सीआरआईपी के समय‑सीमा और मोराटोरियम जैसी राहतों के लिए उचित रणनीति बनानी हो।
  • कानूनी दस्तावेज, प्रतिवेदन और बोली‑प्रक्रिया के लिए एक सक्षम रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) चाहिए।

उपयोगी उदाहरणों के साथ कानूनन सहायता के लाभ:

  • प्रक्रिया के समयबद्ध ढांचे के कारण देनदारियों का त्वरित समाधान संभव होता है।
  • लेनदारों के समितियों और ट्रिब्यूनल के साथ समन्वय में वकील की भूमिका अहम होती है।

नोट: IBBI और NCLT के आधिकारिक मार्गदर्शन के अनुसार सही रणनीति के लिए अनुभवी अधिवक्ता का चयन करें।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: भारत में दिवाला एवं ऋण को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - दिवाला‑निपटान के लिए मुख्य कानून। CIRP, व्यक्तिगत दिवालियापन और लिक्विडेशन के मार्ग बंदोबस्त करता है।
  • SARFAESI Act, 2002 - बैंक‑फाइनेंशियल संस्थाओं के द्वारा संरक्षित ऋणों की तेजी से वसूली के लिए सुरक्षा‑कानून।
  • RDDBFI Act, 1993 - बैंकों के डेट रीकवरी ट्रिब्यूनलों (DRTs) के माध्यम से ऋण वसूली को त्वरित बनाता है।

इन कानूनों के साथ NCLT/NCLAT का न्यायिक नियंत्रण और IBBI का नियामक नियंत्रण सक्रिय है।

आधिकारिक स्रोत: Legislation.gov.in पर IBC, SARFAESI Act, RDDBFI Act के पाठ उपलब्ध हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिवाला क्या है और इसे कैसे परिभाषित किया गया है?

दिवाला वह स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति या संस्था पर ऋण का चुकता न करना कठिन हो जाए। IBC इसे निपटाने के लिए प्रक्रियाएं प्रदान करता है।

CIRP क्या है और यह कब शुरू होता है?

CIRP एक समय-सीमित पुनर्गठन प्रक्रिया है। यह तब शुरू होती है जब ऋणदाता आवेदन करते हैं या कंपनी स्वयं प्रस्ताव देती है और NCLT उसे स्वीकार करता है।

कौन आवेदन कर सकता है और किन शर्तों पर?

फायनेंशियल क्रेडिटर या ऑपरेशनल क्रेडिटर CIRP के लिए आवेदन कर सकते हैं; डिफॉल्ट राशि और अन्य शर्तें IBC की धारा के अनुसार तय होती हैं।

Moratorium कब लागू होता है और उसका प्रभाव क्या है?

Moratorium (ताला) के दौरान दायित्व डिफॉल्ट पर ऋणों के दावे प्रपत्रित होते हैं और नए दायित्व बनते नहीं।

रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) की भूमिका क्या होती है?

RP CIRP के दौरान संचालन चलाने, बोली प्रणाली संभालने और प्रस्तावित समाधान योजना को क्रियान्वित करने के लिए नियुक्त होता है।

कैसे क्रेडिटर्स कमेटी (CoC) बनती है और उसका निर्णय क्या होता है?

CoC में क्रेडिटर्स के प्रतिनिधि होते हैं जो प्रस्तावित रिज़ॉल्यूशन प्लान पर बहुमत से निर्णय लेते हैं।

यदि CIRP सफल नहीं होता तो क्या होता है?

अगर समाधान संभव न हो, तो देनदार की संपत्ति/liquidation की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

व्यक्तिगत दिवालिया और COMPANY दिवालिया में क्या अंतर है?

व्यक्तिगत दिवालिया व्यक्तिगत देनदार के लिए है, जबकि CIRP और लिक्विडेशन कॉर्पोरेट देनदारों पर लागू होता है।

Cross‑border insolvency के मामले कैसे संचालित होते हैं?

Cross‑border insolvency भारत‑विदेशी देनदारों के मामले पर IBC के प्रावधान लागू करते हैं और विदेशी न्यायालयों से समन्वय करते हैं।

अभ्यास के लिए वकील से क्या अपेक्षित करें?

कानून‑अनुभव, केस इतिहास, फीस संरचना और IBBI‑licensed प्रोफेशनल पहचानना जरूरी है।

क्या IBC MSMEs के लिए विशेष प्रावधान देता है?

हाल के बदलावों में MSMEs के लिए प्रक्रियाओं और नीतियों में сәйanjh बदला गया है; PPIRP के उपाय भी विचाराधीन रहे हैं।

मैं कैसे यह जाँच सकता हूँ कि मेरा केस किस कानून के अंतर्गत है?

सबसे अच्छा तरीका है IBBI या NCLT के आदेशों का अध्ययन और कानूनी सलाह लेना।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • IBBI - Insolvency and Bankruptcy Board of India - नियामक और प्रोफेशनल पंजीकरण की आधिकारिक साइट।
  • NCLT/NCLAT - National Company Law Tribunal & Appellate Tribunal - कॉरपोरेट दिवालिया मामलों के निर्णय।
  • Ministry of Corporate Affairs (MCA) - कॉरपोरेट कानून और संस्थागत निर्देशों की जानकारी।

उपयोगी लिंक: IBBI, NCLT, MCA

6. अगले कदम: दिवाला एवं ऋण वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपनी स्थिति स्पष्ट करें: कौन सा दायित्व, किस प्रकार का डिफॉल्ट।
  2. IBBI के पंजीकृत Insolvency Professionals (IP) की सूची देखें।
  3. IBC के अनुभवी वकीलों से पहले‑से‑परामर्श तय करें और विशेषताएँ पूछें।
  4. कानूनी सेवाओं के शुल्क, भुगतान संरचना और उम्मीदित परिणाम समझें।
  5. पिछले मामलों के अनुभव, सफलता दर और अनुसंधान‑स्तर जाँचें।
  6. कानूनी दस्तावेज़ों के लिए आवश्यक सूची बनाएं-ड्यू डिफॉल्ट, बकाया राशि आदि।
  7. आरोहण से पहले व्यापक प्रश्न पूछें, ताकि रणनीति स्पष्ट हो जाए।

नौकरी‑योजना बनाकर एक विकल्पी बैठक में वकील चुनें। आधिकारिक पथ के अनुसार IBBI के पंजीकृत प्रोफेशनल्स से मिलें।

टिप्पणी: भारत निवासियों के लिए व्यावहारिक सलाह यह है कि चिंता को कम करने के लिए पहले अपने क्रेडिटर्स से बातचीत करें, फिर वैधानिक प्रक्रिया अपनाएं।

Lawzana आपको योग्य कानूनी पेशेवरों की चयनित और पूर्व-जाँच की गई सूची के माध्यम से भारत में में सर्वश्रेष्ठ वकील और कानूनी फर्म खोजने में मदद करता है। हमारा प्लेटफ़ॉर्म अभ्यास क्षेत्रों, दिवाला एवं ऋण सहित, अनुभव और ग्राहक प्रतिक्रिया के आधार पर तुलना करने की अनुमति देने वाली रैंकिंग और वकीलों व कानूनी फर्मों की विस्तृत प्रोफ़ाइल प्रदान करता है।

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इस पृष्ठ पर दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। हम सामग्री की सटीकता और प्रासंगिकता सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं, लेकिन कानूनी जानकारी समय के साथ बदल सकती है, और कानून की व्याख्या भिन्न हो सकती है। आपको अपनी स्थिति के लिए विशिष्ट सलाह हेतु हमेशा एक योग्य कानूनी पेशेवर से परामर्श करना चाहिए।

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