भारत में सर्वश्रेष्ठ दिवालियापन वकील

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2021 में स्थापित
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लैक्सटेम्पल एलएलपी एक भारत आधारित लॉ फर्म है जिसका नेतृत्व अधिवक्ता सचिन नायक करते हैं, और यह भोपाल कार्यालय से...
Advocate Ankit Kumar Singh
पटना, भारत

2018 में स्थापित
उनकी टीम में 1 व्यक्ति
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एडवोकेट अंकित कुमार सिंह की विशेषज्ञता में आपका स्वागत है – प्रतिष्ठित पटना हाई कोर्ट में आपके विश्वसनीय कानूनी...
AK Legal Consultants | Trusted Law Firm in Ahmedabad
अहमदाबाद, भारत

2024 में स्थापित
English
ए.के. लीगल कंसल्टेंट्स अहमदाबाद की एक विश्वसनीय लॉ फर्म है जो कॉर्पोरेट, वाणिज्यिक और सीमा-पार मामलों में व्यापक...
CHOUDHARY AND ASSOCIATES ADVOCATES RANCHI AND NEW DELHI

CHOUDHARY AND ASSOCIATES ADVOCATES RANCHI AND NEW DELHI

15 minutes मुफ़्त परामर्श
रांची, भारत

2009 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Bengali
कॉर्पोरेट कानूनचौधरी एंड एसोसिएट्स की कॉर्पोरेट लॉ डिवीजन उन उत्कृष्ट टीमों में से एक है जिन्होंने कॉर्पोरेट...

English
नवी मुंबई में ए.के. श्रीम हाउस ऑफ लॉयर्स एक प्रमुख कानूनी अभ्यास के रूप में विशिष्ट है, जो विभिन्न अभ्यास क्षेत्रों...
Advocate Kunal Sharma
जयपुर, भारत

2010 में स्थापित
English
जयपुर, राजस्थान में आधारित एडवोकेट कुणाल शर्मा ने 2010 से व्यापक कानूनी सेवाएं प्रदान की हैं। एक दशक से अधिक अनुभव के...
PNK Legal
मुंबई, भारत

English
PNK लीगल, मुंबई, भारत में स्थित, अपने विविध ग्राहकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कानूनी सेवाओं की एक व्यापक...
Numen Law Offices
मुंबई, भारत

2019 में स्थापित
English
न्यूमेन लॉ ऑफिसेज़ भारत में एक विशिष्ट बहु-विषयक विधिक फर्म है, जो विवाद समाधान, कॉर्पोरेट परामर्श और आपराधिक...
R & D LAW CHAMBERS
अहमदाबाद, भारत

2015 में स्थापित
उनकी टीम में 9 लोग
English
आर एंड डी लॉ चैंबर्स घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए वाणिज्यिक रूप से प्रेरित कानूनी सलाह पर केंद्रित...
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भारत में दिवालियापन कानून के बारे में

भारत का प्रमुख दिवालियापन कानून दवाब पुनर्गठन और दिवालियापन संहिता, 2016 है जिसे IBC कहा जाता है। यह कॉर्पोरेट, साझेदारी और व्यक्तिगत दिवालियापन मामलों को एक जगह पर लाकर समय-सीमित समाधान देता है। IBC के साथ Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI), National Company Law Tribunal (NCLT) और Insolvency Professionals जैसे संस्थान और व्यक्तियों का एक व्यापक फ्रेमवर्क बनता है।

IBC का मकसद परिसंपत्तियों के मूल्य को अधिकतम करना है और क्रेडिटर्स के हितों की रक्षा करना है। प्रक्रियाएं तेज, पारदर्शी और क्रेडिटर्स के साथ सहयोग पर केंद्रित हैं। कोर्ट और नियामक संस्था मिलकर स्पष्ट प्रक्रियाओं, निर्णय प्रक्रियाओं और वितरण पथ का निर्धारण करते हैं।

"The Code provides for a time bound insolvency resolution process to maximize the value of the assets of a debtor."
"Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 consolidates and amends the laws relating to reorganization and insolvency resolution."

IBC के अनुसार CIRP (Corporate Insolvency Resolution Process) अधिकतर 180 दिन की अवधि में पूरा करने का लक्ष्य रखता है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर 90 दिन तक बढ़ाया जा सकता है। यह विस्तार क्रेडिटर्स की समिति (CoC) की सहमति और NCLT की अनुमति से संभव है। साथ ही, व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए अलग प्रावधान भी मौजूद हैं ताकि व्यक्ति‑स्तरीय दायित्व हल हो सके।

आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे 4-6 विशिष्ट परिदृश्य बताये जा रहे हैं जिनमें दिवालियापन कानून में विशेषज्ञता वाला वकील जरूरी हो जाता है। वास्तविक भारतीय केसों के संदर्भ gemeinsam दिए गये हैं।

  • कंपनी डिफॉल्ट पर CIRP दाखिल करने का निर्णय - एक बड़ी कंपनी कर्ज लौटाने में असमर्थ हो तो CIRP शुरू होता है। उदाहरण: Essar Steel India Ltd ने CIRP दर्ज किया और 2019 में समाधान योजना पर निर्णय हुआ। ऐसे मामलों में सही प्रोफेशनल नेतृत्व आवश्यक होता है।

  • बैंकों या फाइनेंसरों के विरुद्ध ऋण-वसूली और संरचना निर्णय - बैंकों द्वारा गिरफ्तारी, ऋण पुनर्गठन या ऋणदायित्व की पुनर्रचना की सहायता में वकील चाहिए। DHFL ने IBC के अंतर्गत CIRP शुरू किया, जहां क्रेडिटर्स समूह का निर्णय महत्वपूर्ण था।

  • MSME द्वारा त्वरित समाधान चाहते हों - MSMEs के लिए MSME प्री-पैक (pre-pack) जैसे नवीन प्रावधान और पूर्व-समझौते से समाधान की धारणा बनती है। उचित कानूनी मार्गदर्शन से प्रक्रिया सूक्ष्म रहती है।

  • व्यक्ति दिवालियापन (Personal Insolvency) का चयन - एक व्यक्ति के व्यक्तिगत दिवालियापन से जुड़ी योजना, फाइनेसिंग और क्रेडिटर इंटरफेस जटिल हो सकता है; इसलिए अनुभवी वकील जरूरी हो जाता है।

  • क्रॉस-बॉर्डर इनसॉल्वेंसी मामले - विदेशी प्रवाह और भारतीय अदालतों के साथ समन्वय में कानून की सही समझ आवश्यक है। बोर्ड‑आडिट और क्रॉस-बॉर्डर प्रोसीजर से जुड़ी सेवाओं के लिए विशेषज्ञ की जरूरत होती है।

  • कम्प्लायंस और नियामक इंटरफेस - IBBI, NCLT और NCLAT के साथ डीलिंग में प्रक्रिया‑अनुसार दस्तावेज़, नोटिस और सुनवाई के नियम समझना जरूरी है।

स्थानीय कानून अवलोकन

भारत में दिवालियापन से जुड़े प्रमुख कानूनों के नाम नीचे दिए गये हैं, ताकि आप एक पाठक के रूप में प्रभावी निर्णय ले सकें।

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - दिवालियापन और पुनर्गठन की एक समेकित व्यवस्था है।
  • Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI) -secured क्रेडिटर्स के रिकवरी प्रक्रियाओं के लिए अहम कानून है।
  • Companies Act, 2013 - कॉर्पोरेट संरचना और पुनर्गठन के साथ IBC के साथ समन्वय के लिए प्रासंगिक प्रावधान देता है।

इन कानूनों के तहत क्रेडिटर्स, डेब्टर्स और कोर्ट के बीच स्पष्ट अधिकार और दायित्व तय होते हैं। IBC की cross‑border provisions विदेशी सिद्धांतों के साथ सहयोग की राह भी खोलती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IBC क्या है?

IBC एक समेकित कानून है जो कॉर्पोरेट, साझेदारी और व्यक्तिगत दिवालिएपन के विवादों को एक जगह पर हल करता है। यह समय‑सीमा के भीतर समाधान की ओर केंद्रित है।

IBC के तहत किसे दायर किया जा सकता है?

IBC में डेब्टर (कर्जदार) और क्रेडिटर दोनों पक्ष दायर कर सकते हैं। सामान्यतः कंपनी, साझेदारी फर्म और व्यक्ति देनदारी के भूगोल में आते हैं।

CIRP क्या है और इसकी अवधि कितनी है?

CIRP Corporate Insolvency Resolution Process है जो सामान्यतः 180 दिनों की है। अगर आवश्यक हो तो 90 दिन और बढ़ाये जा सकते हैं, पर NCLT की अनुमति चाहिए।

IP कौन होते हैं?

Insolvency Professional (IP) वे प्रोफेशनल होते हैं जो CIRP के दौरान प्रोसीजर को चलाते हैं। IPs IBBI के पंजीकृत होते हैं और उनकी जिम्मेदारी ट्रांसपेरेंट निर्णय सुनिश्चित करना है।

NCLT और NCLAT क्या भूमिका निभाते हैं?

NCLT एक अदालती मंच है जो insolvency petitions का निर्णय देता है। NCLAT उसका अपीलीय विदान है और अंतिम निर्णय में भूमिका निभाता है।

IBC में क्रेडिटर समिति (CoC) का क्या काम है?

CoC CIRP के दौरान मुख्य निर्णय लेती है, जैसे सॉल्यूशन प्लान की मंजूरी और डेविडिंग के वितरण के नियम।

मैं किस प्रकार insolvency petition दायर कर सकता/सकती हूँ?

क्रेडिटर तभी petition दाखिल कर सकता है जब देनदारी का default स्पष्ट हो। व्यक्तिगत आवेदक के लिए अलग प्रक्रिया है।

प्री-पैक insolvency MSMEs के लिए कैसे काम करता है?

PPI प्रक्रिया एक तेज़, कम लागत वाला मार्ग हो सकता है। यह MSMEs के लिए स्टेप्स को सरल बनाता है और समाधान को गति देता है।

क्रॉस-बॉर्डर insolvency क्या है?

यह विदेशी प्रक्रियाओं के साथ सहयोग और मान्यता को स्थापित करने की व्यवस्था है। इससे भारतीय संपत्तियों के मूल्यांकन में पारदर्शिता बढ़ती है।

व्यक्तिगत दिवालियापन में कानूनी विकल्प क्या हैं?

IBC Personal Insolvency Resolution Process के जरिये व्यक्तिगत देनदारियों का निपटारा किया जा सकता है। यह आमतौर पर ऋण चुकाने की योजना पर आधारित होता है।

कानूनी फीस और खर्च कैसे तय होते हैं?

IBC मामलों में फीस पैटर्न IP, फर्म और केस की जटिलता पर निर्भर करता है। प्रारम्भिक परामर्श में स्पष्ट अनुमान मांगा जाना चाहिए।

क्रेडिट को कैसे संग्रहित करें ताकि मामला मजबूत हो?

सक्रीय दस्तावेज जैसे agreement, debt schedule, bank statements एकत्र रखें। नोटिस और सूचना देंखते समय एक वकील से सलाह लें।

क्या मैं आगे बढ़ने से पहले कानून विशेषज्ञ से मिल सकता/सकती हूँ?

हाँ, पहले consulta‑tion से केस के दायरे, समयरेखा और लागत का अंदाजा मिल सकता है। यह आपके फैसलों को सरल बनाता है।

अतिरिक्त संसाधन

नीचे India में दिवालियापन से जुड़े 3 विशिष्ट संगठन दिए गये हैं, जहाँ से आप आधिकारिक जानकारी और सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - आधिकारिक नियामक संस्था; IP पंजीकरण और पाठ्यक्रम जानकारी मिलती है। लिंक: https://www.ibbi.gov.in/
  • National Company Law Tribunal (NCLT) - दिवालियापन मामलों की पहली अदालत; वेबसाइट और केस स्टेटस यहां मिलते हैं। लिंक: https://nclt.gov.in/
  • National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) - NCLT के फैसलों के विरुद्ध अपीलीय मंच; लिंक: https://nclat.nic.in/

अगले कदम

  1. अपना केस प्रकार तय करें - कंपनी, MSME या व्यक्तिगत दिवालियापन।
  2. IBBI के पंजीकृत Insolvency Professional (IP) ढूंढें और उनसे पहली बैठक तय करें।
  3. IP के अनुभव, विशेषज्ञता और केस‑हिस्ट्री की जाँच करें।
  4. स्थानीय कानून फर्म से प्रारम्भिक परामर्श लें और उम्मीद‑टाइमलाइन पूछें।
  5. फीस, खर्च और संभावित रिज़ॉल्यूशन प्लान के बारे में स्पष्ट लिखित अनुबंध लें।
  6. जरूरी दस्तावेज जैसे debt schedule, agreements और bank statements एकत्र रखें।
  7. पहली मुलाकात के बाद एक स्पष्ट कार्य योजना बनाकर कदम बढ़ाएं।

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