भारत में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील

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Solomon & Co.
मुंबई, भारत

1909 में स्थापित
उनकी टीम में 75 लोग
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Marathi (Marāṭhī)
मुकदमें और विवाद पुनर्गठन और दिवालियापन एडीआर मध्यस्थता और पंचाट +6 और
फर्म विभिन्न प्रकार के क्लाइंट्स का प्रतिनिधित्व करती है, जिसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां, सरकारी निकाय,...
CNS JURIS
पुणे, भारत

2006 में स्थापित
उनकी टीम में 30 लोग
English
CNS JURIS is a Pune, India-based, full-service law firm that provides centralized, personalized legal solutions across property and real estate laws, litigation and disputes, corporate laws and consultation, and intellectual property law. The firm emphasizes a client-oriented culture and a...
SJG & Associates
नया दिल्ली, भारत

2015 में स्थापित
English
Established in 2015, SJG & Associates is a premier full-service law firm based in New Delhi with a PAN India footprint, delivering professional and results-driven legal services to individuals, startups and corporates. The firm is known for its expertise across family law, corporate and commercial...

2010 में स्थापित
उनकी टीम में 500 लोग
English
ABHISHEK BHATNAGAR AND ASSOCIATES LEGAL CONSULTANTS LLP is a Lucknow-based law firm with PAN India reach, founded in 2010 by Adv. Abhishek Bhatnagar. It is recognized for its focus on cyber laws and cyber forensics, and has grown into a prominent, dedicated, committed, tested, and trusted name for...
अहमदाबाद, भारत

1982 में स्थापित
English
1982 में स्थापित महेंद्र भवसार एंड कंपनी गुजरात, भारत में आधारित एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है, जिसके अहमदाबाद और सूरत में...
Quillon Partners
मुंबई, भारत

2020 में स्थापित
English
क्विलॉन पार्टनर्स एक प्रतिष्ठित भारतीय कानून फर्म है जिसे कॉर्पोरेट और वाणिज्यिक कानून में उत्कृष्टता के लिए...
Law Offices of Sameer & Associates
हैदराबाद, भारत

2014 में स्थापित
उनकी टीम में 12 लोग
English
Hindi
Telugu
Urdu
हैदराबाद और दिल्ली स्थित समीर हुसैन एंड एसोसिएट्स का कार्यालय फैमिली कोर्ट, सिविल कोर्ट, क्रिमिनल कोर्ट, फोरम,...
Vis Legis Law Practice, Advocates
मुंबई, भारत

2017 में स्थापित
English
विस लेजिस लॉ प्रैक्टिस, एडवोकेट्स (वीएलएलपी) एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है जिसकी मुंबई, नई दिल्ली, पुणे और हैदराबाद में...
जैसा कि देखा गया

1. भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून के बारे में: भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन के विषय को एक ही मंच पर लाने के लिए Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) स्थापित किया गया था।

IBC द्वारा कॉर्पोरेट, व्यक्तिगत और साझेदारी फर्मों के दिवालियापन के मामलों के लिए समय-सीमित प्रक्रियाएं निर्धारित की गई हैं।

“The Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 provides a time-bound framework for resolving insolvency.”
Source: https://www.ibbi.gov.in
“An Act to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals.”
Source: Preamble of the Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (Ministry of Corporate Affairs)

IBC के अनुसार केंद्रीय नियामक संस्था IBBI पंजीकृत Insolvency Professionals (IPs) और Information Utilities का प्रबंधन کرتی है।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: पुनर्गठन और दिवालियापन कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें

  • कंपनी दिवालिया होने के कगार पर है और CIRP शुरू होना चाहिए। प्रमुख ऋणदाताओं के समक्ष पुनर्गठन योजना की मांग होती है। उदाहरण के तौर पर Essar Steel India Limited ने CIRP दर्ज करवाया और अंततः अरसे के बाद अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू हुई।

    यह स्थिति आने पर एक विधिक सलाहकार आपको CIRP का सही दायरा, क्रेडिटर्स कमेटी (CoC) की भूमिका तथा संभावित समाधान के विकल्प समझाता है।

  • बड़े बैंकों के ऋणों पर सुरक्षा-सम्हाल (Secured Debt) के मामले में SARFAESI बनाम IBC के चुनाव की जरूरत। SARFAESI के तहत त्वरित संपत्ति ग्रहण और बिक्री संभव है, जबकि IBC में पुनर्गठन या मूल्यवर्धन पर अधिक नियंत्रण मिलता है।

    एक адвक्ता आपकी स्थिति के अनुरूप सही कानून चुनने में मार्गदर्शन करेगा और प्रक्रियागत कदम सुनिश्चित करेगा।

  • परियोजना-आधारित ऋणों के дефॉल्ट से निर्माण-कार्य प्रभावित होते हैं। Bhushan Power & Steel जैसे मामलों में CIRP के अंतर्गत पुनर्गठन योजना बनती है।

    आपके प्रोजेक्ट के आंशिक या पूर्ण रुकने पर कानूनी सलाहकार समयसीमा और बॉन्डिंग-डायरेक्शन स्पष्ट कर सकता है।

  • व्यक्ति-स्तर पर ऋण-समस्या के साथ व्यवसायिक प्रत्याशा घटित हो। IBC व्यक्तिगत दिवाळखोरी के अवसर देता है जिससे व्यक्तिगत ऋणों का पुनर्गठन संभव होता है।

    एक अधिवक्ता व्यक्तिगत-नैसर्गिक स्थिति के अनुसार उपयुक्त कदम सुझाएगा और आवश्यक दस्तावेज बताएगा।

  • कंपनी के क्रॉस-बॉर्डर ऋण या विदेशी इकाइयों के साथ इंटरफेस। Cross-border insolvency के विषय में IBC के अंतर्गत संहिता और नियम होते हैं।

    कानूनी सलाहकार आपके साथ विदेशी बकाया, निर्णायक अदालत, और समन्वय-सम्पादन की योजना बनायेगा।

  • प्रायोगिक पुनर्गठन/प्री-पैक insolvency के बारे में सलाह। 2021 के संशोधनों के चलते कुछ स्थितियों में प्री-पैक-प्रक्रिया की चर्चा शुरू हुई है।

    आपके व्यवसाय के आकार और ऋण-संरचना के अनुसार वकील यह बताने में मदद करेंगे कि प्री-पैक उपयुक्त है या नहीं।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें

Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - कॉर्पोरेट, व्यक्तिगत और साझेदारी फर्म के दिवालियापन- पुनर्गठन के लिए केंद्रीय कानून।

Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI Act) - बैंक-ऋणों के सुरक्षा-हितों के प्रवर्तन और संपत्ति-ग्रहण के साधन के रूप में प्रयोग होता है।

Companies Act, 2013 - कंपनियों के पुनर्गठन, समझौते, संकल्पनाओं और निर्गम-सम्बन्धी प्रक्रियाओं में प्रचलित है; IBC के साथ परस्पर क्रिया करता है।

“The Code provides time-bound resolution processes to maximize asset value and balance stakeholder interests.”
Source: https://www.ibbi.gov.in
“The preamble of the IBC envisions consolidation and amendment of laws relating to reorganization and insolvency resolution.”
Source: Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 - Preamble

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: 10-12 प्रश्न-उत्तर जोड़े

IBC क्या है?

IBC एक केंद्रीय कानून है जो पुनर्गठन और दिवालियेन-सम्भवता के लिए प्रक्रियाएं देता है। यह कॉर्पोरेट, व्यक्तिगत और साझेदारी फर्मों पर लागू होता है।

CIRP क्या है और कितने समय में पूरा होता है?

CIRP Corporate Insolvency Resolution Process है। सामान्य रूप से यह 180 दिन में पूरा करने का लक्ष्य है; NCLT द्वारा 90 दिनों तक विस्तार संभव है।

Moratorium किस प्रकार लागू होता है?

IBC के तहत CIRP शुरू होने के बाद व्यक्तिगत-व्यक्ति के वित्तीय लेन-देन पर रोक लगती है ताकि नये जोखिम न उठें और संपत्ति सुरक्षित रहे।

IP क्या होता है और उसका रोल क्या है?

IPO/ Insolvency Professional वह व्यक्ति है जो CIRP के निष्पादन, क्रेडिटर्स-सीमीकरण, और योजना-प्रस्ताव का संचालन करता है।

CoC (Creditors' Committee) कौन बनाता है?

CoC उस ऋण-दाताओं के समूह से बनता है, जो दिवालिया कंपनी के ऋण-समझौतों के फैसले में भाग लेते हैं।

क्या व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया IBC के अंतर्गत संभव है?

हाँ, IBC व्यक्तिगत दिवालियापन (Individual Insolvency) के लिए भी उपाय देता है, ताकि व्यक्तिगत ऋणों का पुनर्गठन हो सके।

IBBI कौन है और उसका क्या कार्य है?

IBBI विकेंद्रीकृत संस्थान है जो Insolvency Professionals, Information Utilities आदि का регुलेट करता है।

SARFAESI बनाम IBC में फर्क क्या है?

SARFAESI सुरक्षा-हित-प्रत्यायन के लिए है और संपत्ति पर त्वरित नियंत्रण देता है, जबकि IBC पुनर्गठन और दिवालिया निर्णय-निर्माण पर केंद्रित है।

IBC amended क्यों किया गया?

संशोधित किया गया ताकि प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और संस्थागत स्तर पर मजबूत बने।

कौन से दस्तावेज जरूरी होते हैं CIRP के लिए?

डायनालिसिस-डिजिटल फाइल, ऋण-सम्बन्धी अनुबंध, मौजूदा वित्तीय स्टेटमेंट, और CoC-निर्णयों के रिकॉर्ड शामिल होते हैं।

मैं अपने वकील के साथ कैसे शुरू करूं?

पहला कदम-संक्षेप में समस्या बताएं, फिर दस्तावेजों की एक सूची बनाएं और IP-फर्म के साथ प्रारम्भिक परामर्श शेड्यूल करें।

कौन से अधिकृत रिकॉर्ड चाहिए?

कंपनी के अंतिम वित्तीय स्टेटमेंट, क्रेडिटर्स-लिस्ट, संपत्ति-टाइटल, मौजूदा व्यवस्थापन अनुबंध आदि आवश्यक होते हैं।

कानूनी सहायता के लिए शुल्क कैसे तय होते हैं?

फीस संरचना फिक्स्ड-फीस या घंटे-आधारित हो सकती है; कुछ मामलों में सफलता-आधारित फीस भी हो सकती है।

5. अतिरिक्त संसाधन: पुनर्गठन और दिवालियापन से संबंधित 3 विशिष्ट संगठन

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - IPs, Information Utilities आदि का नियमन। https://www.ibbi.gov.in
  • National Company Law Tribunal (NCLT) - insolva-lex मामलों की फाइनल सुनवाई और निर्णय), https://nclt.gov.in
  • Reserve Bank of India (RBI) - बैंक-ऋण नीतियाँ और दिवाला-सम्बन्धी दिशानिर्देश; https://www.rbi.org.in

6. अगले कदम: पुनर्गठन और दिवालियापन वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपने व्यवसाय की स्थिति स्पष्ट करें: किस प्रकार की पुनर्गठन या दिवालियापन आवश्यकता है?
  2. समझें कि IBC, SARFAESI, या Companies Act में से कौन सा मार्ग सही है?
  3. IBC के पंजीकृत Insolvency Professionals (IPs) और कानून फर्मों की सूची बनाएं-IBBI साइट पर देखें।
  4. पूर्व केस-निम्न-प्रस्तावों और सफलता की कहानीनों को जाँचें, उनकी विशेषज्ञता के अनुसार शॉर्टलिस्ट करें।
  5. पहला जान-परिचय सत्र (कंसल्टेशन) तय करें और उनके शुल्क-रचना स्पष्ट करें।
  6. डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें: वित्तीय स्टेटमेंट, ऋण अनुबंध, CoC-रिकॉर्ड आदि।
  7. चयन के बाद पूर्ण-एग्रीमेंट पर दस्तखत करें और रणनीति बनाएं।

Lawzana आपको योग्य कानूनी पेशेवरों की चयनित और पूर्व-जाँच की गई सूची के माध्यम से भारत में में सर्वश्रेष्ठ वकील और कानूनी फर्म खोजने में मदद करता है। हमारा प्लेटफ़ॉर्म अभ्यास क्षेत्रों, पुनर्गठन और दिवालियापन सहित, अनुभव और ग्राहक प्रतिक्रिया के आधार पर तुलना करने की अनुमति देने वाली रैंकिंग और वकीलों व कानूनी फर्मों की विस्तृत प्रोफ़ाइल प्रदान करता है।

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